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प्राथमिक विद्यालयों में जुलाई से पहले नहीं आएंगी नई किताबें

Thu, 23 Jun 2022 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 11:45 PM IST
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New books will not come in primary schools before July
नए सत्र को शुरू हुए करीब तीन महीने का समय हो चला है। ग्रीष्मावकाश के बाद फिर से स्कूल खुल गए हैं मगर शासन की ओर से किताबों की छपाई संबंधी टेंडर प्रक्रिया में देरी से बच्चों को नई किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ज्यादातर बच्चे पुरानी किताबों से ही पढ़ाई करने को विवश हैं। हालांकि विभागीय अफसर क्रयादेश जारी होने का हवाला देते हुए शीघ्र किताबों की खेप आने का दावा कर रहे हैं।
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एक ओर सरकार परिषदीय विद्यालयों को निजी के समान बनाने के उद्देश्य से स्कूलों में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। शिक्षकों को अभियान चलाकर स्कूलों में बच्चों के नामांकन का भारी भरकम लक्ष्य दिया गया है। नामांकन तो बढ़ने लगा मगर किताबों के बिना पढ़ाई जोर नहीं पकड़ पा रही। जिले के 2061 परिषदीय विद्यालयों में 2.70 लाख के करीब बच्चों का नामांकन हुआ है। इन बच्चों को शासन से अभी तक किताबें व कार्य पुस्तिकाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। ऐेसे में बच्चों के साथ ही शिक्षकों को भी कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है।
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ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद बच्चों व शिक्षकों में यह उम्मीद थी कि किताबें स्कूल खुलने पर उपलब्ध हो सकेंगी मगर ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में शिक्षक अगली कक्षा में गए छात्रों व उनके अभिभावकों से संपर्क कर पुरानी किताबों को एकत्र कर रहे हैं। उन्हीं किताबों को नई कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे किताबों से वंचित हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रकाशकों के लिए किताबों की आपूर्ति की अंतिम तिथि सितंबर का पहला सप्ताह है। क्रयादेश के बाद किताबें 90 दिन और कार्य पुस्तिका अधिकतम 120 दिन के अंदर उपलब्ध करानी होती है। बीएसए कार्यालय की ओर से सक्रियता दिखाते हुए 13 अप्रैल को ही 2.74 लाख बच्चों की किताबों के लिए क्रयादेश जारी कर दिया गया है जबकि कई जिले अभी तक पीछे हैं। ऐसे में पहले चरण के तहत ही जुलाई के तीसरे सप्ताह में यहां किताबें पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
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किताबों की ढुलाई के लिए तैयारी पूर्ण
किताबें समय से न उपलब्ध न होने पर शिक्षक घर-घर जाकर पुरानी किताबों को एकत्रित कर बच्चों को उपलब्ध कराने में जुटे हैं। वहीं विभाग की किताबों की आपूर्ति का इंतजार है। किताबों को स्कूलों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए विभाग की ओर से आवश्यक प्रकिया व संसाधनों की व्यवस्था कर ली गई है। जैसे-जैसे किताबें आएगी आपूर्ति होती रहेगी।

किताबों के लिए क्रयादेश जारी हो चुका है। किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी कर ली गई है। जैसे ही आपूर्ति होती है। उसका वितरण शुरू कर दिया जायेगा। विकल्प के तौर पर शिक्षक पुरानी किताबों को एकत्रित कर बच्चों को उपलब्ध करा रहे हैं। - हरिवंश कुुमार, बीएसए
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