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Sonebhadra News: उमेश हत्याकांड में नक्सलियों के संरक्षक संत कुमार को उम्रकैद
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सोनभद्र। करीब साढ़े 16 साल पहले हुए उमेश चौधरी हत्याकांड में बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने दोषी संत कुमार चेरा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। संत कुमार नक्सलियों का संरक्षण दाता रहा है। कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं, तीन नक्सलियों अनिल ठाकुर, लालब्रत कोल व मुन्ना विश्वकर्मा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन के कन्हौरा निवासी दीनानाथ चौधरी ने 25 जनवरी 2009 को थानाध्यक्ष चोपन को तहरीर दी थी। बताया था कि 24 जनवरी की शाम 7 बजे गांव के संत कुमार चेरो और उसके भाई बाबा चेरो उसकी परचून की दुकान पर आए। दुकान पर बैठी पत्नी चंचला को बकाया 50 रुपये दिया और फिर से उधार सामान मांगने लगे। जब पत्नी ने सामान देने से इंकार किया तो जबरन कुर्सी उठाकर ले जाने लगे।
बेटा उमेश चौधरी ने उन्हें रोका और दो मारपीट कर कुर्सी छुड़ाकर भगा दिया। करीब एक घंटे बाद रात 8 बजे दोनों फिर आए। दोनों बेटे उमेश चौधरी को बुलाकर कुछ दूर ले गए और गोली मार दी। तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की। विवेचक ने कोर्ट में नक्सलियों के संरक्षक संत कुमार चेरो, उसके भाई बाबा, नक्सली अनिल ठाकुर, नक्सली लालब्रत कोल व नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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आरोपी बाबा चेरो के गायब के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, 8 गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने पर संत कुमार चेरो को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने चार महीने अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, तीन नक्सलियों अनिल ठाकुर, लालब्रत कोल व मुन्ना विश्वकर्मा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन के कन्हौरा निवासी दीनानाथ चौधरी ने 25 जनवरी 2009 को थानाध्यक्ष चोपन को तहरीर दी थी। बताया था कि 24 जनवरी की शाम 7 बजे गांव के संत कुमार चेरो और उसके भाई बाबा चेरो उसकी परचून की दुकान पर आए। दुकान पर बैठी पत्नी चंचला को बकाया 50 रुपये दिया और फिर से उधार सामान मांगने लगे। जब पत्नी ने सामान देने से इंकार किया तो जबरन कुर्सी उठाकर ले जाने लगे।
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बेटा उमेश चौधरी ने उन्हें रोका और दो मारपीट कर कुर्सी छुड़ाकर भगा दिया। करीब एक घंटे बाद रात 8 बजे दोनों फिर आए। दोनों बेटे उमेश चौधरी को बुलाकर कुछ दूर ले गए और गोली मार दी। तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की। विवेचक ने कोर्ट में नक्सलियों के संरक्षक संत कुमार चेरो, उसके भाई बाबा, नक्सली अनिल ठाकुर, नक्सली लालब्रत कोल व नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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आरोपी बाबा चेरो के गायब के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, 8 गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने पर संत कुमार चेरो को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने चार महीने अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, तीन नक्सलियों अनिल ठाकुर, लालब्रत कोल व मुन्ना विश्वकर्मा को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।