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लंबित केस सुलझाने का जरिया है लोक अदालत
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:38 PM IST
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दीप प्रज्जवलित करते हुए
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उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि राष्ट्रीय लोक अदालत सही इंसाफ दिलाने और लंबित मुकदमों को खत्म करने का जरिया है। इसमें ज्यादा से ज्यादा मुकदमे के निस्तारण की कोशिश की जाए। मुकदमों का निस्तारण सुलह- समझौते के आधार पर कराया जाए।
जिला न्यायालय परिसर में उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर व सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने पंडाल में विभिन्न विभागों, बैंकों के लगाये गये काउंटरों का निरीक्षण किया। कहा कि, राष्ट्रीय लोक अदालत में बहुत बड़ी भूमिका न्यायिक अधिकारियों के साथ ही अधिवक्ताओं, जिला प्रशासन के अधिकारियों, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की होती है।
इसमें किसी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं लगती। बताया कि लोक अदालत की शुरूआत वर्ष 1982 में पहली बार गुजरात राज्य से शुरू हुई और अब लोक अदालत काफी बड़ा स्वरूप ले चुकी है। वकीलों से अपेक्षा किया कि झगड़े को आपसी सुलह-समझौते पर निस्तारित कराएं, ताकि लोगों को मुकदमों में कम से कम उलझना पड़े।
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लोक अदालत में कुल 35554 वाद निस्तारित किए गए। इसमें दो लाख 31 हजार 25 रुपये अर्थदंड लगाया गया और तीन करोड़ 94 लाख, 33 हजार 217 रुपये वसूल किये गए। इस मौके पर जिला न्यायाधीश राम आधार राम, एडीजे, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत यशवंत मिश्रा, एडीजे एफटीसी संतराम, एडीएम उमाकांत त्रिपाठी, सीजेएम सुबोध वार्ष्णेय, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिद्धार्थ कुमार वागव, सिविल जज सीनियर डिविजन विनय कुमार सिंह, एसीजेएम मानवर्धन, एसडीएम सदर विशाल यादव, सीओ धनंजय सिंह कुशवाहा मौजूद रहे।
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जिला न्यायालय परिसर में उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर व सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने पंडाल में विभिन्न विभागों, बैंकों के लगाये गये काउंटरों का निरीक्षण किया। कहा कि, राष्ट्रीय लोक अदालत में बहुत बड़ी भूमिका न्यायिक अधिकारियों के साथ ही अधिवक्ताओं, जिला प्रशासन के अधिकारियों, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की होती है।
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इसमें किसी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं लगती। बताया कि लोक अदालत की शुरूआत वर्ष 1982 में पहली बार गुजरात राज्य से शुरू हुई और अब लोक अदालत काफी बड़ा स्वरूप ले चुकी है। वकीलों से अपेक्षा किया कि झगड़े को आपसी सुलह-समझौते पर निस्तारित कराएं, ताकि लोगों को मुकदमों में कम से कम उलझना पड़े।
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लोक अदालत में कुल 35554 वाद निस्तारित किए गए। इसमें दो लाख 31 हजार 25 रुपये अर्थदंड लगाया गया और तीन करोड़ 94 लाख, 33 हजार 217 रुपये वसूल किये गए। इस मौके पर जिला न्यायाधीश राम आधार राम, एडीजे, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत यशवंत मिश्रा, एडीजे एफटीसी संतराम, एडीएम उमाकांत त्रिपाठी, सीजेएम सुबोध वार्ष्णेय, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिद्धार्थ कुमार वागव, सिविल जज सीनियर डिविजन विनय कुमार सिंह, एसीजेएम मानवर्धन, एसडीएम सदर विशाल यादव, सीओ धनंजय सिंह कुशवाहा मौजूद रहे।