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गर्भवती का खास ख्याल रखना परिवार की जिम्मेदारी: डॉ यादव
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गर्भावस्था के दौरान सही पोषण गर्भवती और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए आवश्यक है। पोषण का अभाव हुआ तो शिशु कुपोषित हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला के समुचित खानपान व देखभाल का खास ख्याल रखना परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी होती है। इससे जहां गर्भवती को सही पोषण मिलेगा, वहीं गर्भस्थ शिशु स्वस्थ रहेगा।
यह जानकारी परिवार कल्याण के प्रभारी एसीएमओ डॉ. आरजी यादव ने दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती माताएं खुद के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी पोषण देती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां को पोषण की अधिक आवश्यकता होती है। आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आयरन युक्त भोजन करने के साथ ही रोजाना आयरन की गोली खाने की जरूरत होती है।
बच्चे के जन्म के छह माह बाद तक लें आयरन गोली
एसीएमओ ने बताया कि गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में गर्भवती को प्रतिदिन एक आयरन की गोली का सेवन करना चाहिए। इतना ही नहीं बच्चे के जन्म के छह महीने बाद तक आयरन की गोली लेती रहे। जिन्हें एनीमिया नहीं है, उन्हें भी रोजाना लाल आयरन गोली का सेवन करना चाहिए। लाल आयरन की गोलियां न केवल एनीमिया को कम करती हैं, बल्कि भ्रूण के मस्तिष्क के विकास के लिए फायदेमंद भी होती हैं।
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दो बार नाश्ता, तीन बार भोजन है जरूरी
गर्भवती को 24 घंटे में कम से कम पांच बार आहार लेना चाहिए। इसमें तीन बार मुख्य भोजन और दो बार पौष्टिक नाश्ता होना चाहिए। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, विटामिन से युक्त खाद्य पदार्थ, दालें व अनाज दूध आदि का सेवन करना चाहिए। इससे गर्भवती को जहां सही पोषण मिलेगा वही गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ रहेगा।
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यह जानकारी परिवार कल्याण के प्रभारी एसीएमओ डॉ. आरजी यादव ने दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती माताएं खुद के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी पोषण देती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां को पोषण की अधिक आवश्यकता होती है। आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आयरन युक्त भोजन करने के साथ ही रोजाना आयरन की गोली खाने की जरूरत होती है।
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बच्चे के जन्म के छह माह बाद तक लें आयरन गोली
एसीएमओ ने बताया कि गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में गर्भवती को प्रतिदिन एक आयरन की गोली का सेवन करना चाहिए। इतना ही नहीं बच्चे के जन्म के छह महीने बाद तक आयरन की गोली लेती रहे। जिन्हें एनीमिया नहीं है, उन्हें भी रोजाना लाल आयरन गोली का सेवन करना चाहिए। लाल आयरन की गोलियां न केवल एनीमिया को कम करती हैं, बल्कि भ्रूण के मस्तिष्क के विकास के लिए फायदेमंद भी होती हैं।
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दो बार नाश्ता, तीन बार भोजन है जरूरी
गर्भवती को 24 घंटे में कम से कम पांच बार आहार लेना चाहिए। इसमें तीन बार मुख्य भोजन और दो बार पौष्टिक नाश्ता होना चाहिए। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, विटामिन से युक्त खाद्य पदार्थ, दालें व अनाज दूध आदि का सेवन करना चाहिए। इससे गर्भवती को जहां सही पोषण मिलेगा वही गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ रहेगा।