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अधूरे हैं 4770 प्रधानमंत्री आवास
Thu, 03 Jan 2019 11:17 PM IST
मनदीप श्रीवास्तव
sonbhadra news
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Published by: मनदीप श्रीवास्तव
Updated Thu, 03 Jan 2019 11:17 PM IST
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सोनभद्र। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कराया जा रहा है। यह निर्माण काफी धीमी गति से चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले कुल 5175 आवास आवंटित हुए थे। दो किश्तों में आये इन आवासों में से महज 405 आवास ही बन सके हैं। 4770 प्रधानमंत्री आवास अब भी अधूरे हैं। धीमी गति से हो रहे निर्माण के पीछे धन की कमी होना बताया जा रहा है। हालांकि परियोजना निदेशक का कहना है कि अब धनराशि उपलब्ध हो गई है और निर्माण कार्य तेज हो गया है।
जिले में वर्ष 2018-19 में कुल 5175 प्रधानमंत्री ग्रामीण आवासों के निर्माण का लक्ष्य मिला था। इस लक्ष्य की तुलना में पहली बार 3015 आवासों के निर्माण के लिए स्वीकृति मिली और फिर दूसरी बार 2160 आवासों की स्वीकृति आई। इन आवासों के निर्माण के लिए सभी लाभार्थियों को प्रथम किश्त जारी की गई। फिर जरूरत के अनुसार कई अन्य लाभार्थियों को दूसरी और तीसरी किश्त भी दे दी गई लेकिन अब तक ज्यादातर लाभार्थियों के आवास का निर्माण पूर्ण ही नहीं हो सका है। एक लाभार्थी को तीन किश्तों में आवास निर्माण के लिए धनराशि दी जाती है। इसमें से प्रथम किश्त 44 हजार रुपये, दूसरी किश्त 73 हजार रुपये और तीसरी किश्त 10 हजार रुपये की दी जाती है। तमाम लाभार्थियों को जरूरत के अनुसार किश्त दे दी गई लेकिन दिसंबर के अंत तक जिले में महज 405 लाभार्थियों के आवासों का ही निर्माण पूर्ण हो सका है। शेष लाभार्थियों के आवास अभी तक पूर्ण नहीं हो सके हैं। चर्चा है कि लाभार्थी गिट्टी और बालू के दाम अधिक होने की वजह से आवासों के निर्माण को लेकर ज्यादा परेशान हैं।
धीमी गति से आवासों के निर्माण के पीछे मूल वजह धनराशि का उपलब्ध न होना था। बीच में करीब डेढ़ माह तक धनराशि न आने से काम प्रभावित था। अब 14 दिसंबर को धनराशि उपलब्ध हो गई है और उसे सीधे लाभार्थियों के खाते में भेज दिया गया है। आवासों के निर्माण के लक्ष्य की प्रगति अब जल्द ही बढ़ेगी।
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राम शिरोमणि मौर्य
परियोजना निदेशक
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
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जिले में वर्ष 2018-19 में कुल 5175 प्रधानमंत्री ग्रामीण आवासों के निर्माण का लक्ष्य मिला था। इस लक्ष्य की तुलना में पहली बार 3015 आवासों के निर्माण के लिए स्वीकृति मिली और फिर दूसरी बार 2160 आवासों की स्वीकृति आई। इन आवासों के निर्माण के लिए सभी लाभार्थियों को प्रथम किश्त जारी की गई। फिर जरूरत के अनुसार कई अन्य लाभार्थियों को दूसरी और तीसरी किश्त भी दे दी गई लेकिन अब तक ज्यादातर लाभार्थियों के आवास का निर्माण पूर्ण ही नहीं हो सका है। एक लाभार्थी को तीन किश्तों में आवास निर्माण के लिए धनराशि दी जाती है। इसमें से प्रथम किश्त 44 हजार रुपये, दूसरी किश्त 73 हजार रुपये और तीसरी किश्त 10 हजार रुपये की दी जाती है। तमाम लाभार्थियों को जरूरत के अनुसार किश्त दे दी गई लेकिन दिसंबर के अंत तक जिले में महज 405 लाभार्थियों के आवासों का ही निर्माण पूर्ण हो सका है। शेष लाभार्थियों के आवास अभी तक पूर्ण नहीं हो सके हैं। चर्चा है कि लाभार्थी गिट्टी और बालू के दाम अधिक होने की वजह से आवासों के निर्माण को लेकर ज्यादा परेशान हैं।
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धीमी गति से आवासों के निर्माण के पीछे मूल वजह धनराशि का उपलब्ध न होना था। बीच में करीब डेढ़ माह तक धनराशि न आने से काम प्रभावित था। अब 14 दिसंबर को धनराशि उपलब्ध हो गई है और उसे सीधे लाभार्थियों के खाते में भेज दिया गया है। आवासों के निर्माण के लक्ष्य की प्रगति अब जल्द ही बढ़ेगी।
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राम शिरोमणि मौर्य
परियोजना निदेशक
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण