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पुरानी पेंशन व्यवस्था को चुनाव घोषणा पत्र में करें शामिल
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों को पत्र भेजकर ज्वलंत मुद्दों को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की है। इसमें पुरानी पेंशन बहाली, सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण बंद करने, प्रदेश को सस्ती बिजली देने के लिए सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण करने जैसी मांगें हैं।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर राजनीतिक दलों ने इन विषयों को अपने चुनाव घोषणापत्र में शामिल नहीं किया तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी ‘पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं’ का अभियान चलाएंगे। संघर्ष समिति ने एलान किया कि प्रदेश के बिजली कर्मी व उनके परिवार उन राजनीतिक दलों को वोट नहीं देंगे जो पुरानी पेंशन का वादा नहीं करेंगे। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि अगर एक से अधिक राजनीतिक दल पुरानी पेंशन का वायदा करते हैं तो बिजली कर्मी व उनके परिवार ऐसे दलों में से किसी को भी अपनी पसंद से वोट देंगे। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन (उत्पादन निगम) के अध्यक्ष इं. आरजी सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन स्कीम कर्मचारियों के हित में है। 60 वर्ष की उम्र तक सरकारी सेवा करने के बाद भी सेवानिवृत्त होने के पश्चात बिना पुरानी पेंशन व्यवस्था के जीवनयापन करना बेहद कठिन और दुखदायी हो गया है। उन्होंने राजनीतिक दलों की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब कर्मचारियों का पेंशन बंद किया गया तो विधायक, मंत्री और सांसद अपना पेंशन बंद क्यों नहीं करवाए।
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संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर राजनीतिक दलों ने इन विषयों को अपने चुनाव घोषणापत्र में शामिल नहीं किया तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी ‘पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं’ का अभियान चलाएंगे। संघर्ष समिति ने एलान किया कि प्रदेश के बिजली कर्मी व उनके परिवार उन राजनीतिक दलों को वोट नहीं देंगे जो पुरानी पेंशन का वादा नहीं करेंगे। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि अगर एक से अधिक राजनीतिक दल पुरानी पेंशन का वायदा करते हैं तो बिजली कर्मी व उनके परिवार ऐसे दलों में से किसी को भी अपनी पसंद से वोट देंगे। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन (उत्पादन निगम) के अध्यक्ष इं. आरजी सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन स्कीम कर्मचारियों के हित में है। 60 वर्ष की उम्र तक सरकारी सेवा करने के बाद भी सेवानिवृत्त होने के पश्चात बिना पुरानी पेंशन व्यवस्था के जीवनयापन करना बेहद कठिन और दुखदायी हो गया है। उन्होंने राजनीतिक दलों की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब कर्मचारियों का पेंशन बंद किया गया तो विधायक, मंत्री और सांसद अपना पेंशन बंद क्यों नहीं करवाए।
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