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Sonebhadra News: चार साल में परिषदीय विद्यालयों में घटे 51 हजार बच्चे, नए सत्र में संख्या बढ़ाना चुनौती
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अप्रैल से नए शिक्षण सत्र की शुरुआत होगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। यह बात अलग है कि पिछले चार वर्षों से नामांकन में लगातार गिरावट ही आई है। वर्ष 2021-22 के सापेक्ष मौजूदा सत्र में 51 हजार से अधिक बच्चे कम हुए हैं।
यह हाल तब है जब स्कूल चलो अभियान के साथ नामांकन बढ़ाने के लिए विभाग पूरे सत्र में एड़ी-चोटी का जोर लगाए रहा। जिले के 10 ब्लॉाकों में 2071 परिषदीय विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इन विद्यालयों में कक्षा-1 से 8 तक के बच्चों की संख्या चालू सत्र में 220348 रही है।
इस सत्र में तमाम ऐसे स्कूल रहे, जहां नए बच्चों का नामांकन 10 से भी कम रहा है। एक तरफ विभाग विद्यालयों को निपुण बनाने पर जोर दे रहा है। शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। निजी स्कूलों की तरह की विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विकास किया गया है।
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बावजूद पिछले चार वर्षों में 51 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन घटा है। इसके पीछे विभाग नई शिक्षा नीति से नियमों में बदलाव के साथ ही आधार सत्यापन और यू डायस पाेर्टल पर पंजीकरण के कारण डुप्लीकेसी रुकने को कारण मान रहा है।
कोरोना काल में खूब हुआ था पंजीकरण
पिछले चार वर्षों के दौरान विद्यालयों में बच्चों का सबसे ज्यादा नामांकन कोरोना काल में ही रहा है। लॉक डाउन के चलते स्कूल बंद होने और ऑनलाइन पढ़ाई का चलन शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में भेजना शुरू किया था। इसके पीछे निजी स्कूलों की महंगी फीस से बचाव और परिषदीय विद्यालयों के योग्य शिक्षकों के प्रति भरोसा भी रहा है। हालांकि कोरोना खत्म होते ही यह बच्चे वापस निजी स्कूलों में चले गए। विभाग उनका स्थानांतरण रोकने में नाकाम रहा।
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शिक्षण सत्र: विद्यालयों में हुए नामांकन
2024-25: 220348
2023-24: 239668
2022-23: 262312
2021-22: 272247
नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को मिलेगा प्रोत्साहन और सम्मान
नए शिक्षण सत्र में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षकों को प्रोत्साहन और सम्मान की योजना बनाई गई है। इसके तहत जिन 934 विद्यालयों ने निपुण परीक्षा पास कर ली है, उनके शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उन विद्यालयों को रोल मॉडल के रूप में रखते हुए दूसरों को प्रेरित किया जाएग, जिनमें बच्चों की संख्या अच्छी है और वहां निरंतर शिक्षक नवाचार कर रहे हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत नियम बदले हैं। अब कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष उम्र होनी अनिवार्य है। इससे कम उम्र वाले बच्चे बाल वाटिका में भेजे जा रहे हैं। दाेनों को मिला दें तो संख्या कम नहीं हुई है। यह जरूर है कि यू डायस पोर्टल और आधार सत्यापन के चलते दोहरे नामांकन वाले बच्चे कम हुए हैं। नए सत्र में सभी शिक्षकाें के साथ स्कूल चलो अभियान नए सिरे से चलाया जाएगा। इस बार नामांकन में वृद्धि दिखेगी।
-मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए।
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यह हाल तब है जब स्कूल चलो अभियान के साथ नामांकन बढ़ाने के लिए विभाग पूरे सत्र में एड़ी-चोटी का जोर लगाए रहा। जिले के 10 ब्लॉाकों में 2071 परिषदीय विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इन विद्यालयों में कक्षा-1 से 8 तक के बच्चों की संख्या चालू सत्र में 220348 रही है।
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इस सत्र में तमाम ऐसे स्कूल रहे, जहां नए बच्चों का नामांकन 10 से भी कम रहा है। एक तरफ विभाग विद्यालयों को निपुण बनाने पर जोर दे रहा है। शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। निजी स्कूलों की तरह की विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विकास किया गया है।
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बावजूद पिछले चार वर्षों में 51 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन घटा है। इसके पीछे विभाग नई शिक्षा नीति से नियमों में बदलाव के साथ ही आधार सत्यापन और यू डायस पाेर्टल पर पंजीकरण के कारण डुप्लीकेसी रुकने को कारण मान रहा है।
कोरोना काल में खूब हुआ था पंजीकरण
पिछले चार वर्षों के दौरान विद्यालयों में बच्चों का सबसे ज्यादा नामांकन कोरोना काल में ही रहा है। लॉक डाउन के चलते स्कूल बंद होने और ऑनलाइन पढ़ाई का चलन शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में भेजना शुरू किया था। इसके पीछे निजी स्कूलों की महंगी फीस से बचाव और परिषदीय विद्यालयों के योग्य शिक्षकों के प्रति भरोसा भी रहा है। हालांकि कोरोना खत्म होते ही यह बच्चे वापस निजी स्कूलों में चले गए। विभाग उनका स्थानांतरण रोकने में नाकाम रहा।
शिक्षण सत्र: विद्यालयों में हुए नामांकन
2024-25: 220348
2023-24: 239668
2022-23: 262312
2021-22: 272247
नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को मिलेगा प्रोत्साहन और सम्मान
नए शिक्षण सत्र में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षकों को प्रोत्साहन और सम्मान की योजना बनाई गई है। इसके तहत जिन 934 विद्यालयों ने निपुण परीक्षा पास कर ली है, उनके शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही उन विद्यालयों को रोल मॉडल के रूप में रखते हुए दूसरों को प्रेरित किया जाएग, जिनमें बच्चों की संख्या अच्छी है और वहां निरंतर शिक्षक नवाचार कर रहे हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत नियम बदले हैं। अब कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष उम्र होनी अनिवार्य है। इससे कम उम्र वाले बच्चे बाल वाटिका में भेजे जा रहे हैं। दाेनों को मिला दें तो संख्या कम नहीं हुई है। यह जरूर है कि यू डायस पोर्टल और आधार सत्यापन के चलते दोहरे नामांकन वाले बच्चे कम हुए हैं। नए सत्र में सभी शिक्षकाें के साथ स्कूल चलो अभियान नए सिरे से चलाया जाएगा। इस बार नामांकन में वृद्धि दिखेगी।
-मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए।