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प्रतिबंधित खदान पर कैसे हो रहा था खनन, जांच के बाद होगी : डीजीएमएस
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ओबरा में खनन हादसा स्थल का निरीक्षण कर बाहर आते खान सुरक्षा उप महानिदेशक। स्रोत विभाग
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ओबरा। बिल्ली मारकुंडी स्थित श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में हुए हादसे की भारत सरकार के खान सुरक्षा निदेशालय ने भी जांच शुरू कर दी है। शनिवार को खान सुरक्षा के उप महानिदेशक (गाजियाबाद क्षेत्र) नीरज कुमार ने घटनास्थल पर पहुंचकर छानबीन की। उन्होंने कहा कि खदान में अवैध रूप से खनन हो रहा था। जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उप महानिदेशक ने कहा कि खदान के नीचे वाले जो क्षेत्र खतरनाक हो चुके थे, वहां किसी तरह का खनन कार्य नहीं किया जा सकता था। माइंस एक्ट-1952 की धारा-22 (3) के तहत खदान में खनन पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद यहां खनन कराया जा रहा था। किन परिस्थितियों में और किसकी सह पर यहां खनन हो रहा था। इसकी पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
उन्होंने घटना के लिए खदान मालिकों को जिम्मेदार बताया। माइंस मैनेजर और माइंस मेट की गिरफ्तारी के सवाल पर कहा कि उन्हें दोनों के बयान दर्ज करने थे, मगर उनकी गिरफ्तारी की सूचना मिली है। अब न्यायालय के माध्यम से जरूरी प्रक्रिया की जाएगी। उप महानिदेशक ने कहा कि वह जांच के बाद पूरे घटनाक्रम से प्रदेश सरकार को भी अवगत कराएंगे। मानक से अधिक गहरी हो चुकी खदानों में खनन होने पर कहा कि इतनी गहराई तक जाकर खनन के लिए सुरक्षा मानकों, काम करने की पद्धतियों और कानूनी प्रावधानों में बदलाव लाने की जरूरत है। इस दौरान उनके साथ खान सुरक्षा निदेशक वाराणसी राजीव कृष्ण कुमार, उप निदेशक जीवन कुमार आदि मौजूद रहे।
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पाबंदियों के दायरे में हैं कई अन्य खदानें
डीजीएमएस के उप महानिदेशक ने ओबरा-डाला क्षेत्र की अन्य खदानों में भी माइंस एक्ट की धारा-22 (3) के तहत पाबंदी लगे होने की जानकारी दी। कहा कि ऐसी कई अन्य खदानें भी इस क्षेत्र में हैं, जिनमें खनन की बजाय सिर्फ सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश हैं। ऐसी खदानों की सूची तैयार कर प्रशासन को अवगत कराया जाएगा, ताकि उनकी सख्त निगरानी की जा सके।
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उप महानिदेशक ने कहा कि खदान के नीचे वाले जो क्षेत्र खतरनाक हो चुके थे, वहां किसी तरह का खनन कार्य नहीं किया जा सकता था। माइंस एक्ट-1952 की धारा-22 (3) के तहत खदान में खनन पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद यहां खनन कराया जा रहा था। किन परिस्थितियों में और किसकी सह पर यहां खनन हो रहा था। इसकी पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
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उन्होंने घटना के लिए खदान मालिकों को जिम्मेदार बताया। माइंस मैनेजर और माइंस मेट की गिरफ्तारी के सवाल पर कहा कि उन्हें दोनों के बयान दर्ज करने थे, मगर उनकी गिरफ्तारी की सूचना मिली है। अब न्यायालय के माध्यम से जरूरी प्रक्रिया की जाएगी। उप महानिदेशक ने कहा कि वह जांच के बाद पूरे घटनाक्रम से प्रदेश सरकार को भी अवगत कराएंगे। मानक से अधिक गहरी हो चुकी खदानों में खनन होने पर कहा कि इतनी गहराई तक जाकर खनन के लिए सुरक्षा मानकों, काम करने की पद्धतियों और कानूनी प्रावधानों में बदलाव लाने की जरूरत है। इस दौरान उनके साथ खान सुरक्षा निदेशक वाराणसी राजीव कृष्ण कुमार, उप निदेशक जीवन कुमार आदि मौजूद रहे।
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पाबंदियों के दायरे में हैं कई अन्य खदानें
डीजीएमएस के उप महानिदेशक ने ओबरा-डाला क्षेत्र की अन्य खदानों में भी माइंस एक्ट की धारा-22 (3) के तहत पाबंदी लगे होने की जानकारी दी। कहा कि ऐसी कई अन्य खदानें भी इस क्षेत्र में हैं, जिनमें खनन की बजाय सिर्फ सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश हैं। ऐसी खदानों की सूची तैयार कर प्रशासन को अवगत कराया जाएगा, ताकि उनकी सख्त निगरानी की जा सके।