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रिहंद हाइड्रो की इकाइयों के जीटी अपग्रेडेशन का कार्य पूरा
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केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के निर्देश पर रिहंद हाइड्रो की सभी छह इकाइयों के जनरेटिंग ट्रांसफार्मर के अपग्रेडेशन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। सबसे बाद में पहली इकाई में स्थापित जीटी की 10 अप्रैल को टेस्टिंग की जाएगी।
जनरेटिंग टांसफार्मर पावर प्लांट का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। इसके माध्यम से विद्युत गृह से उत्पादित बिजली को 11 केवी से 1.32 लाख में बदलकर ग्रिड से जोड़ा जाता है। रिहंद हाइड्रो के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि स्थापना के समय से ही हाइड्रो की इकाइयों की जीटी को नहीं बदला गया था। इसे देखते हुए विद्युत गृह के सुचारु संचालन को दृष्टिगत रखते हुए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने सभी इकाइयों के जीटी को अपग्रेड करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में वर्ष 2009 से ही क्रमश: इकाइयों की जीटी अपग्रेडेशन का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत पूर्व में स्थापित 60 एमवीए क्षमता की जीटी की जगह 67.5 एमवीए क्षमता की जीटी लगाई जा रही है। सबसे अंत में 50 मेगावाट की पहली इकाई की जीटी को बदला जा रहा है। कार्य अंतिम चरण में है। आगामी 10 अप्रैल को जीटी की टेस्टिंग की जाएगी। इससे पूर्व पांचवीं व दूसरी इकाई की जीटी को बदला जा चुका है। सभी इकाइयों में नई जीटी स्थापित हो जाने से अब लगभग दो दशक तक इकाइयों को सामान्य अनुरक्षण के सहारे संचालित किया जा सकता है।
1 करोड़ में नीलाम हो रही पुरानी जीटी
एक्सईएन ने बताया कि सभी इकाइयों में उच्च क्षमता की नई जीटी लग जाने के बाद 60 एमवीए के पुराने जीटी को नीलाम किया जा रहा है। इसके लिए प्रति जीटी करीब एक करोड़ रुपये की बोली लग रही है। इस तरह से लागत का एक-तिहाई हिस्सा स्क्रैब से प्राप्त हो जा रहा है।
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जनरेटिंग टांसफार्मर पावर प्लांट का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। इसके माध्यम से विद्युत गृह से उत्पादित बिजली को 11 केवी से 1.32 लाख में बदलकर ग्रिड से जोड़ा जाता है। रिहंद हाइड्रो के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि स्थापना के समय से ही हाइड्रो की इकाइयों की जीटी को नहीं बदला गया था। इसे देखते हुए विद्युत गृह के सुचारु संचालन को दृष्टिगत रखते हुए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने सभी इकाइयों के जीटी को अपग्रेड करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में वर्ष 2009 से ही क्रमश: इकाइयों की जीटी अपग्रेडेशन का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत पूर्व में स्थापित 60 एमवीए क्षमता की जीटी की जगह 67.5 एमवीए क्षमता की जीटी लगाई जा रही है। सबसे अंत में 50 मेगावाट की पहली इकाई की जीटी को बदला जा रहा है। कार्य अंतिम चरण में है। आगामी 10 अप्रैल को जीटी की टेस्टिंग की जाएगी। इससे पूर्व पांचवीं व दूसरी इकाई की जीटी को बदला जा चुका है। सभी इकाइयों में नई जीटी स्थापित हो जाने से अब लगभग दो दशक तक इकाइयों को सामान्य अनुरक्षण के सहारे संचालित किया जा सकता है।
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1 करोड़ में नीलाम हो रही पुरानी जीटी
एक्सईएन ने बताया कि सभी इकाइयों में उच्च क्षमता की नई जीटी लग जाने के बाद 60 एमवीए के पुराने जीटी को नीलाम किया जा रहा है। इसके लिए प्रति जीटी करीब एक करोड़ रुपये की बोली लग रही है। इस तरह से लागत का एक-तिहाई हिस्सा स्क्रैब से प्राप्त हो जा रहा है।
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