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Sonebhadra News: पहले जमीन खरीदी, मकान बनवाए, फिर बन गए यूपी के निवासी
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सोनभद्र। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के लोगों के सोनभद्र में जमीन खरीदकर यहां का निवास और एससी जाति प्रमाणपत्र बनवाने का खुलासा भले अब हुआ है लेकिन यह खेल सालों से चल रहा है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बैसवार बिरादरी की है। ऐसे लोग लंबे समय से यूपी में आरक्षण, नौकरी समेत अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। घोरावल क्षेत्र में ही इनकी संख्या करीब दो हजार है। पांच साल पहले यह मामला जोर-शोर से उठा था लेकिन ऊंची पैठ के कारण फाइलों में दब गया।
एमपी में पिछड़ा वर्ग और यूपी में अनूसचित जाति का प्रमाणपत्र हासिल करने के मामले में अनपरा-शक्तिनगर अंचल, चोपन ब्लाक का रेणुकापार और घोरावल का पश्चिमी क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील है। मध्य प्रदेश के सिंगरौली, सीधी जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में बैसवार जाति के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। घोरावल तहसील के परसौना, कन्हारी, तेंदुहार, लाली, बरकन्हरा, शिल्पी, कोरट, गुरेठ, बंधा, चिंगोरी, गड़मा समेत अन्य गांवों को बैसवार बहुल गांव का दर्जा हासिल है।
सोनभद्र, सिंगरौली और सीधी जिले के बैसवार बिरादरी के लोगों में रिश्तेदारी के साथ व्यवसायिक संबंध भी हैं। इसका फायदा उठाकर सोनभद्र में जमीन खरीदकर यूपी के निवासी बन जाते हैं। इसके बाद निवास और जाति प्रमाणपत्र हासिल कर लेते हैं। इसके बाद एससी का आरक्षण और योजनाओं का लाभ उठाते हैं। एमपी के तमाम लोगों ने आधार और वोटर कार्ड तक बनवा लिया है। यह सिलसिला पिछले डेढ़ दशक से चल रहा है।
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आरक्षण लेकर राजस्व और शिक्षा विभाग में कर रहे नौकरी
यूपी का निवास और जाति प्रमाणपत्र बनवाकर राजस्व और शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी हासिल कर ली है। पांच साल पहले यह मामला सुर्खियों में आया था। कई शिक्षकों-राजस्व कर्मियों के जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल भी उठाए गए थे। बाद में राजनेताओं के हस्तक्षेप के कारण मामला दब गया था। सीमा क्षेत्र के लोगों के जाति-निवास प्रमाणपत्र की सही तरीके से जांच नहीं हुई तो यह सिलसिला चलता रहेगा।
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जिस लेखपाल ने बनाया था प्रमाण पत्र, वह सेवानिवृत्त हो गया
पुलिस भर्ती परीक्षा में फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र लगाने वाले चार अभ्यर्थियों की पोल खुलने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की, मगर राजस्व विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसकी वजह प्रमाण पत्र जारी करने वाले लेखपाल का सेवानिवृत्त होना है। घोरावल के तहसीलदार प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि जिस लेखपाल ने प्रमाण पत्र जारी किया था, वह पदोन्नति पाने के बाद सेवानिवृत्त हो चुका है।
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लेखपालों को दिए गए कड़े निर्देश : एसडीएम
एसडीएम आशीष त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस भर्ती की तरह, घोरावल तहसील में दूसरा कोई मामला सामने न आने पाए, इसके लिए लेखपालों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। अगर अब कोई गलत जाति प्रमाण पत्र बनता है तो संबंधित लेखपाल को दोषी मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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एमपी में पिछड़ा वर्ग और यूपी में अनूसचित जाति का प्रमाणपत्र हासिल करने के मामले में अनपरा-शक्तिनगर अंचल, चोपन ब्लाक का रेणुकापार और घोरावल का पश्चिमी क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील है। मध्य प्रदेश के सिंगरौली, सीधी जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में बैसवार जाति के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। घोरावल तहसील के परसौना, कन्हारी, तेंदुहार, लाली, बरकन्हरा, शिल्पी, कोरट, गुरेठ, बंधा, चिंगोरी, गड़मा समेत अन्य गांवों को बैसवार बहुल गांव का दर्जा हासिल है।
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सोनभद्र, सिंगरौली और सीधी जिले के बैसवार बिरादरी के लोगों में रिश्तेदारी के साथ व्यवसायिक संबंध भी हैं। इसका फायदा उठाकर सोनभद्र में जमीन खरीदकर यूपी के निवासी बन जाते हैं। इसके बाद निवास और जाति प्रमाणपत्र हासिल कर लेते हैं। इसके बाद एससी का आरक्षण और योजनाओं का लाभ उठाते हैं। एमपी के तमाम लोगों ने आधार और वोटर कार्ड तक बनवा लिया है। यह सिलसिला पिछले डेढ़ दशक से चल रहा है।
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आरक्षण लेकर राजस्व और शिक्षा विभाग में कर रहे नौकरी
यूपी का निवास और जाति प्रमाणपत्र बनवाकर राजस्व और शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी हासिल कर ली है। पांच साल पहले यह मामला सुर्खियों में आया था। कई शिक्षकों-राजस्व कर्मियों के जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल भी उठाए गए थे। बाद में राजनेताओं के हस्तक्षेप के कारण मामला दब गया था। सीमा क्षेत्र के लोगों के जाति-निवास प्रमाणपत्र की सही तरीके से जांच नहीं हुई तो यह सिलसिला चलता रहेगा।
जिस लेखपाल ने बनाया था प्रमाण पत्र, वह सेवानिवृत्त हो गया
पुलिस भर्ती परीक्षा में फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र लगाने वाले चार अभ्यर्थियों की पोल खुलने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की, मगर राजस्व विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसकी वजह प्रमाण पत्र जारी करने वाले लेखपाल का सेवानिवृत्त होना है। घोरावल के तहसीलदार प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि जिस लेखपाल ने प्रमाण पत्र जारी किया था, वह पदोन्नति पाने के बाद सेवानिवृत्त हो चुका है।
लेखपालों को दिए गए कड़े निर्देश : एसडीएम
एसडीएम आशीष त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस भर्ती की तरह, घोरावल तहसील में दूसरा कोई मामला सामने न आने पाए, इसके लिए लेखपालों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। अगर अब कोई गलत जाति प्रमाण पत्र बनता है तो संबंधित लेखपाल को दोषी मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।