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Sonebhadra News: डॉक्टर सहित पांच पर गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी
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सोनभद्र। नौ माह पूर्व कोन स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत कर्मी की संदिग्ध हाल में मौत के मामले में नौ महीने के बाद गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। न्यायालय के आदेश पर कोन पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉक्टर सहित पांच को नामजद किया है।
गढ़वा (झारखंड) जिले के बेलावर-केतार गांव निवासी याद अली ने डाॅ. नसीम मोहम्मद, नेहा कुमारी निवासी खरौंधी, सैफ अली निवासी बागेसोती, थाना कोन, रानी निवासी सिरसी थाना-खरौंधी के खिलाफ न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। कहा था कि उसका पुत्र आजाद अंसारी छह माह से कोन स्थित ग्लोबल हास्पिटल सर्जिकल सेंटर में कंपाउंडर के रूप में कार्यरत था।
यह अस्पताल डॉ. नसीम मोहम्मद की देख-रेख में संचालित है। 31 जनवरी 2025 को दोपहर बाद आजाद के मामा मैनुद्दीन अंसारी को हास्पिटल के किसी कर्मी ने फोन किया कि उनके भांजे की तबीयत काफी खराब है। तब वहां पहुंचे तो पहले से एक चार पहिया वाहन आजाद को लेकर खड़ा था। कहा गया कि स्थिति काफी गंभीर है तत्काल झारखंड के भवनाथपुर सीएचसी जाना होगा। उसे देखने भी नहीं दिया गया।
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भवनाथपुर पहुंचने पर पता चला कि आजाद की मौत हो चुकी है। सैफ उसके शव को उतारकर वहां से भाग निकला। वह लोग ग्लोबल हास्पिटल पहुंचे तो वहां भी ताला बंद था। दुद्धी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। आरोप है कि जब वह लोग शव को दफनाने ले जाने लगे तभी उनकी नजर शरीर के कई अंगों से निकलते खून पर पड़ी, जबकि पोस्टमार्टम के बाद यह कहा गया था कि कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया है। उसके बेटे ने आत्महत्या की है।
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आठ महीने बाद भी नहीं आई रिपोर्ट
पीड़ित का आरोप है कि उसने पुलिस से कई बार गुहार लगाई। आईजीआरएस के जरिए भी शिकायत की लेकिन हर बार यह कहते हुए प्राथमिकी से इंकार कर दिया गया कि बिसरा प्रिजर्व कर परीक्षण के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्राधिकारी के यहां लगाई गई गुहार में पता चला कि 20 मार्च 2025 को विसरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला वाराणसी भेजा गया था। अब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। प्रकरण में प्रभारी निरीक्षक कोन को जरूरी निर्देश दिए जाने की बात कही गई।
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पीड़ित परिवार का आरोप, हत्या को छिपाने की हो रही कोशिश
पीड़ित की तरफ से दिए गए प्रार्थना पत्र में दावा किया गया कि उपरोक्त सभी आरोपी हत्या को छिपाने की कोशिश में लगे हुए हैं। विसरा प्रिजर्व की आड़ लेकर पुलिस भी कोई मदद नहीं कर रही है। न्यायालय ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए कोन थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। प्रभारी निरीक्षक संजीव कुमार सिंह के मुताबिक एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है।
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गढ़वा (झारखंड) जिले के बेलावर-केतार गांव निवासी याद अली ने डाॅ. नसीम मोहम्मद, नेहा कुमारी निवासी खरौंधी, सैफ अली निवासी बागेसोती, थाना कोन, रानी निवासी सिरसी थाना-खरौंधी के खिलाफ न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। कहा था कि उसका पुत्र आजाद अंसारी छह माह से कोन स्थित ग्लोबल हास्पिटल सर्जिकल सेंटर में कंपाउंडर के रूप में कार्यरत था।
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यह अस्पताल डॉ. नसीम मोहम्मद की देख-रेख में संचालित है। 31 जनवरी 2025 को दोपहर बाद आजाद के मामा मैनुद्दीन अंसारी को हास्पिटल के किसी कर्मी ने फोन किया कि उनके भांजे की तबीयत काफी खराब है। तब वहां पहुंचे तो पहले से एक चार पहिया वाहन आजाद को लेकर खड़ा था। कहा गया कि स्थिति काफी गंभीर है तत्काल झारखंड के भवनाथपुर सीएचसी जाना होगा। उसे देखने भी नहीं दिया गया।
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भवनाथपुर पहुंचने पर पता चला कि आजाद की मौत हो चुकी है। सैफ उसके शव को उतारकर वहां से भाग निकला। वह लोग ग्लोबल हास्पिटल पहुंचे तो वहां भी ताला बंद था। दुद्धी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। आरोप है कि जब वह लोग शव को दफनाने ले जाने लगे तभी उनकी नजर शरीर के कई अंगों से निकलते खून पर पड़ी, जबकि पोस्टमार्टम के बाद यह कहा गया था कि कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया है। उसके बेटे ने आत्महत्या की है।
आठ महीने बाद भी नहीं आई रिपोर्ट
पीड़ित का आरोप है कि उसने पुलिस से कई बार गुहार लगाई। आईजीआरएस के जरिए भी शिकायत की लेकिन हर बार यह कहते हुए प्राथमिकी से इंकार कर दिया गया कि बिसरा प्रिजर्व कर परीक्षण के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्राधिकारी के यहां लगाई गई गुहार में पता चला कि 20 मार्च 2025 को विसरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला वाराणसी भेजा गया था। अब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। प्रकरण में प्रभारी निरीक्षक कोन को जरूरी निर्देश दिए जाने की बात कही गई।
पीड़ित परिवार का आरोप, हत्या को छिपाने की हो रही कोशिश
पीड़ित की तरफ से दिए गए प्रार्थना पत्र में दावा किया गया कि उपरोक्त सभी आरोपी हत्या को छिपाने की कोशिश में लगे हुए हैं। विसरा प्रिजर्व की आड़ लेकर पुलिस भी कोई मदद नहीं कर रही है। न्यायालय ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए कोन थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। प्रभारी निरीक्षक संजीव कुमार सिंह के मुताबिक एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है।