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Sonebhadra News: मुकदमे की फाइल से गायब कर दिए दस्तावेज, कार्रवाई का आदेश
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सोनभद्र। सदर तहसील में फाटबंदी के मुकदमे से जुड़ी एक फाइल से महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने का मामला सामने आया है। यह मामला पिछले पांच साल से जांच में उलझा था। पीड़ित पक्ष की अपील पर अब हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को दो माह के भीतर जांच पूरी कर दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
मालवीय परिवार से जुड़ा एक फाटबंदी का मुकदमा करीब पांच-छह साल पहले एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन था। उस दौरान एसडीएम की ओर से कुछ आदेश पारित किए गए थे।
एक पक्ष ने उन आदेशों और आर्डर शीट की नकल भी प्राप्त कर ली थी, लेकिन कुछ समय बाद फाइल से वे अहम दस्तावेज गायब हो गए। पीड़ित ने इस संबंध में पहले डीएम और फिर मंडलायुक्त से शिकायत की। मंडलायुक्त के निर्देश पर एडीएम (न्यायिक) से जांच भी कराई गई, लेकिन मामला किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। बार-बार जांच होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अंततः ओमप्रकाश मालवीय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने 27 अक्तूबर को सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि अब आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है और दोषी अधिकारियों को आरोप पत्र भी जारी किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने डीएम को आदेश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के भीतर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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मालवीय परिवार से जुड़ा एक फाटबंदी का मुकदमा करीब पांच-छह साल पहले एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन था। उस दौरान एसडीएम की ओर से कुछ आदेश पारित किए गए थे।
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एक पक्ष ने उन आदेशों और आर्डर शीट की नकल भी प्राप्त कर ली थी, लेकिन कुछ समय बाद फाइल से वे अहम दस्तावेज गायब हो गए। पीड़ित ने इस संबंध में पहले डीएम और फिर मंडलायुक्त से शिकायत की। मंडलायुक्त के निर्देश पर एडीएम (न्यायिक) से जांच भी कराई गई, लेकिन मामला किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। बार-बार जांच होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अंततः ओमप्रकाश मालवीय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने 27 अक्तूबर को सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि अब आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है और दोषी अधिकारियों को आरोप पत्र भी जारी किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने डीएम को आदेश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के भीतर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।