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Sonebhadra News: पित्त की थैली में पथरी को हल्के में न लें, झोलाछाप के इलाज से बचें

Mon, 05 May 2025 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 May 2025 12:06 AM IST
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Do not take gall bladder stones lightly, avoid quack treatment
अगर आपके पित्त की थैली (गाल ब्लैडर) में पथरी है तो इसे नजरअंदाज न करें। यह कैंसर कारण भी बन सकता है। विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन करें। जिले में कुछ वर्षों में लोगों की लापरवाही से गाल ब्लैंडर में कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। ज्यादातर मामलों में पथरी की पहचान के बावजूद लोगों ने विशेषज्ञों के बजाय झोलाछाप से उपचार कराया। घरेलू उपचार किया। हर माह दस से 12 ऐसे कैंसर अस्पताल आ रहे हैं। मेडिकल काॅलेज के जनरल सर्जरी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत शुक्ला ने कहा कि देसी नुस्खों से पित्त की थैली की पथरी का हल मुश्किल हैं। इससे पथरी फंस सकती है। तेज दर्द या पेंक्रियाटाइटिस हो सकता है। लोगों में गलत धारणा है कि गॉलब्लैडर निकलवाने से खाना नहीं पचता है। अगर पथरी कोई लक्षण नहीं दे रही है (जैसे दर्द या उल्टी), तो डॉक्टर अक्सर ऑपरेशन की जरूरत नहीं बताते। सिर्फ लक्षण होने पर या पथरी बड़ी होने पर ही सर्जरी सलाह दी जाती है। उन्होंंने पथरी के अपने आप घुल जाने को मिथक बताया। कहा कि अधिकांश मामलों देखा गया है कि पथरी अपने आप नहीं घुलती हैं। कुछ छोटी पथरी को गलाने के लिए दवाइयां दी जाती है। बताया कि
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अति पिछड़े जिले में शुद्ध पेयजल और खानपान को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। ऐसे में लोगों के शरीर में विषाक्त पदार्थ और अपशिष्टों का जमा होना कई तरह की समस्याओं का कारण बन रहा है। इससे शरीर के दो हिस्सों-किडनी या पित्त की थैली में पथरी हो जा रही है। जिले के लोगों में पित्त की थैली में पथरी के उपचार को लेकर कई भ्रांतियां हैं। बताया कि मेडिकल काॅलेज के जनरल सर्जरी विभाग में रोजाना पित्त की थैली में पथरी के पांच से आठ मामले आते हैं। इनमें हर माह आठ से 10 ऐसे मरीज आ रहे हैं। जो लंबे समय से पित्त की थैली में पथरी से पीड़ित हैं। नियमित उपचार के बजाय लंबे समय तक घरेलू या फिर वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली अपनाने वाले कई मरीज कैंसर के मुहाने पर पहुंच गए हैं। कई ऐसे भी हैं जो थैली फटने की समस्या होने पर अस्पताल आते हैं। ऐसे में औसतन दस से 12 मरीजों को बीएचयू के कैंसर विभाग में रेफर किया जाता है।
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ये हैं वजह

खान-पान की गलत आदत गॉलब्लैडर स्टोन की बड़ी वजह हैं। पाचन तरल पदार्थों के अपशिष्टों के जमा होना पित्ताशय की थैली में पथरी बना रहा है। गॉलब्लेडर स्टोन की स्थिति में पेट में तेज दर्द की समस्या होती है, इससे बचाव के लिए जीवनशैली और आहार का ठीक रखना बहुत आवश्यक है।
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केस: एक
चोपन क्षेत्र निवासी 45 वर्षीय महिला को करीब एक साल पहले पित्त की थैली में पथरी थी। जो विशेषज्ञ के बजाय वैकल्पिक चिकित्सा अपना रही थी। एक पुरूष को थैली फटने की समस्या थी।


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केस: 2
राबर्ट्सगंज क्षेत्र निवासी 49 वर्षीय व्यक्ति को पूर्व में गॉलब्लेडर स्टोन की पुष्टि हुुई थी। वह उचित इलाज के बजाय लोकल स्तर पर दवा ले रहे थे। जब वह अस्पताल आए तो बीमारी की प्रगति काफी बढ़ गई थी। जिसके कारण हायर सेंटर भेजना पड़ा।
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