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इधर उठी बेटी की डोली, उधर पिता की अर्थी उठी

Sun, 25 Apr 2021 12:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 25 Apr 2021 12:01 AM IST
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Daughter's daughter arose here, father's meaning arose there
चुर्क (सोनभद्र)। बड़े अरमानों से बेटी की डोली उठाने की तमन्ना जिस पिता ने की थी, वह डोली नहीं उठा सका। एनवक्त पर जब पिता द्वारा डोली उठाने की बारी आई उससे पहले ही उसकी अर्थी उठ गई। एक तरफ पिता की अर्थी तो दूसरी तरफ बेटी की डोली उठते देख लोग अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए। परिवार के लोगों पर तो मानो दुखों का पहाड़ा सा टूट पड़ा हो।
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यह दर्द विदारक दृश्य था शनिवार की सुबह जिला मुख्यालय से करीब छह किमी दूर चुर्क के मुसही चरका टोला में। यहां एक तरफ बेटी की डोली उठ रही थी तो दूसरी तरफ परिवार के लोग पिता की अर्थी उठाने के लिए कोविड अस्पताल पहुंचे थे। दरअसल, चरका टोला निवासी 65 वर्षीय रामप्रवेश यादव अपनी बेटी की शादी मिर्जापुर में तय किए थे। तीन-चार दिन पहले तिलकोत्सव में वहां गए थे। वापस आए तभी से तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। शादी की तिथि 23 अप्रैल यानी शुक्रवार को थी। रात में जब बरात आई तो रामप्रवेश की हालत ज्यादा खराब हो गई।
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जयमाला की रस्म होते-होते हालत इतनी खराब हुई कि उनकी सांसे कोविड अस्पताल में थम गईं। मरने से पहले तक वह बेटी के कन्यादान की बात कहते रहे, लेकिन न कन्यादान कर सके और नही बेटी की विदाई कर सके। माहौल को थोड़ा संभालने के लिए परिवार के जिन लोगों को रामप्रवेश के निधन की जानकारी हुई वह अपने अंदर ही इस दुु:ख को दबाए रखे। सुबह जब बेटी की विदाई हो गई तब रामप्रवेश की पत्नी को घटना की जानकारी दी गई। करीब दस बजे दिन में कोविड अस्पताल से रामप्रवेश का शव मिला।
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एक तरफ बड़ी बहन की विदाई तो दूसरी तरफ पिता की अर्थी उठाने की चिंता जिस बेटे को हो भला वह कितना सामान्य रह सकता है इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। मुसही के चरका टोला निवासी रामप्रवेश के बड़े बेटे का निधन दो साल पहले ही सड़क हादसे में हो चुका है। बड़ी बेटी भी असमय दूनिया को छोड़ चुकी है। छोटा बेटा आनंद बड़ी बहन की शादी में बड़े ही उत्साह के साथ लगा था। इसकी तमन्ना थी कि पिता के हाथों कन्यादान कराकर सुबह बहन को डोली में बैठाएगा, लेकिन बहन को जिस उत्साह से विदा करना था वह धरा की धरा रह गया। रात में ही पिता के मौत की जानकारी मिलने के बाद ही इस बड़े दु:ख को अपने ही मन में रखे रहा। जैसे ही बहन विदा हुई आनंद फफक पड़ा।
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