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नक्सल क्षेत्र में शुरू हुई हथियारबंद लोगों की चहलकदमी
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Mon, 19 Dec 2016 09:45 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : getty images
नक्सल क्षेत्र की पहाड़ियों पर हथियार बंद लोगों की चहलकदमी एक बार फिर दिखने से लोग दहशत में हैं। जंगलों में लगातार सात से आठ की संख्या में हथियार बंद लोग घूमते हुए दिख रहे हैं।
कभी खूंखार नक्सलियों का गढ़ रही कैमूर की पहाड़ियों और उसके ईर्द-गिर्द के जंगलों में एक बार फिर हथियारबंद लोगों की चहलकदमी शुरू हो गई है। कभी दोपहर में तो कभी रात में ऐसे लोग जंगलों और पहाड़ों पर देखे जा रहे हैं।
वजह कि ग्रामीण यह समझ नहीं पा रहे कि भरूई बंदूक लेकर घूमने वाले नक्सली हैं या शिकारी। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिले की सीमा से सटे बिहार के जंगलों में नक्सलियों की चहलकदमी की चर्चा अक्सर सुनने को मिलती है लेकिन जिले के जंगलों में कई साल से चहलकदमी बंद थी। इधर करीब एक माह से फिर हथियारबंद लोग यदा-कदा नजर आ रहे हैं।
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हालांकि क्षेत्र के लोगों का यह भी कहना है कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए लोग बंदूक लेकर चल रहे हैं। लेकिन कोई भी यह बोलने को तैयार नहीं कि ऐसे लोग कौन और कहां के हैं।
उधर डीएफओ सोनभद्र वन प्रभाग एसवीपी सिंह कहते हैं कि उन्हें अब तक जानवरों का शिकार किये जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
फिर उधर पुलिस भी हर तरफ तैनात है, ऐसे में बंदूकों से शिकार का सवाल नहीं उठता। सीओ सदर के. राम का कहना है कि सोनभद्र के पहाड़ी इलाकों में नक्सलियों की कोई गतिविधियां नहीं हैं। हो सकता है कि लोग जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कांबिंग भी चल ही रही है।
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कभी खूंखार नक्सलियों का गढ़ रही कैमूर की पहाड़ियों और उसके ईर्द-गिर्द के जंगलों में एक बार फिर हथियारबंद लोगों की चहलकदमी शुरू हो गई है। कभी दोपहर में तो कभी रात में ऐसे लोग जंगलों और पहाड़ों पर देखे जा रहे हैं।
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वजह कि ग्रामीण यह समझ नहीं पा रहे कि भरूई बंदूक लेकर घूमने वाले नक्सली हैं या शिकारी। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिले की सीमा से सटे बिहार के जंगलों में नक्सलियों की चहलकदमी की चर्चा अक्सर सुनने को मिलती है लेकिन जिले के जंगलों में कई साल से चहलकदमी बंद थी। इधर करीब एक माह से फिर हथियारबंद लोग यदा-कदा नजर आ रहे हैं।
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हालांकि क्षेत्र के लोगों का यह भी कहना है कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए लोग बंदूक लेकर चल रहे हैं। लेकिन कोई भी यह बोलने को तैयार नहीं कि ऐसे लोग कौन और कहां के हैं।
उधर डीएफओ सोनभद्र वन प्रभाग एसवीपी सिंह कहते हैं कि उन्हें अब तक जानवरों का शिकार किये जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
फिर उधर पुलिस भी हर तरफ तैनात है, ऐसे में बंदूकों से शिकार का सवाल नहीं उठता। सीओ सदर के. राम का कहना है कि सोनभद्र के पहाड़ी इलाकों में नक्सलियों की कोई गतिविधियां नहीं हैं। हो सकता है कि लोग जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कांबिंग भी चल ही रही है।