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मजदूरों का एक करोड़ 82 लाख बकाया
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभ्ाद्र
Updated Mon, 20 Jun 2016 10:23 PM IST
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दो वक्त की रोटी के लिए कमरतोड़ मेहनत करने वाला मजदूर परेशान है। जिले में मनरेगा के तहत ही मजदूूरों का करीब एक करोड़ 82 लाख 43 हजार रुपये बकाया है। मजदूर संबंधित विभागों के अधिकारियों और काम कराने वाले ठेकेदारों से मजदूरी मांग रहे हैं लेकिन बजट न मिलने के नाते उन्हें मजदूरी नहीं मिल पा रही।
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी एक्ट लागू करने का मकसद था कि लोगों को गांव में ही रोजगार दिया जा सके, ताकि उन्हेें बाहर न जाना पड़े। सरकार ने इस मद में अच्छी खासी धनराशि भी दी। इससे जहां गांवों में जमकर विकास कार्य हुए वहीं मजदूरों को भी राहत मिली।
हालांकि मनरेगा में भ्रष्टाचार भी हुआ, जिससे जिले में इसकी सीबीआई जांच भी शुरू हो गई, जो चल रही है। इसके बावजूद काम होता रहा, लेकिन भुगतान की स्थिति काफी धीमी हो गई। उसका नतीजा यह है कि हजारों मजदूरों का करीब एक करोड़ 82 लाख 43 हजार रुपये मजदूरी बकाया है।
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ग्राम प्रधान सेमर राजाराम, अमोखर कृष्णानंद, हिंदुआरी राजेश सोनी और बरवन के प्रधानपति रामआसरे ने बताया कि उनके यहां भी मनरेगा की लाखों रुपये मजदूरी बकाया है। कई बार इसको लेकर मनरेगा सेल में वार्ता भी की गई लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया। मजदूर मजदूरी मांग रहे हैं।
इसी तरह जुगैल, पनारी, कोटा समेत अन्य ग्राम पंचायतों में भी बड़े पैमाने पर मनरेगा की मजदूरी बकाया है, जिससे मजदूर परेशान हैं। मनरेगा सेल से मिली जानकारी पर गौर करें तो मजदूरी का एक करोड़ 82 लाख 43 हजार और मैटेरियल का सात लाख 96 हजार रुपये बकाया है।
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महात्मा गांधी रोजगार गारंटी एक्ट लागू करने का मकसद था कि लोगों को गांव में ही रोजगार दिया जा सके, ताकि उन्हेें बाहर न जाना पड़े। सरकार ने इस मद में अच्छी खासी धनराशि भी दी। इससे जहां गांवों में जमकर विकास कार्य हुए वहीं मजदूरों को भी राहत मिली।
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हालांकि मनरेगा में भ्रष्टाचार भी हुआ, जिससे जिले में इसकी सीबीआई जांच भी शुरू हो गई, जो चल रही है। इसके बावजूद काम होता रहा, लेकिन भुगतान की स्थिति काफी धीमी हो गई। उसका नतीजा यह है कि हजारों मजदूरों का करीब एक करोड़ 82 लाख 43 हजार रुपये मजदूरी बकाया है।
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ग्राम प्रधान सेमर राजाराम, अमोखर कृष्णानंद, हिंदुआरी राजेश सोनी और बरवन के प्रधानपति रामआसरे ने बताया कि उनके यहां भी मनरेगा की लाखों रुपये मजदूरी बकाया है। कई बार इसको लेकर मनरेगा सेल में वार्ता भी की गई लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया। मजदूर मजदूरी मांग रहे हैं।
इसी तरह जुगैल, पनारी, कोटा समेत अन्य ग्राम पंचायतों में भी बड़े पैमाने पर मनरेगा की मजदूरी बकाया है, जिससे मजदूर परेशान हैं। मनरेगा सेल से मिली जानकारी पर गौर करें तो मजदूरी का एक करोड़ 82 लाख 43 हजार और मैटेरियल का सात लाख 96 हजार रुपये बकाया है।