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175 करोड़ के हवाला रैकेट का पर्दाफाश: लुधियाना के दो सीए पर केस, शेल कंपनियों का जाल बिछा किया फर्जीवाड़ा
Tue, 25 Aug 2026 08:20 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Published by: Nivedita
Updated Tue, 25 Aug 2026 08:20 AM IST
सार
आयकर विभाग की टीम ने 18 अगस्त 2026 को सीए फर्म ‘ऋषभ गुप्ता एंड एसोसिएट्स’ पर दबिश दी थी। यहां छह महीने से केबिन बंद मिले।
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- फोटो : ANI
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विस्तार
हवाला और फर्जी दस्तावेज के जरिये 175.53 करोड़ रुपये विदेश भेजने के मामले में आयकर विभाग की जांच के बाद सराभा नगर थाना पुलिस ने दो चार्टर्ड अकाउंटेंट ऋषभ गुप्ता और लवप्रीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है।
आरोप है कि दोनों ने वित्तीय और बैंक रिकॉर्ड की जांच किए बिना फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर शेल कंपनियों के जरिये रकम विदेश भेजी गई।
आयकर विभाग की टीम ने 18 अगस्त 2026 को सीए फर्म ‘ऋषभ गुप्ता एंड एसोसिएट्स’ पर दबिश दी थी। यहां छह महीने से केबिन बंद मिले। कंपनी निदेशक गौरव जैन ने कथित तौर पर बताया कि कमीशन के लालच में कागजी कंपनियों के जरिये विदेश रकम भेजी जा रही थी।
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कंप्यूटर-सॉफ्टवेयर सेवा के नाम पर भेजी रकम
जांच में सामने आया कि भारतीय कंपनियों से शेल कंपनियों के खातों में रकम डाली गई। इसके बाद कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर सेवा के भुगतान के नाम पर विदेशी खातों में पैसा भेजा गया। कर्मण्यु इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां केवल कागजों में मौजूद थीं।
डिजिटल हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल
आरोप है कि सीए ऋषभ गुप्ता के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल लवप्रीत सिंह ने बिना सत्यापन के किया। दोनों ने कथित तौर पर जाली फॉर्म तैयार कर बैंकों में जमा कराए। आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने वर्ष 2023 से 2026 के बीच 175.53 करोड़ रुपये के लेन-देन को लेकर कार्रवाई की है।
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आरोप है कि दोनों ने वित्तीय और बैंक रिकॉर्ड की जांच किए बिना फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर शेल कंपनियों के जरिये रकम विदेश भेजी गई।
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आयकर विभाग की टीम ने 18 अगस्त 2026 को सीए फर्म ‘ऋषभ गुप्ता एंड एसोसिएट्स’ पर दबिश दी थी। यहां छह महीने से केबिन बंद मिले। कंपनी निदेशक गौरव जैन ने कथित तौर पर बताया कि कमीशन के लालच में कागजी कंपनियों के जरिये विदेश रकम भेजी जा रही थी।
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कंप्यूटर-सॉफ्टवेयर सेवा के नाम पर भेजी रकम
जांच में सामने आया कि भारतीय कंपनियों से शेल कंपनियों के खातों में रकम डाली गई। इसके बाद कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर सेवा के भुगतान के नाम पर विदेशी खातों में पैसा भेजा गया। कर्मण्यु इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां केवल कागजों में मौजूद थीं।
डिजिटल हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल
आरोप है कि सीए ऋषभ गुप्ता के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल लवप्रीत सिंह ने बिना सत्यापन के किया। दोनों ने कथित तौर पर जाली फॉर्म तैयार कर बैंकों में जमा कराए। आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने वर्ष 2023 से 2026 के बीच 175.53 करोड़ रुपये के लेन-देन को लेकर कार्रवाई की है।