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35 करोड़ की लागत से बने पुलों का तलब किया ब्यौरा
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सोनभद्र। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता आरपी तिवारी ने बुधवार को सोनभद्र और मिर्जापुर का दौरा कर कराए जा रहे कार्यों की स्थिति जांची। जिले में नगवां बांध पर चल रहे पक्कीकरण कार्य का जायजा लिया और मातहतों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। वहीं 2013-14 में घाघर मुख्य नहर पर करीब 35 करोड़ की लागत से बताए गए 14 पुलों की उपयोगिता और गुणवत्ता के बारे में भी एक्सईएन से जानकारी तलब की।
नगवां बांध पहुंचे मुख्य अभियंता पीके तिवारी ने बांध में सिल्ट जमाव और गड्ढा बंदी के कार्य के बारे में जानकारी ली। बांध के पक्कीकरण के चल रहे कार्य का भी बारीकी से निरीक्षण किया। कहा कि अभी 25 प्रतिशत काम हुआ है। इसलिए गुणवत्ता को लेकर पूर्णतया सजग रहने की जरूरत है। संबंधितों को चेतावनी भी दी कि अगर कार्य में किसी तरह की लापरवाही या मानकों के अनदेखी की शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। दौरे के दौरान उन्हें घाघर मुख्य नहर पर तीन-चार साल पूर्व निर्मित हुए पुलों के बारे में भी जानकारी मिली। बताया गया कि अप्रोच मार्ग से हटकर या पुलों के सिरे के बार उसे मार्ग से जोड़ने के लिए कोई कार्य नहीं कराया गया है। इससे अब तक उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उपयोगिता पर भी सवाल उठाए गए। लोगों का कहना था कि राबटर्सगंज-रामगढ़ मुख्य मार्ग पर मरकरी में महज एक करोड़ की लागत से बेहतर पुल का निर्माण हो सकता है तो फिर लिंक मार्गों को जोड़ने के नाम पर बनाए गए एक-एक पुलों की लागत ढाई करोड़ कैसे पहुंच गई? उधर, मुख्य अभियंता पीके तिवारी ने बताया कि इस बाबत एक्सईएन से पूरी जानकारी तलब की गई है। पुलों के निर्माण के समय उसकी उपयोगिता का कितना ख्याल रखा गया? इसके बारे में भी जवाब मांगा गया है।
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नगवां बांध पहुंचे मुख्य अभियंता पीके तिवारी ने बांध में सिल्ट जमाव और गड्ढा बंदी के कार्य के बारे में जानकारी ली। बांध के पक्कीकरण के चल रहे कार्य का भी बारीकी से निरीक्षण किया। कहा कि अभी 25 प्रतिशत काम हुआ है। इसलिए गुणवत्ता को लेकर पूर्णतया सजग रहने की जरूरत है। संबंधितों को चेतावनी भी दी कि अगर कार्य में किसी तरह की लापरवाही या मानकों के अनदेखी की शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। दौरे के दौरान उन्हें घाघर मुख्य नहर पर तीन-चार साल पूर्व निर्मित हुए पुलों के बारे में भी जानकारी मिली। बताया गया कि अप्रोच मार्ग से हटकर या पुलों के सिरे के बार उसे मार्ग से जोड़ने के लिए कोई कार्य नहीं कराया गया है। इससे अब तक उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उपयोगिता पर भी सवाल उठाए गए। लोगों का कहना था कि राबटर्सगंज-रामगढ़ मुख्य मार्ग पर मरकरी में महज एक करोड़ की लागत से बेहतर पुल का निर्माण हो सकता है तो फिर लिंक मार्गों को जोड़ने के नाम पर बनाए गए एक-एक पुलों की लागत ढाई करोड़ कैसे पहुंच गई? उधर, मुख्य अभियंता पीके तिवारी ने बताया कि इस बाबत एक्सईएन से पूरी जानकारी तलब की गई है। पुलों के निर्माण के समय उसकी उपयोगिता का कितना ख्याल रखा गया? इसके बारे में भी जवाब मांगा गया है।
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