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समाज कल्याण विभाग ने वापस लिए 16 लाख

Sat, 09 Jul 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र Updated Sat, 09 Jul 2016 11:56 PM IST
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16 million for the Department of Social Welfare back
देव समाज कॉलेज में कार्यक्रम - फोटो : amar ujala
संस्कृत महाविद्यालय को छात्रों के शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए मिली धनराशि के घपले का मामला सही पाया गया है। समाज  कल्याण विभाग ने महाविद्यालय से शुल्क प्रतिपूर्ति के 12.30 लाख रुपये मय ब्याज वसूल किए हैं। कुल 16 लाख रुपये समाज कल्याण विभाग ने वापस लिए हैं। अमर उजाला ने छह जून के अंक में इस गोलमाल का खुलासा किया था। इससे पहले भी घपले से संबंधित खबर प्रकाशित हुई थी।
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घपले का मामला उजागर होने के बाद 31 मई को जिलाधिकारी सीबी सिंह ने मामले की जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी और प्राचार्य को दोषी माना। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की संस्तुति की और समाज कल्याण अधिकारी से धनराशि की ब्याज सहित वसूली करके सरकारी खाते में जमा कारने का निर्देश दिया था। घपला वर्ष 2007 से 08 के बीच किया गया है। अपने फैसले में जिलाधिकारी ने कहा है कि वर्ष 2008 में ही तत्कालीन उप निदेशक समाज कल्याण विंध्याचल मंडल योगेश राय ने मामले की जांच की थी। उसी समय गोलमाल का मामला सामने आ गया था।
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वर्ष 2007-08 में छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में वितरित करने के लिए जिले को 76.70 लाख रुपये आवंटित हुए थे, जिसमें से सबसे ज्यादा 12.30 लाख रुपये की धनराशि राबर्ट्सगंज संस्कृत महाविद्यालय को जारी की गई।
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 यह रकम नियमों की अनदेखी करते हुए इलाहाबाद बैंक राबर्ट्सगंज में संचालित एकल खाते में भेजी गई। नियमानुसार धनराशि प्राचार्य को विद्यार्थियों के खाते में भेजनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने 3.75 लाख नकद निकाल लिया और दो-दो लाख रुपये के चेक अन्य लोगों के नाम काट दिया।
जांच में मामले का खुलासा हुआ तो प्राचार्य ने निकाली गई 7.75 लाख की धनराशि जमा कर दी। इसके बाद तत्कालीन डीएम के निर्देश पर खाता सीज कर दिया गया लेकिन धनराशि की वसूली नहीं की गई थी।



इस बीच प्राचार्य  ने डीएम के यहां हाईकोर्ट की  तरफ से प्रकरण के निस्तारण के आदेश का हवाला देते हुए, सीज खाते को खुलवाने और धनराशि निकालने की अनुमति मांगी थी। मगर डीएम ने जांच कराई तो पता चला कि धनराशि गलत तरीके से निकाली गई थी। ऐसे में उन्होंने ब्याज सहित रकम वसूल करने का निर्देश दिया। 
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