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तमाशबीन बना रहा प्रशासन

Tue, 14 Apr 2015 11:24 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र Updated Tue, 14 Apr 2015 11:24 PM IST
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Creating spectator administration
निर्माण कार्य की शुरूआत से ही कनहर सिंचाई परियोजना का विवादों से नाता रहा है लेकिन जिले के प्रशासनिक अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे।
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115 दिन से चल रहा धरना और पूर्व में एक बार विस्थापितों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष के बाद भी अधिकारी निर्माण स्थल पर फोर्स की तैनाती तक ही सिमटकर रह गए।

एसडीएम के घायल होने के बाद भी प्रशासन और पुलिस आंदोलन को तमाशबीन बन देखता रहा। छत्तीसगढ़ बार्डर से सटा कनहर परियोजना को लेकर खुफिया विभाग ने भी पुलिस और जिला प्रशासन पर संवेदनहीनता बरतने की रिपोर्ट जिम्मेदारों को भेजी थी।
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मगर जिम्मेदार आंदोलन को हल्के में लेते रहे और इसका दुष्परिणाम एक बार फिर संघर्ष के रूप में सामने आया।
कनहर सिंचाई निर्माण परियोजना के डूब क्षेत्रों में आने वाले ज्यादातर गांव छत्तीसगढ़ सीमा से सटे हुए हैं।

 निर्माण कार्य की शुरूआत से ही विस्थापित तीन पीढ़ी को मानक मानकर पुनर्स्थापन और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर पिछले 115 दिनों से विस्थापितों का धरना पांगन नदी के तट पर लगातार चल रहा है।
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इस बीच धरने को छत्तीसगढ़ के लोगों का समर्थन मिलना शुरू हुआ तभी खुफिया विभाग ने प्रशासन को रिपोर्ट देकर अनहोनी होने की आशंका जाहिर की थी, परंतु तब प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

नतीजा रहा कि विस्थापितों से 23 दिसंबर को वार्ता कर धरना समाप्त कराने पहुंचे तत्कालीन एसडीएम अभय कुमार पांडेय को विरोध का सामना करना पड़ा था।

 पथराव और लाठी चार्ज में वे घायल भी हुए थे। फिर भी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की संवेदनहीनता चरम पर रही। इतना ही नहीं पिछले दिनों अनपरा में आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष भी विस्थापितों के मामले को नहीं उठाया गया।


फिर धरनारत विस्थापितों को कुछ लोगों का समर्थन मिलने लगा। समझा जा रहा है कि यदि प्रशासन ने इस गंभीर मसले का निपटारा नहीं किया तो विस्थापितों का धरना प्रशासन के लिए नासूर बन सकता है।
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