टीकाकरण अभियानः फोटो खींचाने तक रुका प्रचार वाहन, अफसरों के जाते ही पोस्टर-होर्डिंग उताकर चला गया घर
कोविड-19 टीकाकरण के लिए लोगों को जागरुक करने आया वाहन पांच मीटर भी नहीं चला और वापस लौट गया। बस बैनर-होर्डिंग लगाकर फोटो खिंचाने तक ही वाहन की उपयोगिता रही। संयोग रहा कि जागरुकता वाहन के नाम पर गड़बड़झाले का पूरा मामला मीडिया के कैमरे में कैद हो गया।
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स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में गड़बड़झाला नई बात नहीं है। बस कागजी घोड़े दौड़ाकर ही बिचौलिए लाखों रुपये डकार रहे हैं। बृहस्पतिवार को यूपी के सोनभद्र में भी ऐसा ही मामला सामने आया। कोविड-19 टीकाकरण के लिए लोगों को जागरुक करने आया वाहन पांच मीटर भी नहीं चला और वापस लौट गया। बस बैनर-होर्डिंग लगाकर फोटो खींचाने तक ही वाहन की उपयोगिता रही।
संयोग रहा कि जागरुकता वाहन के नाम पर गड़बड़झाले का पूरा मामला मीडिया के कैमरे में कैद हो गया। इस बारे में जब अफसरों से सवाल हुआ तो खुद को साफ-पाक बताने के लिए तरह-तरह की दलीलें देते रहे। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी कोविड-19 टीकाकरण अभियान को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रुझान नहीं बढ़ पा रहा।
भ्रांतियों में जकड़े महिला-पुरुष टीका लगवाने से हिचक रहे हैं। ऐसे लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरुक करने के लिए शासन के निर्देश पर गांवों में जागरुकता वाहन भेजा जाना है। रोजाना अलग-अलग गांवों में जाकर वाहन से टीकाकरण के फायदे बताए जाने हैं। इसी के तहत बृहस्पतिवार को यूनिसेफ की ओर जागरुकता वाहन को रवाना किया जाना था।
सोनभद्र सीएमओ कार्यालय पर स्वास्थ्य विभाग के तमाम अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। करीब साढ़े 11 बजे जागरुकता से जुड़े बैनर-पोस्टर लगाकर एक वैन को सामने लाया गया। सीएमओ समेत अन्य अफसरों ने वैन को हरी झंडी दिखाई। बताया गया कि यह वाहन अब गांवों में जाकर लोगों को जागरुक करेगा। मीडिया के कैमरों में यह तस्वीर कैद होते ही अधिकारी अपने कार्यालयों में लौट गए।
इसके तुरंत बाद चालक ने भी बैनर-पोस्टर होर्डिंग उतारा और वाहन में रखकर घर जाने लगा। उससे जब ऐसा करने के लिए पूछा गया तो उसका कहना था कि उसे सिर्फ फोटो सेशन के लिए ही बुलाया गया था। उसका काम हो गया, लिहाजा घर जा रहा है। इससे पहले कि कोई और सवाल होता वह वाहन स्टार्ट कर तेज रफ्तार में आगे निकल गया।