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आरोप : बेेड पर तड़पकर मर गई प्रसूता, मोबाइल फोन में लगी रही नर्स
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सोनभद्र। मेडिकल काॅलेज लोढ़ी परिसर में पीपीपी मॉडल पर संचालित एमसीएच विंग में डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। रविवार को बेड पर तड़पते हुए प्रसूता की मौत हो गई। आरोप है कि उस समय स्टाफ नर्स मोबाइल फोन में व्यस्त थी। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। एमसीएच विंग में पंद्रह दिनों पहले हुई एक घटना में जच्चा बच्चा की मौत हो गई थी।
आदिवासी बहुल इलाके में गर्भवतियों और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में एमसीएच विंग की स्थापना हुई है। इसके संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी को सौंपी गई थी। करमा थाना क्षेत्र के बहेरा निवासी ऊषा देवी (24) को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार को परिजनों ने एमसीएच विंग में भर्ती कराया था। रात में ऑपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था। परिजनों के अनुसार, रविवार की सुबह 11 बजे के करीब उनसे खून मंगाया गया। खून चढ़ाने के दौरान कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नर्स ने ही खून चढ़ाना शुरू किया। इसके बाद नर्स दूर जाकर बैठ गई। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद ऊषा तेज दर्द से वह छटपटाने लगी। परिजनों को बेड के आसपास के तीमारदारों ने प्रसूता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी। परिजनों का आरोप है कि उस समय वहां कोई डॉक्टर नहीं था। वह नर्स से मदद की गुहार लगाते रहे और नर्स मोबाइल फोन में व्यस्त रही। नर्स ने कहा कि कुछ देर में मरीज खुद ठीक हो जाएगी। लेकिन स्थिति बिगड़ती ही गई। ऊषा ने दोपहर एक बजे दम तोड़ दिया।
ग्राम प्रधान बहेरा धीरज सिंह ने आरोप लगाया कि मौत के बाद भी अस्पताल कर्मियों ने रेफर का पर्चा बनाकर वाराणसी जाने के लिए कहा। इसके बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजन दोपहर एक बजे से शाम तक कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस को शव कब्जे में नहीं लेने दिया।
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कार्रवाई के आश्वासन पर माने
अस्पताल चौकी पुलिस के समझाने के बाद भी परिजन नहीं माने। अस्पताल के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को मौके पर बुलाने पर अड़े रहे। छह घंटे तक हंगामा चला। शाम छह बजे के करीब मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य प्रो.एसके सिंह, एसीमओ डॉ. सुमन ने पहुंच घटना की जानकारी ली। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने और कमेटी बनाकर कर कार्रवाई के आश्वासन पर रात करीब नौ बजे परिजन शव पुलिस को सौंपने को राजी हुए।
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तब जच्चा-बच्चा की हुई थी मौत
सोनभद्र। करीब पंद्रह दिनों पूर्व इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की माैत के बाद लापरवाही का आरोप लगा था। परिजनों के मुताबिक कृष्ण कुमारी (32) निवासी राबर्ट्सगंज सोनवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों को खून लेने के लिए भेज दिया गया था। परिजन खून का इंतजाम कर रहे थे, उसी दौरान बिना जानकारी दिए चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर दिया। इससे जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल कर्मियों ने जबरन शव एंबुलेंस में रखवा दिया था।
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डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए सीएमओ ने लिखा पत्र
अस्पताल में भर्ती मरीजों और मृतका के परिजनों का आरोप है कि ऊषा जब दर्द से कराह रही थी उस समय में तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी। हालांकि मौके से तीनों डॉक्टर भाग गए थे। इस मामले को सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि तीनों डॉक्टर जो मरीज को छोड़कर भाग गए थे, उन पर कार्रवाई के लिए कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया जा रहा है। कमेटी का गठन किया जा रहा है।
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आदिवासी बहुल इलाके में गर्भवतियों और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर में एमसीएच विंग की स्थापना हुई है। इसके संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी को सौंपी गई थी। करमा थाना क्षेत्र के बहेरा निवासी ऊषा देवी (24) को प्रसव पीड़ा होने पर शनिवार को परिजनों ने एमसीएच विंग में भर्ती कराया था। रात में ऑपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था। परिजनों के अनुसार, रविवार की सुबह 11 बजे के करीब उनसे खून मंगाया गया। खून चढ़ाने के दौरान कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नर्स ने ही खून चढ़ाना शुरू किया। इसके बाद नर्स दूर जाकर बैठ गई। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद ऊषा तेज दर्द से वह छटपटाने लगी। परिजनों को बेड के आसपास के तीमारदारों ने प्रसूता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी। परिजनों का आरोप है कि उस समय वहां कोई डॉक्टर नहीं था। वह नर्स से मदद की गुहार लगाते रहे और नर्स मोबाइल फोन में व्यस्त रही। नर्स ने कहा कि कुछ देर में मरीज खुद ठीक हो जाएगी। लेकिन स्थिति बिगड़ती ही गई। ऊषा ने दोपहर एक बजे दम तोड़ दिया।
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ग्राम प्रधान बहेरा धीरज सिंह ने आरोप लगाया कि मौत के बाद भी अस्पताल कर्मियों ने रेफर का पर्चा बनाकर वाराणसी जाने के लिए कहा। इसके बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजन दोपहर एक बजे से शाम तक कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस को शव कब्जे में नहीं लेने दिया।
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कार्रवाई के आश्वासन पर माने
अस्पताल चौकी पुलिस के समझाने के बाद भी परिजन नहीं माने। अस्पताल के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को मौके पर बुलाने पर अड़े रहे। छह घंटे तक हंगामा चला। शाम छह बजे के करीब मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य प्रो.एसके सिंह, एसीमओ डॉ. सुमन ने पहुंच घटना की जानकारी ली। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराने और कमेटी बनाकर कर कार्रवाई के आश्वासन पर रात करीब नौ बजे परिजन शव पुलिस को सौंपने को राजी हुए।
तब जच्चा-बच्चा की हुई थी मौत
सोनभद्र। करीब पंद्रह दिनों पूर्व इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की माैत के बाद लापरवाही का आरोप लगा था। परिजनों के मुताबिक कृष्ण कुमारी (32) निवासी राबर्ट्सगंज सोनवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों को खून लेने के लिए भेज दिया गया था। परिजन खून का इंतजाम कर रहे थे, उसी दौरान बिना जानकारी दिए चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर दिया। इससे जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल कर्मियों ने जबरन शव एंबुलेंस में रखवा दिया था।
डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए सीएमओ ने लिखा पत्र
अस्पताल में भर्ती मरीजों और मृतका के परिजनों का आरोप है कि ऊषा जब दर्द से कराह रही थी उस समय में तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी। हालांकि मौके से तीनों डॉक्टर भाग गए थे। इस मामले को सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि तीनों डॉक्टर जो मरीज को छोड़कर भाग गए थे, उन पर कार्रवाई के लिए कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया जा रहा है। कमेटी का गठन किया जा रहा है।