{"_id":"672e4a34d5cf7feb9b0204f4","slug":"after-fasting-for-36-hours-without-water-women-offered-arghya-to-the-rising-sun-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-120221-2024-11-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: 36 घंटे निराजल व्रत के बाद महिलाओं ने उगते सूर्य को दिया अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: 36 घंटे निराजल व्रत के बाद महिलाओं ने उगते सूर्य को दिया अर्घ्य
विज्ञापन
सोनभद्र। छठ पूजा के अंतिम दिन महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निराजल व्रत को पूरा किया। नदी-तालाब के घाटों पर सुबह की ठंडी हवाओं के बीच कमर तक ठंडे पानी में खड़ी होकर महिलाएं छठ मइया से आराधना करती रहीं। घाटों पर एक तरफ बज रहे शीतली बयरिया शीतल दूजे पनिया... तो दूसरी तरफ उग हे सूरज देव भेल भिनसरवा... गीत हर श्रद्धालु के मनोभाव को व्यक्त करते रहे। सतरंगी घोड़े पर सवार सूर्यदेव ने भी थोड़ी प्रतीक्षा जरूर कराई, लेकिन जब पूरब में लालिमा छाई तो हर किसी के चेहरे पर मुस्कान तैर उठी।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद से ही श्रद्धालुओं में सुबह का इंतजार शुरू हो गया था। किसी ने तालाब किनारे ही जागकर रात बिताई तो कोई लंबी दूरी तय कर नंगे पांव घाट पर पहुंचा। वेदी पर कलश रखकर छठ मइया की स्तुति की और फिर पानी में खड़े होकर पूरब में सूर्य देव के दर्शन की बाट जोहने लगीं। बिजली के रंग-बिरंगे झालरों और घाटाें पर जलते दीपक की लौ से पानी में बनते प्रतिबिंब ने घाटों पर अलौकिक छटा बिखेरी। सुबह करीब सवा छह बजे सूर्योदय के साथ अर्घ्य का सिलसिला शुरू हुआ। नगर के रामसरोवर तालाब, मेहुड़ी नहर, अकड़हवा पोखरा, बढ़ौली तालाब, पुसौली और उरमौरा तालाब पर कमोवेश एक सा नजारा था। हजारों श्रद्धालुओं ने यहां अर्घ्य दिया। इसके अलावा चोपन में सोन नदी के तट पर भी उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। दुद्धी के शिवाजी तालाब, ओबरा में रेणुका नदी तट, पिपरी और शक्तिनगर में रिहंद जलाशय के किनारे महिलाओं ने छठ पूजा की। विंढमगंज में यूपी-झारखंड सीमा पर प्रवाहित सततवाहिनी नदी के तट पर छठ पूजा के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा। यहां सैकड़ों महिलाएं रात भर घाट पर ही रहीं। सुबह अर्घ्य देने के बाद घर लौटीं। बीजपुर, घोरावल, सलखन, बभनी, रामगढ़, खलियारी, मधुपुर, वैनी, चुर्क, करमा, केकराही, कोन सहित अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं ने गांव के तालाब, नदी और नहर के किनारे विधि-विधान से छठ पूजा की। अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। पूजन समाप्ति के बाद प्रसाद पाने के लिए लोग लालायित दिखे। इस दौरान घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। एएसपी, सीओ, संबंधित थाना प्रभारी के अलावा सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मी गश्त करते रहे।
-- -
विज्ञापन
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद से ही श्रद्धालुओं में सुबह का इंतजार शुरू हो गया था। किसी ने तालाब किनारे ही जागकर रात बिताई तो कोई लंबी दूरी तय कर नंगे पांव घाट पर पहुंचा। वेदी पर कलश रखकर छठ मइया की स्तुति की और फिर पानी में खड़े होकर पूरब में सूर्य देव के दर्शन की बाट जोहने लगीं। बिजली के रंग-बिरंगे झालरों और घाटाें पर जलते दीपक की लौ से पानी में बनते प्रतिबिंब ने घाटों पर अलौकिक छटा बिखेरी। सुबह करीब सवा छह बजे सूर्योदय के साथ अर्घ्य का सिलसिला शुरू हुआ। नगर के रामसरोवर तालाब, मेहुड़ी नहर, अकड़हवा पोखरा, बढ़ौली तालाब, पुसौली और उरमौरा तालाब पर कमोवेश एक सा नजारा था। हजारों श्रद्धालुओं ने यहां अर्घ्य दिया। इसके अलावा चोपन में सोन नदी के तट पर भी उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। दुद्धी के शिवाजी तालाब, ओबरा में रेणुका नदी तट, पिपरी और शक्तिनगर में रिहंद जलाशय के किनारे महिलाओं ने छठ पूजा की। विंढमगंज में यूपी-झारखंड सीमा पर प्रवाहित सततवाहिनी नदी के तट पर छठ पूजा के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा। यहां सैकड़ों महिलाएं रात भर घाट पर ही रहीं। सुबह अर्घ्य देने के बाद घर लौटीं। बीजपुर, घोरावल, सलखन, बभनी, रामगढ़, खलियारी, मधुपुर, वैनी, चुर्क, करमा, केकराही, कोन सहित अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं ने गांव के तालाब, नदी और नहर के किनारे विधि-विधान से छठ पूजा की। अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। पूजन समाप्ति के बाद प्रसाद पाने के लिए लोग लालायित दिखे। इस दौरान घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। एएसपी, सीओ, संबंधित थाना प्रभारी के अलावा सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मी गश्त करते रहे।
विज्ञापन