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धारा 20 की जमीन पर बसे लोगों को नहीं मिला अधिकार
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म्योरपुर। जिले के दक्षिणांचल में वन भूमि से आच्छादित धारा 20 की जमीनों पर अब भी लोगों का कब्जा बना हुआ है। लेकिन उन्हें भौमिक अधिकार नहीं मिल सका है। इन जमीनों पर काबिज लोग पूर्वजों के समय से ही घर बना कर इन जमीनों पर आबाद हैं। वनाधिकार कानून आने के बाद इन जमीनों पर अधिकार की आशा लोगों को थी जो अब भी अधूरी रह गयी है। ग्रामीणों ने तत्काल इन जमीनों पर पट्टा देने की मांग की है।
दक्षिणांचल की एक बड़ी आबादी वन भूमि से आच्छादित धारा 20 की जमीनों पर अब भी गुजर बसर कर रही है। इन जमीनों पर अधिकार की बात करें तो लोगों को वनाधिकार कानून के आने के बाद में आशा जगी थी कि जमीनों पर इन्हें अधिकार मिल जाएगा, लेकिन वनाधिकार कानून के तहत दावेदारों के हाथ समितियों के पास अपने दावे प्रस्तुत करने के अलावा कुछ नहीं लगा है। म्योरपुर थाना क्षेत्र के गंभीरपुर गांव में धारा 20 की जमीन पर काबिज 13 लोगों के खिलाफ वन विभाग ने वन अधिनियम की धाराओं के तहत केस काट दिया है। इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी भी जताई थी। केस कटे हुए ग्रामीणों में कई लोगों को वनाधिकार के तहत पट्टा भी मिला हुआ है। इसको नजरअंदाज करते हुए वन विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों ने तत्काल दावों की समीक्षा कर उन्हे अधिकार देने की मांग की है। ग्रामीणों ने जमीनों पर अब तक वनाधिकार कानून का लाभ न मिलने पर लोकसभा चुनाव में नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उनकी इस समस्या पर किसी प्रत्याशी और पार्टी ने गंभीरता से नही लिया है।
दक्षिणांचल की एक बड़ी आबादी वन भूमि से आच्छादित धारा 20 की जमीनों पर अब भी गुजर बसर कर रही है। इन जमीनों पर अधिकार की बात करें तो लोगों को वनाधिकार कानून के आने के बाद में आशा जगी थी कि जमीनों पर इन्हें अधिकार मिल जाएगा, लेकिन वनाधिकार कानून के तहत दावेदारों के हाथ समितियों के पास अपने दावे प्रस्तुत करने के अलावा कुछ नहीं लगा है। म्योरपुर थाना क्षेत्र के गंभीरपुर गांव में धारा 20 की जमीन पर काबिज 13 लोगों के खिलाफ वन विभाग ने वन अधिनियम की धाराओं के तहत केस काट दिया है। इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी भी जताई थी। केस कटे हुए ग्रामीणों में कई लोगों को वनाधिकार के तहत पट्टा भी मिला हुआ है। इसको नजरअंदाज करते हुए वन विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों ने तत्काल दावों की समीक्षा कर उन्हे अधिकार देने की मांग की है। ग्रामीणों ने जमीनों पर अब तक वनाधिकार कानून का लाभ न मिलने पर लोकसभा चुनाव में नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उनकी इस समस्या पर किसी प्रत्याशी और पार्टी ने गंभीरता से नही लिया है।
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