फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   खनन क्षेत्र की अस्थाई बस्तियों से ओडीएफ को झटका

खनन क्षेत्र की अस्थाई बस्तियों से ओडीएफ को झटका

Tue, 08 May 2018 11:12 PM IST
Updated Tue, 08 May 2018 11:12 PM IST
विज्ञापन
खनन क्षेत्र की अस्थाई बस्तियों से ओडीएफ  को झटका
सोनभद्र/अनपरा। जिले को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) कराने के लिए जिला प्रशासन एड़ी चोटी एक किए हुए है। जनपद की 340 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित भी किया गया है लेकिन खनन क्षेत्र ओबरा, डाला के अलावा एनसीएल की खदानों में असंगठित मजदूरों की अस्थाई बस्तियों से ओडीएफ को जोरदार झटका लग रहा है। यही वजह है कि जिला प्रशासन इन बस्तियों के अलावा खनन क्षेत्र से लगी ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त कराने के लिए अलग से मंथन कर कार्ययोजना बनाने में जुट गया है।
विज्ञापन

ओबरा व डाला क्षेत्र में करीब 25 हजार असंगठिक मजदूर कार्य करते हैं। इसके अलावा शक्तिनगर व अनपरा क्षेत्र में स्थित एनसीएल की खदानों में ओवर बर्डेन हटाने के काम लगी ओबी कंपनियों में भी सैकड़ों की संख्या में श्रमिक कार्य कर रहे हैं। ओबरा व डाला क्षेत्र में तो क्रशर पर कार्य करने वाले श्रमिक झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रहते है लेकिन उनके पास शौचालय नहीं है। जिसकी वजह से एक बड़ी आबादी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने ऐेसे बस्तियों को खुले में शौच से मुक्त करने की नई योजना बनाई है। दरअसल इन श्रमिकों के पास अपनी कोई जमीन नहीं है। ऐसी स्थिति में वहां सामुदायिक शौचालय बनाए जाने की निर्णय लिया गया है। जिला प्रशासन पत्थर खदान या क्रशर प्लांट संचालित करने वाले ठेकेदारों से जमीन लेकर वहां सामुदायिक शौचालय बनवाएंगा।
विज्ञापन


बोले डीपीआरओ ...
खनन क्षेत्र से लगी ग्राम पंचायतों में ओडीएफ के लिए जल्द अभियान शुरू किया जाएगा। मजदूरों की अस्थाई बस्तियों के समीप सामुदायिक शौचालय बनाए जाने की योजना है। - आरके भारती, जिला पंचायत राज अधिकारी, सोनभद्र।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनसीएल कर्मी नहीं कर रहें शौचालय का प्रयोग
सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि एनसीएल से विस्थापित गांव के तमाम लोगों को नौकरी दी गई है। उन्हें नौकरी के साथ ही जमीन भी मुहैया कराई गई। विस्थापित एनसीएल की विभिन्न परियोजनाओं में नौकरी तो कर रहे लेकिन वे अपने निजी आवास में ही रहते हैं। आवास में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है और ज्यादातर लोग खुले में शौच कर रहे है। जिला मुख्यालय पर होने वाली सीएसआर की बैठक में इस मुद्दे को भी शामिल किया गया है। चाकि कर्मियों को शौचालय बनाने के लिए बाध्य किया जा सके।


टायलेट बनवाने की जिम्मेदारी किसकी...
टायलेट बन गया या नहीं। टॉयलेट का ग्रामीण प्रयोग कर रहे या नहीं। कहीं ग्रामीण टॉयलेट बनवा कर बाहर शौच के लिए तो नहीं जा रहा। इसकी मॉनिटरिंग भी गांव लेवल पर ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की है। ग्राम पंचायत लेवल पर एडीओ पंचायत, जिला लेवल पर डीपीआरओ, सीडीओ और जिले के डीएम की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed