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जिले में खुले में फेके जा रहे अस्पतालों के कचरे
Updated Mon, 07 May 2018 11:52 PM IST
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सोनभद्र। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट खुले में फेका जा रहा। इससे संक्रामक बीमारी के फैलने का अंदेशा बना हुआ है। इसके बावजूद अस्पताल के कर्मचारी लापरवाही बरतते हुए केमिकल वेस्ट को खुले में ही फेंक रहे हैं। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के किसी भी अफसर का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। नियम है कि अस्पताल के कचरे को किसी भी खुले स्थान पर नहीं फेंक सकते।
खुले में मेेडिकल वेस्ट फेकने से लगातार प्रदूषण फैल रहा है। लोगों में बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। राबर्ट्सगंज नगर में कई निजी अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में ही मेडिकल वेस्ट निस्तारण का इंतजाम होना चाहिए लेकिन ज्यादातर अस्पताल के संचालन मानकों की खुलेआम धज्जियां उडा रहे हैं। अस्पताल के बाहर ही खुुले में पट्टियां, सीरिंज, खाली बोतल, टिश्यू आदि फेक रहे हैं। दीप नगर में एक निजी अस्पताल के बाहर पड़ा कूड़ा कचरा आसपास के रहने वालों को प्रभावित कर रहा है। कमोवेश यही हाल जिला अस्पताल का भी है। यहां भी मेडिकल से जुड़ा कचरा आयुष विभाग के ठीक बगल में गड्ढे में फेका जा रहा है। उससे निकलने वाली दुर्गंध से परेशान होकर लोग आयुुष अस्पताल की ओर उपचार कराने के लिए नहीं जाते हैं। सरकारी अस्पतालों के कचरा उठान के लिए स्वास्थ्य महकमा प्रतिमाह लंबा बजट खर्च करता है लेकिन स्थिति काफी बदतर है। अस्पताल ही लोगों की स्वास्थ्य का दुश्मन बन गया है। अस्पताल में रोजाना निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारण के उचित प्रबंध नहीं हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीबी गौतम का कहना है कि जिला अस्पताल में अलग-अलग तरह के बायो मेडिकल वेस्ट रखने के लिए तीन कमरे बनाए गए हैं। जल्द ही उसमें कूड़े रखे जाएंगे। उन्हें निस्तारित करने वाली एजेंसी यहां आकर कूड़े ले जाएगी।
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खुले में मेेडिकल वेस्ट फेकने से लगातार प्रदूषण फैल रहा है। लोगों में बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। राबर्ट्सगंज नगर में कई निजी अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में ही मेडिकल वेस्ट निस्तारण का इंतजाम होना चाहिए लेकिन ज्यादातर अस्पताल के संचालन मानकों की खुलेआम धज्जियां उडा रहे हैं। अस्पताल के बाहर ही खुुले में पट्टियां, सीरिंज, खाली बोतल, टिश्यू आदि फेक रहे हैं। दीप नगर में एक निजी अस्पताल के बाहर पड़ा कूड़ा कचरा आसपास के रहने वालों को प्रभावित कर रहा है। कमोवेश यही हाल जिला अस्पताल का भी है। यहां भी मेडिकल से जुड़ा कचरा आयुष विभाग के ठीक बगल में गड्ढे में फेका जा रहा है। उससे निकलने वाली दुर्गंध से परेशान होकर लोग आयुुष अस्पताल की ओर उपचार कराने के लिए नहीं जाते हैं। सरकारी अस्पतालों के कचरा उठान के लिए स्वास्थ्य महकमा प्रतिमाह लंबा बजट खर्च करता है लेकिन स्थिति काफी बदतर है। अस्पताल ही लोगों की स्वास्थ्य का दुश्मन बन गया है। अस्पताल में रोजाना निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारण के उचित प्रबंध नहीं हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीबी गौतम का कहना है कि जिला अस्पताल में अलग-अलग तरह के बायो मेडिकल वेस्ट रखने के लिए तीन कमरे बनाए गए हैं। जल्द ही उसमें कूड़े रखे जाएंगे। उन्हें निस्तारित करने वाली एजेंसी यहां आकर कूड़े ले जाएगी।
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