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करोड़ों के टेंडर को लेकर जिला पंचायत में तनातनी
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:24 AM IST
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सोनभद्र। नियम के खिलाफ जगह जगह ठेकेदार के कारिंदों की ओर से बैरियर वसूली में लिखापढ़ी के बाद अब जिला पंचायत की एएमए वर्तिका त्रिपाठी और जिपं अध्यक्ष अमरेश पटेल में ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन को लेकर तनातनी हो गई है। वर्तिका छूटे ठेकेदारों की पत्रावली पुन: शामिल करने के लिए अध्यक्ष को मौखिक और लिखित रूप से पत्र लिखी हैं तो अध्यक्ष समय बीतने के बाद इस पर विचार करने से इंकार कर रहे हैं। बचे ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर मैंनेज करने के लिए छोटे ठेकेदारों को जानबूझकर आवेदन से दूर रखा गया है।
सरकार किसी की रही हो मगर सोनभद्र जिला पंचायत में चंद ठेकेदारों का ही दबदबा रहा है। सपा काल में भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक को जिले में हस्तक्षेप करना पड़ा था। बावजूद यहां पर ई टेंडरिंग में मैनेज का खेल चलता रहा। अब करीब पचास करोड़ के कामों का टेंडर होना है तो फिर स्थिति पहले जैसे हो गई है। शासन से जिला पंचायत को 25 करोड़ का किश्तों में बजट मिलता है। इसी तरह 12 करोड़ पिछले वित्तीय वर्ष का पड़ा है। दो करोड़ डीपीआरसी पंचायत भवन के निर्माण का, एक करोड़ मैरिज हाल के निर्माण का और साढ़े तीन करोड़ पंचायत पुरस्कार सहित अन्य धनराधि मिलाकर करीब पचास करोड़ जिला पंचायत के पास है।
जिला पंचायत में ठेकेदारों ने रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए आवेदन जमा किया था। जांच पड़ताल में 43 ठेकेदारों का पंजीकरण हुआ जबकि नवीनीकरण के 88 आवदेन सही पाए गए। इस बीच रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण से छूट गए ठेकेदारों ने अध्यक्ष और एएमए से मुलाकात करके उन लोगों को भी शामिल करने की मांग की। ठेकेदारों का आरोप था कि उन लोगों को सूचना नहीं दी गई। आरोप था कि सिंडिकेट बनाकर बड़े ठेकेदार टेंडर डालेंगे और उन लोगों को काम नहीं मिलेगा। एएमए ने इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र लिखा। पत्र में कहा कि ठेकेदारों की संख्या पर्याप्त होने से ठेका इत्यादि में प्रतिस्पर्धा होती है। इससे जिला पंचायत की आय में भी बढ़ोत्तरी होती है। ऐसे में नये और पुराने ठेकेदारों को एक और मौका देने की आवश्यकता है मगर अध्यक्ष समय बीतने का हवाला देते हुए प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
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इस संबंध में अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका त्रिपाठी ने कहा कि यह उन लोगों का यह विभागीय मामला है। टेंडर से जुड़ी प्रकिया और बैरियर वसूली को वह सार्वजनिक करना नहीं चाहती। इससे जुड़े कई पत्र वह संबंधित लोगों को लिख चुकी हैं। जिला पंयायत अध्यक्ष अमरेश पटेल ने कहा कि अपूर्ण पत्रावली होने के नाते ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण नहीं हुए हैं। एएमए ने उन्हें किसी तरह का पत्र नहीं लिखा है।
फेरबदल के लिए लखनऊ में डाला डेरा
सोनभद्र। जिला पंचायत अध्यक्ष अमरेश पटेल और एएमए वर्तिका त्रिपाठी में तनातनी इस कदर बढ़ गई है कि गैर जनपद के दो माननीय, भाजपा के पूर्व पदाधिकारी, वाराणसी के एक पूर्व बैरियर ठेकेदार सहित कुछ नेता जिला पंचायत में फेरबदल के लिए जी जान से जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इसे संज्ञान में ले लिया है। इस मामले में कोई न कोई निर्णय होने वाला है।
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सरकार किसी की रही हो मगर सोनभद्र जिला पंचायत में चंद ठेकेदारों का ही दबदबा रहा है। सपा काल में भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक को जिले में हस्तक्षेप करना पड़ा था। बावजूद यहां पर ई टेंडरिंग में मैनेज का खेल चलता रहा। अब करीब पचास करोड़ के कामों का टेंडर होना है तो फिर स्थिति पहले जैसे हो गई है। शासन से जिला पंचायत को 25 करोड़ का किश्तों में बजट मिलता है। इसी तरह 12 करोड़ पिछले वित्तीय वर्ष का पड़ा है। दो करोड़ डीपीआरसी पंचायत भवन के निर्माण का, एक करोड़ मैरिज हाल के निर्माण का और साढ़े तीन करोड़ पंचायत पुरस्कार सहित अन्य धनराधि मिलाकर करीब पचास करोड़ जिला पंचायत के पास है।
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जिला पंचायत में ठेकेदारों ने रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए आवेदन जमा किया था। जांच पड़ताल में 43 ठेकेदारों का पंजीकरण हुआ जबकि नवीनीकरण के 88 आवदेन सही पाए गए। इस बीच रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण से छूट गए ठेकेदारों ने अध्यक्ष और एएमए से मुलाकात करके उन लोगों को भी शामिल करने की मांग की। ठेकेदारों का आरोप था कि उन लोगों को सूचना नहीं दी गई। आरोप था कि सिंडिकेट बनाकर बड़े ठेकेदार टेंडर डालेंगे और उन लोगों को काम नहीं मिलेगा। एएमए ने इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र लिखा। पत्र में कहा कि ठेकेदारों की संख्या पर्याप्त होने से ठेका इत्यादि में प्रतिस्पर्धा होती है। इससे जिला पंचायत की आय में भी बढ़ोत्तरी होती है। ऐसे में नये और पुराने ठेकेदारों को एक और मौका देने की आवश्यकता है मगर अध्यक्ष समय बीतने का हवाला देते हुए प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
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इस संबंध में अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका त्रिपाठी ने कहा कि यह उन लोगों का यह विभागीय मामला है। टेंडर से जुड़ी प्रकिया और बैरियर वसूली को वह सार्वजनिक करना नहीं चाहती। इससे जुड़े कई पत्र वह संबंधित लोगों को लिख चुकी हैं। जिला पंयायत अध्यक्ष अमरेश पटेल ने कहा कि अपूर्ण पत्रावली होने के नाते ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण नहीं हुए हैं। एएमए ने उन्हें किसी तरह का पत्र नहीं लिखा है।
फेरबदल के लिए लखनऊ में डाला डेरा
सोनभद्र। जिला पंचायत अध्यक्ष अमरेश पटेल और एएमए वर्तिका त्रिपाठी में तनातनी इस कदर बढ़ गई है कि गैर जनपद के दो माननीय, भाजपा के पूर्व पदाधिकारी, वाराणसी के एक पूर्व बैरियर ठेकेदार सहित कुछ नेता जिला पंचायत में फेरबदल के लिए जी जान से जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इसे संज्ञान में ले लिया है। इस मामले में कोई न कोई निर्णय होने वाला है।