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खनन व्यवसाइयों ने किया विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी
Updated Sat, 13 Oct 2018 11:05 PM IST
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ओबरा। खनन एवं क्रशर व्यवसायियों ने प्रशासन व वन विभाग पर एकपक्षीय आदेश का आरोप लगाते हुए शनिवार को शारदा मंदिर के पास प्रदर्शन किया। वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और खनन व्यवसाय को बंद करने का आरोप लगाया। इस दौरान वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी भी की।
इसके पूर्व शारदा मंदिर के पास व्यवसायियों ने बैठक कर क्रशर व खदानों को बंद कराने की निंदा की। उनका कहना है कि प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले इस व्यवसाय की बंदी से बेरोजगारी और तंगी की दोहरी मार व्यवसायी झेल रहे हैं। खनन व्यवसायी नंदलाल पांडेय व संतोष सिंह ने कहा कि खनन उद्योग बंद होने से पूर्वांचल के सभी जिलों के लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं। सोनभद्र बेरोजगारी, नक्सलवाद रहा है और यहां सबसे ज्यादा रोजगार व सुविधा खनन उद्योग ने ही मुहैया कराया है। इससे जिले में बेरोजगारी पर काफी हद तक लगाम लगा। वर्तमान समय में हजारों मजदूर, व्यवसायी बेरोजगारी व तंगी में जूझ रहे हैं। आरोप लगाया कि गलत तरीके से एनजीटी के दायरे में आये करीब दो दर्जन खदानों को बंद करने का आदेश किया गया। यदि वन विभाग के पूर्व अधिकारियों ने गलत तरीके से अनापत्ति पत्र जारी किया तो वन विभाग के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई। वन विभाग की गलती का खामियाजा खनन क्षेत्र से जुड़े लोग भुगत रहे हैं। उन्होंने इस पर कार्रवाई की मांग उठाई। कहा कि खनन व क्रशर व्यवसाय को जल्द संचालित किए जाने की मांग शासन-प्रशासन से की जाएगी। वरना धरना प्रदर्शन, आमरण अनशन किया जाएगा। बैठक में नित्यानंद दुबे, कमलेश्वर केशरी, शफीक अहमद, राजू केशरी, शशि सिंह, मोनू त्रिपाठी, रामनाथ दुबे, त्रिभुवन पांडेय, शिवशंकर अग्रहरि मौजूद रहे।
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इसके पूर्व शारदा मंदिर के पास व्यवसायियों ने बैठक कर क्रशर व खदानों को बंद कराने की निंदा की। उनका कहना है कि प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाले इस व्यवसाय की बंदी से बेरोजगारी और तंगी की दोहरी मार व्यवसायी झेल रहे हैं। खनन व्यवसायी नंदलाल पांडेय व संतोष सिंह ने कहा कि खनन उद्योग बंद होने से पूर्वांचल के सभी जिलों के लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं। सोनभद्र बेरोजगारी, नक्सलवाद रहा है और यहां सबसे ज्यादा रोजगार व सुविधा खनन उद्योग ने ही मुहैया कराया है। इससे जिले में बेरोजगारी पर काफी हद तक लगाम लगा। वर्तमान समय में हजारों मजदूर, व्यवसायी बेरोजगारी व तंगी में जूझ रहे हैं। आरोप लगाया कि गलत तरीके से एनजीटी के दायरे में आये करीब दो दर्जन खदानों को बंद करने का आदेश किया गया। यदि वन विभाग के पूर्व अधिकारियों ने गलत तरीके से अनापत्ति पत्र जारी किया तो वन विभाग के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई। वन विभाग की गलती का खामियाजा खनन क्षेत्र से जुड़े लोग भुगत रहे हैं। उन्होंने इस पर कार्रवाई की मांग उठाई। कहा कि खनन व क्रशर व्यवसाय को जल्द संचालित किए जाने की मांग शासन-प्रशासन से की जाएगी। वरना धरना प्रदर्शन, आमरण अनशन किया जाएगा। बैठक में नित्यानंद दुबे, कमलेश्वर केशरी, शफीक अहमद, राजू केशरी, शशि सिंह, मोनू त्रिपाठी, रामनाथ दुबे, त्रिभुवन पांडेय, शिवशंकर अग्रहरि मौजूद रहे।
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