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बालू लदे ट्रकों से वसूला अभिवहन शुल्क
Updated Sat, 04 Aug 2018 11:52 PM IST
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सोनभद्र । जिले में धड़ल्ले से बालू लदे ट्रकों से अभिवहन शुल्क की वसूली की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बालू को वन उपज न मानते हुए अभिवहन शुल्क पर रोक लगाई है, इसके बावजूद प्रति टन 38 रुपये की वसूली की जा रही है।
जनपद में प्रतिदिन दो हजार से अधिक बालू लदे ट्रक गुजरते है। कुछ स्थानों पर वन क्षेत्र से होकर ट्रकों को मुख्य मार्ग पर आना पड़ता है। ऐसे बालू लदे ट्रकों से अभिवहन शुल्क की वसूली वन विभाग कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी अभिवहन शुल्क के आड़ में बालू लदे ट्रक चालकों से अवैध वसूली भी करते हैं। विरोध करने पर संबंधित ट्रक के खिलाफ कार्रवाई कर उसे सीज कर दिया जाता है। ट्रक आपरेटर वसूली कर्ताओं की जेब गरम कर निकल जाते हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी कथित अवैध वसूली से इंकार कर रहे है। प्रभागीय वनाधिकारी सोनभद्र मूलचंद्र के मुताबिक वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाले बालू लदे ट्रकों से 38 रुपये प्रति टन से अभिवहन शुल्क की वसूली की जाती है। किसी भी चालक से अवैध वसूली नहीं होती। वन क्षेत्र में यदि बालू है तो वह वन उपज माना जाएगा। इसी आधार पर बालू पर अभिवहन शुल्क लिया जाता है।
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जनपद में प्रतिदिन दो हजार से अधिक बालू लदे ट्रक गुजरते है। कुछ स्थानों पर वन क्षेत्र से होकर ट्रकों को मुख्य मार्ग पर आना पड़ता है। ऐसे बालू लदे ट्रकों से अभिवहन शुल्क की वसूली वन विभाग कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी अभिवहन शुल्क के आड़ में बालू लदे ट्रक चालकों से अवैध वसूली भी करते हैं। विरोध करने पर संबंधित ट्रक के खिलाफ कार्रवाई कर उसे सीज कर दिया जाता है। ट्रक आपरेटर वसूली कर्ताओं की जेब गरम कर निकल जाते हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी कथित अवैध वसूली से इंकार कर रहे है। प्रभागीय वनाधिकारी सोनभद्र मूलचंद्र के मुताबिक वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाले बालू लदे ट्रकों से 38 रुपये प्रति टन से अभिवहन शुल्क की वसूली की जाती है। किसी भी चालक से अवैध वसूली नहीं होती। वन क्षेत्र में यदि बालू है तो वह वन उपज माना जाएगा। इसी आधार पर बालू पर अभिवहन शुल्क लिया जाता है।
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