{"_id":"5c703e60bdec227396045e9c","slug":"201550859872-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्मी की दस्तक, पानी के संकट से जूझेंगे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्मी की दस्तक, पानी के संकट से जूझेंगे लोग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनभद्र। फाल्गुन का महीना शुरू हो गया है। इसी की साथ गर्मी ने भी दस्तक दे दी है। अभी से ही पानी की किल्लत भी शुरू हो गई है। धंधरोल, नगवां डैम समेत अन्य बांधों, नदियों में पानी कम होने से इस बार गर्मी में लोगों को पानी के संकट से जूझना होगा। नगवां में 380 और धंधरौल बांध मे 640 मिलियन घन फीट पानी बचा है। घोरावल के बेलन नदी में पानी न होने से अभी से ग्राम समूह पेयजल परियोजनाएं बंद हैं।
इस वर्ष मध्य फरवरी से ही गर्मी ने दस्तक दे दी है। अभी से मौसम इतना गर्म हो रहा है कि लोग परेशान हैं। साथ ही जलस्तर पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने लगा है। पहाड़ी क्षेत्रों में तो अभी से हैंडपंपों से कम पानी निकल रहा है। जिले में स्थित नगवां, धंधरौल और ओबरा डैम में भी पानी की किल्लत शुरू हो गई है। बंधी प्रखंड के अधिशासी अभियंता जीबी पांडेय ने बताया कि नगवां डैंम में 380 मिलियन घन फिट है। यह पानी रिजर्व रखा गया है। यदि सिंचाई के लिए मांग हुई तो महज तीन दिन ही पानी दिया जा सकता है। सिंचाई के लिए 900 मिलियन घन फीट पानी की जरूरत है। उधर, धंधरौल बांध से जुड़े सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजीव प्रसाद ने बताया कि धंधरौल बांध में पानी का स्तर 1024.60 मिलियन घन फीट है लेकिन वर्तमान में महज 640 मिलियन घन फीट पानी है। पानी कम होने की वजह से रवि की सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं दिया जा रहा है। किसानों को पानी नहीं मिल पाएगा। हालांकि उनका कहना है कि पीने के लिए पानी का संकट नहीं होगा, फिर भी ज्यादा पानी खर्च न हो, इसका सभी को ख्याल रखना होगा। उधर, ओबरा डैम के एक्सईएन संजय कुमार ने बताया कि डैम में 193.24 मिलियन घन फीट पानी है। रिहंद से छोड़ा गया पानी यहां रुकता है। बता दें कि गर्मी की शुरूआत होने के साथ ही पानी का संकट बढ़ने की आशंका है। घोरावल तहसील क्षेत्र में स्थित ग्राम समूह पेयजल परियोजनाएं पानी के संकट के नाते बंद पड़ी हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता फणींद्र राय का कहना है कि बेलन नदी में पानी न होने के नाते पेयजल परियोजनाएं बंद हैं।
विज्ञापन
इस वर्ष मध्य फरवरी से ही गर्मी ने दस्तक दे दी है। अभी से मौसम इतना गर्म हो रहा है कि लोग परेशान हैं। साथ ही जलस्तर पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने लगा है। पहाड़ी क्षेत्रों में तो अभी से हैंडपंपों से कम पानी निकल रहा है। जिले में स्थित नगवां, धंधरौल और ओबरा डैम में भी पानी की किल्लत शुरू हो गई है। बंधी प्रखंड के अधिशासी अभियंता जीबी पांडेय ने बताया कि नगवां डैंम में 380 मिलियन घन फिट है। यह पानी रिजर्व रखा गया है। यदि सिंचाई के लिए मांग हुई तो महज तीन दिन ही पानी दिया जा सकता है। सिंचाई के लिए 900 मिलियन घन फीट पानी की जरूरत है। उधर, धंधरौल बांध से जुड़े सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजीव प्रसाद ने बताया कि धंधरौल बांध में पानी का स्तर 1024.60 मिलियन घन फीट है लेकिन वर्तमान में महज 640 मिलियन घन फीट पानी है। पानी कम होने की वजह से रवि की सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं दिया जा रहा है। किसानों को पानी नहीं मिल पाएगा। हालांकि उनका कहना है कि पीने के लिए पानी का संकट नहीं होगा, फिर भी ज्यादा पानी खर्च न हो, इसका सभी को ख्याल रखना होगा। उधर, ओबरा डैम के एक्सईएन संजय कुमार ने बताया कि डैम में 193.24 मिलियन घन फीट पानी है। रिहंद से छोड़ा गया पानी यहां रुकता है। बता दें कि गर्मी की शुरूआत होने के साथ ही पानी का संकट बढ़ने की आशंका है। घोरावल तहसील क्षेत्र में स्थित ग्राम समूह पेयजल परियोजनाएं पानी के संकट के नाते बंद पड़ी हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता फणींद्र राय का कहना है कि बेलन नदी में पानी न होने के नाते पेयजल परियोजनाएं बंद हैं।
विज्ञापन