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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   20 thousand MW electricity is generated in Sonbhadra, yet there is darkness in 108 settlements.

Sonebhadra News: सोनभद्र में बनती है 20 हजार मेगावाट बिजली, फिर भी 108 बस्तियों में अंधेरा

Thu, 03 Oct 2024 02:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2024 02:37 AM IST
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20 thousand MW electricity is generated in Sonbhadra, yet there is darkness in 108 settlements.
जिस जिले से देश को रोशन करने के लिए 20 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, वहीं की 108 बस्तियां ऐसी हैं, जहां अब तक बिजली नहीं पहुंची है।
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सूरज के अस्त होते ही इन गांवों में अंधेरा पसर जाता है। कुछ ग्रामीणों ने निजी व्यवस्था से सोलर लैंप की व्यवस्था कर रखी है तो कुछ साधन संपन्न लोग लंबी दूरी से केबल खींच कर बिजली जला रहे हैं।
सोनभद्र को देश की ऊर्जा राजधानी इसलिए ही कहा जाता है कि यहां बिजली और कोयला का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। देश की तरक्की का ग्रोथ इंजन होने के बाद भी यहां चिराग तले अंधेरा की स्थिति बनी हुई है।
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जिले में बनने वाली बिजली से बड़े शहर रोशन हो रहे हैं, लेकिन यहीं के लोगाें का जीवन गहरे अंधेरे में है। ग्रामीण विद्युतीकरण की तमाम योजनाएं आईं, मगर अभी भी 108 टोलों-मजरों का भाग्य नहीं बदल पाई हैं।
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इन मजरों में कहीं 50-100 घरों की आबादी है तो कहीं इससे भी अधिक परिवार गुजर-बसर कर रहे हैं। बिजली के अभाव में उनकी स्थिति अभी भी आदिम युग जैसी ही है। मिट्टी का तेल बंद होने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं।
बिजली निगम के अफसरों की दलील है कि बिखरी हुई आबादी और बाद में बसावट के चलते इन बस्तियाें में बिजली पहुंचाने में दिक्कत आती रही है। जल्द ही इसका समाधान भी कर लिया जाएगा।

बिजली से वंचित इलाकों में सबसे ज्यादा म्योरपुर के
आदिवासी बहुल म्योरपुर ब्लॉक जिले का सबसे ज्यादा खनिज, ऊर्जा और वनोपज देने वाला क्षेत्र है। देश में एनटीपीसी की पहली इकाई की स्थापना भी म्योरपुर ब्लॉक के ही कोटा गांव में सिंगरौली पावर प्लांट (शक्तिनगर) के रूप में हुई। राज्य उत्पादन निगम की 2630 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली अनपरा परियोजना भी इसी ब्लॉक में है। इसके अलावा कई निजी क्षेत्र की परियोजनाएं हैं। कोयला खदानें, एशिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम कारखाना सहित कई औद्योगिक इकाइयां यहां है। बावजूद बिजली से वंचित टोलों-मजरों की संख्या भी यहीं सबसे ज्यादा है। यहां के 30 टाेलों में बिजली नहीं पहुंची है। इसके दुद्धी के 22, नगवां में 15, घोरावल में 17, रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक में 8, चोपन में 8, चतरा में 7, बभनी में 1 टोला विद्युतीकरण से वंचित है।


सोलर लैंप चार्ज नहीं होता तो छा जाता है अंधेरा
दुद्धी ब्लॉक के खोखा, पगडेंवा गांव में बिजली नहीं है। ग्रामीण सोलर लैंप का इस्तेमाल करते हैं। बरसात या सर्दियों में जब लगातार धूप न होने से लैंप चार्ज नहीं होता तब घरों में अंधेरा रहता है। मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता है। कुछ ऐसे ही स्थिति नगवां ब्लॉक के चेरुई, मरकुड़ी, बांकी, मड़पा के भी कुछ टोलों की है। म्योरपुर ब्लॉक में अनपरा के पहाड़ी क्षेत्रों वाले कुलडोमरी, रणहोर, जोगेंद्रा, मेड़रदह गांवों के कई टोले बिजली की बाट जोह रहे हैं।
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