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नहीं चला जागरूकता अभियान, योजनाओं के लाभ से वंचित
Updated Thu, 28 Dec 2017 10:37 PM IST
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सोनभद्र। गर्भवती महिलाओं को केंद्र सरकार की ओर से पहले बच्चे के प्रसव होने पर पांच हजार रुपया दिया जाएगा। यह लाभ महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत तीन किश्तों में दिया जाएगा। इसका लाभ पहली बार गर्भवती हो रही महिलाओं एवं धात्री माताओं को दिया जाएगा। हालांकि योजना का लाभ पाने के लिए महिलाओं को गर्भवती होने का प्रमाण पत्र स्वास्थ्य कर्मियों को उपलब्ध कराना होगा। लेकिन जानकारी के अभाव में नक्सल इलाकों की अधिकांश गर्भवती महिलाएं योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रही है।
सही ढंग से खान पान न होने के कारण गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी रहती है, जिससे जच्चा-बच्चा कमजोर होते है। प्रत्येक वर्ष प्रसव कें दौरान खून की कमी होने के कारण दर्जनों महिलाएं दम तोड़ देती है। हालांकि केंद्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं और नवजात को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की शुरूआत कर दी है। इस योजना के तहत समय-समय पर आशा कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्रों में जाकर गर्भवती महिलाओं को नजदीकी राजकीय अस्पतालों में ले जाकर उनका मुफ्त में जांच करवाकर उपचार कराना है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिले में लगभग 24100 गर्भवती महिलाएं है। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ गिने-चुने महिलाओं को ही मिल सकी है। वजह नक्सल और दुरूह क्षेत्रों में योजनाओं का प्रचार-प्रसार न किया जाना है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि आशाओं, एएनएम के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। सीएचसी, पीएचसी, न्यू पीएचसी और एएनएम सेंटरों के दिवारों पर योजनाओं के बारे में लेखन कराया जाएगा। महिलाओं को गर्भवती होने का प्रमाण देने पर पहली किश्त एक हजार, दूसरी किश्त दो हजार और छह माह बाद तीसरी किश्त दो हजार रुपये डिलेवरी होने पर उनके खाते में सीधे भेजा जाता है।
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सही ढंग से खान पान न होने के कारण गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी रहती है, जिससे जच्चा-बच्चा कमजोर होते है। प्रत्येक वर्ष प्रसव कें दौरान खून की कमी होने के कारण दर्जनों महिलाएं दम तोड़ देती है। हालांकि केंद्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं और नवजात को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की शुरूआत कर दी है। इस योजना के तहत समय-समय पर आशा कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्रों में जाकर गर्भवती महिलाओं को नजदीकी राजकीय अस्पतालों में ले जाकर उनका मुफ्त में जांच करवाकर उपचार कराना है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिले में लगभग 24100 गर्भवती महिलाएं है। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ गिने-चुने महिलाओं को ही मिल सकी है। वजह नक्सल और दुरूह क्षेत्रों में योजनाओं का प्रचार-प्रसार न किया जाना है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि आशाओं, एएनएम के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। सीएचसी, पीएचसी, न्यू पीएचसी और एएनएम सेंटरों के दिवारों पर योजनाओं के बारे में लेखन कराया जाएगा। महिलाओं को गर्भवती होने का प्रमाण देने पर पहली किश्त एक हजार, दूसरी किश्त दो हजार और छह माह बाद तीसरी किश्त दो हजार रुपये डिलेवरी होने पर उनके खाते में सीधे भेजा जाता है।
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