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साढ़े तीन सौ परिषदीय विद्यालय हो चुके हैं जर्जर
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:49 AM IST
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सोनभद्र। जिले के जर्जर हो चुके परिषदीय कक्षा एक से आठ तक के करीब साढ़े तीन सौ स्कूलों की मरम्मत होगी। कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में शुद्घ पेयजल, बिजली का इंतजाम, सुंदरीकरण समेत अन्य कार्य होंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कराना शुरू कर दिया है।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 1804 प्राथमिक विद्यालय और 654 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। पिछले कई सालों से अधिकांश स्कूलों में मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है। इस नाते स्कूलों पेयजल, बिजली आदि की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। प्राथमिक विद्यालय हरथर, भरूहा, खैराही, बहेरा, पवनी, भैरोपुर, तेंदुआ, मोराही, ओदार, सिलवर, पिपरी प्रथम, बरसोत, सिहावल, खुटहनिया, खरुआव, सिरसिया ठकुराई, उच्च प्राथमिक बहेरा, प्राथमिक विद्यालय आसनडीह, सेमरिया, परसौना, हिनौती, मुड़िलाडीह, जुड़वरिया, भटौलिया, करकोली समेत करीब साढ़े तीन सौ स्कूलों के कई कमरों की दिवारे फट गई है। इतना ही नहीं प्राथमिक विद्यालय हरथर की छत टूट कर गिरने लगा है। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय तो बनाए गए है, लेकिन पाइप लाइन के जरिए पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। अध्यनरत बच्चों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो रहा। विवश होकर छात्र-छात्राएं हैंडपंप का पानी पीकर प्यास बुझा रहे हैं। विद्यालयों की जर्जर हालत को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी हमेशा चिंतित रहते हैं। वहीं शिक्षक, शिक्षिकाएं भी जानजोखिम में डालकर पढ़ा रही है। इस संबंध में बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने कहा कि कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं को दूर करने के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। ताकि बच्चों को समस्याएं न हों। सभी परिषदीय स्कूलों मेें अध्यनरत बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया कराने का भरकस प्रयास जारी है।
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शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 1804 प्राथमिक विद्यालय और 654 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। पिछले कई सालों से अधिकांश स्कूलों में मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है। इस नाते स्कूलों पेयजल, बिजली आदि की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। प्राथमिक विद्यालय हरथर, भरूहा, खैराही, बहेरा, पवनी, भैरोपुर, तेंदुआ, मोराही, ओदार, सिलवर, पिपरी प्रथम, बरसोत, सिहावल, खुटहनिया, खरुआव, सिरसिया ठकुराई, उच्च प्राथमिक बहेरा, प्राथमिक विद्यालय आसनडीह, सेमरिया, परसौना, हिनौती, मुड़िलाडीह, जुड़वरिया, भटौलिया, करकोली समेत करीब साढ़े तीन सौ स्कूलों के कई कमरों की दिवारे फट गई है। इतना ही नहीं प्राथमिक विद्यालय हरथर की छत टूट कर गिरने लगा है। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय तो बनाए गए है, लेकिन पाइप लाइन के जरिए पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। अध्यनरत बच्चों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो रहा। विवश होकर छात्र-छात्राएं हैंडपंप का पानी पीकर प्यास बुझा रहे हैं। विद्यालयों की जर्जर हालत को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी हमेशा चिंतित रहते हैं। वहीं शिक्षक, शिक्षिकाएं भी जानजोखिम में डालकर पढ़ा रही है। इस संबंध में बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने कहा कि कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं को दूर करने के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। ताकि बच्चों को समस्याएं न हों। सभी परिषदीय स्कूलों मेें अध्यनरत बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया कराने का भरकस प्रयास जारी है।
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