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महिलाओं के संघर्षों का प्रतीक है महिला दिवस
Updated Fri, 09 Mar 2018 12:12 AM IST
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अनपरा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर की संघर्षरत महिलाओं के संघर्षों का प्रतीक है। आज भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम आंका जाता है जबकि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति द्वारा गुरुवार को नेहरू चौक औड़ी मोड़ पर आयोजित महिला दिवस कार्यक्रम में कामरेड नीलम ने उक्त विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश भले ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है परंतु आज भी महिलाओं की दशा में जो सुधार होना चाहिए था वह नहीं हो पाया है।
महिलाएं आज भी अपने अधिकार के लिए संघर्षरत हैं। महिला दिवस का संघर्षों व कुरबानियों का इतिहास है। महिलाओं के साथ हो रही हिंसा ने उन्हें और मजबूत बना दिया है। 19वीं सदी के मध्य में जब महिलाओं ने कारखानों में काम शुरू किया तो वह शोषण का शिकार हुई। उनसे 16 से 18 घंटे काम कराया जाता था बदले में उन्हें पुरुषों से भी कम मजदूरी दी जाती थीं। महिलाएं घर व बाहर में तालमेल बैठाकर यह साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं हैं। इस दौरान समिति के सदस्यों ने जमकर नारेबाजी भी की तथा चुनौतियों से निपटने का संकल्प लिया। इस अवसर पर दुबराजी देवी, शर्मिला, जागमती, कंचन सिंह, शकुंतला कलावती, सरिता आदि थीं।
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महिलाएं आज भी अपने अधिकार के लिए संघर्षरत हैं। महिला दिवस का संघर्षों व कुरबानियों का इतिहास है। महिलाओं के साथ हो रही हिंसा ने उन्हें और मजबूत बना दिया है। 19वीं सदी के मध्य में जब महिलाओं ने कारखानों में काम शुरू किया तो वह शोषण का शिकार हुई। उनसे 16 से 18 घंटे काम कराया जाता था बदले में उन्हें पुरुषों से भी कम मजदूरी दी जाती थीं। महिलाएं घर व बाहर में तालमेल बैठाकर यह साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं हैं। इस दौरान समिति के सदस्यों ने जमकर नारेबाजी भी की तथा चुनौतियों से निपटने का संकल्प लिया। इस अवसर पर दुबराजी देवी, शर्मिला, जागमती, कंचन सिंह, शकुंतला कलावती, सरिता आदि थीं।
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