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स्वास्थ्य विभाग में बिना टेंडर के लिए करोड़ों की खरीददारी
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सोनभद्र। एनएचएम घोटाले में सीबीआई जांच के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार उपकरण की खरीद और भुगतान में गड़बड़ी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। अफसरों और बाबू की तिकड़ी ने बिना टेंडर और कोटेशन के न सिर्फ करोड़ों के सामान खरीद लिए ,बल्कि चोरी न पकड़ी जाए इसके लिए टुकड़ों में फर्मों को अनियमित तरीके से भुगतान कर दिया। इस गोलमाल का खुलासा आडिट में हुआ है। 5. 84 करोड़ की खरीद में 1. 69 करोड़ के भुगतान में अनियमितता सामने आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुुमार ने डीएम सोनभद्र को मामले की जांच कराने के साथ ही दोषियों के खिलाफ एक सप्ताह में कार्रवाई कर शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए पत्र लिखा है।
जानकारी के मुताबिक मेसर्स वरुन एंड कंपनी चार्टर्ड एकाउटेंट फर्म की टीम करीब तीन माह पहले स्वास्थ्य विभाग में उपकरण की खरीदारी, टेंडर और भुगतान की आडिट करने आई थी। जांच के दौरान टीम को खरीद से लेकर टेंडर और भुगतान में गड़बड़ी मिली। वित्तीय वर्ष 2017, 2018, 2018 2019 की पत्रावलियों की जांच करने में पता चला कि बिना टेंडर और कोटेशन के बाजार से अधिक मूल्य पर खरीददारी की गई। साथ ही खरीदे गए सामानों का स्टाक बुक में इंट्री तक नहीं मिली। जीएसटी के अंतर्गत निर्धारित फार्मेट पर फर्म से बिल तक नहीं लिए गए।
हद तो तब हो गई जब निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए बिलों को टुकड़ों में बांटते हुए 5,43,605 रुपये का अनियमित भुगतान कर दिया गया। यहीं नहीं स्वास्थ्य मिशन के जिला प्रबंधक रिपुजंय श्रीवास्तव और संबंधित कार्यालय बाबू से आडिट टीम रिकार्ड मांगती रही मगर संबंधित लोग टीम को फाइल देने में आनाकानी करते रहे।
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सीएमओ डॉ एसपी सिंह भी टीम को पत्रावली उपलब्ध नहीं करा सके। टीम ने अनियमितता की बिंदुवार रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। इसी कड़ी में छह जून को मिशन निदेश पंकज कुमार ने जिलाधिकारी को बिंदुवार जांच कराने और एक सप्ताह के भीतर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के लिए पत्र लिखा है।
इन फर्मों को हुआ भुगतान
सोनभद्र। सीएमओ ने मेसर्स एमवी एंड कंपनी, मेसर्स कांधा एंड संस, मेसर्स आशा प्रिटिंग, मेसर्स डीके एंड पीके, मेसर्स एस टेडर्स, मेसर्स आशु इंटरप्राइजेज, मेसर्स बिनायक मेडिकेयर, मेसर्स गोयल इंटर प्राइजेज को वर्ष 2017 से 11 अपै्रल 2019 तक 5,84,21,247 का भुगतान किया है।
अफसरों ने नहीं दी फाइल तो आडिट टीम ने खुद जुटाया रिकार्ड
सोनभद्र। अनियमित तरीके से किए गए भुगतान पकड़ में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की तिकड़ी आडिट टीम को इधर उधर की बातों में घुमाती रही। टीम फर्म और टेंडर से संबंधित कागजात मांगती रह गई मगर फाइल देने में अफसर टहलाते रहे। फिर टीम ने पीएफएमएस पोर्टल से नो योर पेमेंट साइट से आठ फर्मों का डिटेल खुद निकाल लिया। टीम ने निविदा प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए शासन से इन फर्मों के साथ ही निविदा जांच कराने की सिफारिश की थी।
जानकारी के मुताबिक मेसर्स वरुन एंड कंपनी चार्टर्ड एकाउटेंट फर्म की टीम करीब तीन माह पहले स्वास्थ्य विभाग में उपकरण की खरीदारी, टेंडर और भुगतान की आडिट करने आई थी। जांच के दौरान टीम को खरीद से लेकर टेंडर और भुगतान में गड़बड़ी मिली। वित्तीय वर्ष 2017, 2018, 2018 2019 की पत्रावलियों की जांच करने में पता चला कि बिना टेंडर और कोटेशन के बाजार से अधिक मूल्य पर खरीददारी की गई। साथ ही खरीदे गए सामानों का स्टाक बुक में इंट्री तक नहीं मिली। जीएसटी के अंतर्गत निर्धारित फार्मेट पर फर्म से बिल तक नहीं लिए गए।
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हद तो तब हो गई जब निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए बिलों को टुकड़ों में बांटते हुए 5,43,605 रुपये का अनियमित भुगतान कर दिया गया। यहीं नहीं स्वास्थ्य मिशन के जिला प्रबंधक रिपुजंय श्रीवास्तव और संबंधित कार्यालय बाबू से आडिट टीम रिकार्ड मांगती रही मगर संबंधित लोग टीम को फाइल देने में आनाकानी करते रहे।
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सीएमओ डॉ एसपी सिंह भी टीम को पत्रावली उपलब्ध नहीं करा सके। टीम ने अनियमितता की बिंदुवार रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। इसी कड़ी में छह जून को मिशन निदेश पंकज कुमार ने जिलाधिकारी को बिंदुवार जांच कराने और एक सप्ताह के भीतर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के लिए पत्र लिखा है।
इन फर्मों को हुआ भुगतान
सोनभद्र। सीएमओ ने मेसर्स एमवी एंड कंपनी, मेसर्स कांधा एंड संस, मेसर्स आशा प्रिटिंग, मेसर्स डीके एंड पीके, मेसर्स एस टेडर्स, मेसर्स आशु इंटरप्राइजेज, मेसर्स बिनायक मेडिकेयर, मेसर्स गोयल इंटर प्राइजेज को वर्ष 2017 से 11 अपै्रल 2019 तक 5,84,21,247 का भुगतान किया है।
अफसरों ने नहीं दी फाइल तो आडिट टीम ने खुद जुटाया रिकार्ड
सोनभद्र। अनियमित तरीके से किए गए भुगतान पकड़ में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की तिकड़ी आडिट टीम को इधर उधर की बातों में घुमाती रही। टीम फर्म और टेंडर से संबंधित कागजात मांगती रह गई मगर फाइल देने में अफसर टहलाते रहे। फिर टीम ने पीएफएमएस पोर्टल से नो योर पेमेंट साइट से आठ फर्मों का डिटेल खुद निकाल लिया। टीम ने निविदा प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए शासन से इन फर्मों के साथ ही निविदा जांच कराने की सिफारिश की थी।