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कहीं लटकता मिला ताला तो कहीं इक्का-दुक्का मिले मौजूद
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सोनभद्र। मतदान शुरू होने तक गुलजार रहने वाले विभिन्न पार्टियों के चुनावी कार्यालयों पर सोमवार को सन्नाटा पसरा मिला। कहीं ताला लटकता दिखा तो कहीं इक्का-दुक्का लोग गपशप करते मिले। प्रत्याशी और उनके साथ भागदौड़ करने वाले समर्थक आराम फरमा चुनाव थकान मिटाने में लगे रहे।
सोमवार सुबह 11 बजे चुनावी कार्यालयों का हाल जाना गया। सबसे पहले चुर्क मोड़ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां जिला सचिव कमलेश और कार्यालय सचिव अनिल यादव आपस में बातचीत करते मिले। पूरे कार्यालय परिसर में सन्नाटे की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद पुसौली स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय पहुंचे। वहां भी सन्नाटा पसरा मिला। कार्यालय के अंदर कार्यालय व्यवस्थापक कैलाश प्रसाद त्रिपाठी अकेले बैठे मिले। पूछने पर बताया कि सुबह से दोपहर तक कोई कार्यालय पर नहीं आया है। हो सकता है दोपहर बाद कोई आए। फिलहाल शाम पांच बजे तक कार्यालय खुला रहेगा।
मंडी गेट के सामने स्थित कांग्रेस के चुनाव कार्यालय में ताला लटकता मिला। आस-पास के लोगों से जानकारी ली गई तो पता चला कि सुबह से यहां कोई नहीं आया है। उम्मीदवारों के बारे में मालूम किया गया तो पता चला कि अधिकांश लोग अपने-अपने घरों पर आराम फरमा रहे हैं। प्रमुख दलों के उम्मीदवार बाहरी होने के कारण अपने गृह जनपद गए हुए हैं।
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अपने-अपने तरीके से हल करते रहे चुनावी समीकरण
सोनभद्र। राबटर्सगंज संसदीय क्षेत्र पर हुए रिकार्ड मतदान को लेकर सोमवार को राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से निष्कर्ष निकालते रहे। चट्टी चौराहों पर भी सुबह से शाम तक हार-जीत के दावे किए जाते रहे। 58 फीसदी तक हुए मतदान को लेकर जहां भाजपा के लोग गदगद नजर आए। वहीं गठबंधन के लोगों का मानना था कि उन्हें सपा-बसपा के बेस वोट बैंक के साथ भाजपा से नाराज बेसवोटरों का भरपूर साथ मिला है, इसलिए इस बार बाजी उनके हाथ लगने वाली है। वहीं भाजपा से जुड़े लोगों का दावा था कि मोदी इंपैक्ट ने सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए हैं। बसपा के वोटों में जगह-जगह हुए बिखराव ने उन्हें मजबूत किया। बताते चलें कि राबटर्सगंज संसदीय सीट पर अब तक हुए चुनाव में 50 प्रतिशत से उपर का मतदान भाजपा के पक्ष में गया है, लेकिन इस बार सपा-बसपा दो नों एक साथ हैं। ऐसे में जीत किसे मिलेगी? इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
सोमवार सुबह 11 बजे चुनावी कार्यालयों का हाल जाना गया। सबसे पहले चुर्क मोड़ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां जिला सचिव कमलेश और कार्यालय सचिव अनिल यादव आपस में बातचीत करते मिले। पूरे कार्यालय परिसर में सन्नाटे की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद पुसौली स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय पहुंचे। वहां भी सन्नाटा पसरा मिला। कार्यालय के अंदर कार्यालय व्यवस्थापक कैलाश प्रसाद त्रिपाठी अकेले बैठे मिले। पूछने पर बताया कि सुबह से दोपहर तक कोई कार्यालय पर नहीं आया है। हो सकता है दोपहर बाद कोई आए। फिलहाल शाम पांच बजे तक कार्यालय खुला रहेगा।
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मंडी गेट के सामने स्थित कांग्रेस के चुनाव कार्यालय में ताला लटकता मिला। आस-पास के लोगों से जानकारी ली गई तो पता चला कि सुबह से यहां कोई नहीं आया है। उम्मीदवारों के बारे में मालूम किया गया तो पता चला कि अधिकांश लोग अपने-अपने घरों पर आराम फरमा रहे हैं। प्रमुख दलों के उम्मीदवार बाहरी होने के कारण अपने गृह जनपद गए हुए हैं।
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अपने-अपने तरीके से हल करते रहे चुनावी समीकरण
सोनभद्र। राबटर्सगंज संसदीय क्षेत्र पर हुए रिकार्ड मतदान को लेकर सोमवार को राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से निष्कर्ष निकालते रहे। चट्टी चौराहों पर भी सुबह से शाम तक हार-जीत के दावे किए जाते रहे। 58 फीसदी तक हुए मतदान को लेकर जहां भाजपा के लोग गदगद नजर आए। वहीं गठबंधन के लोगों का मानना था कि उन्हें सपा-बसपा के बेस वोट बैंक के साथ भाजपा से नाराज बेसवोटरों का भरपूर साथ मिला है, इसलिए इस बार बाजी उनके हाथ लगने वाली है। वहीं भाजपा से जुड़े लोगों का दावा था कि मोदी इंपैक्ट ने सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए हैं। बसपा के वोटों में जगह-जगह हुए बिखराव ने उन्हें मजबूत किया। बताते चलें कि राबटर्सगंज संसदीय सीट पर अब तक हुए चुनाव में 50 प्रतिशत से उपर का मतदान भाजपा के पक्ष में गया है, लेकिन इस बार सपा-बसपा दो नों एक साथ हैं। ऐसे में जीत किसे मिलेगी? इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।