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नाटक के जरिये किया प्रभावित
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डाला। अल्ट्रा टेक सीमेंट के जुलगुल माइंस में रविवार को एक सप्ताह तक चलने वाला खान पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण सप्ताह का समापन विभिन्न आयोजनों के साथ किया गया। इस दौरान अंध विश्वास पर आधारित लघु नाटक आकर्षण का केंद्र बना रहा। समापन पर जल है तो कल है, विषय पर गोष्ठी भी ह़ुई।
यहां मुख्य अतिथि सीमेंट फैक्ट्री के यूनिट हेड टीवी राव ने कहा कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए फैक्ट्री में 14 करोड़ की लागत वाले आधुनिक मशीनों को लगाया है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर फैक्ट्री ने दो हजार पौधे रोपे हैं। आने वाले दिनों में अनुपयोगी सामानों का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए होगा। जल संरक्षण के लिए फैक्ट्री परिक्षेत्र में जगह-जगह व्यवस्था की गई है। विद्युत की बचत को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पर्यावरण संतुलन को लेकर आसपास के आठ गांवों में पौधरोपण करने का निर्णय लिया गया है। खान पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण जबलपुर से आई टीम प्रमुख प्रकाश हुल्के ने कहा कि पेड़ है तो वर्षा है और वर्षा है तो जल है और जल है तो कल है। देश के विकास व जीवन जीने के लिए खनन जितना जरूरी है, उतना ही जीवन को सुरक्षित व स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण का संतुलन बना रहना आवश्यक है। यहां कामगारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम व लघु नाटिका प्रस्तुत किया। इस दौरान मनीष तोशनीवाल, मयूर बीडीके पांडेय, सैयद अब्दुल मन्नान, आर. चतुर्वेदी, डॉ. एसएस पंत, अतुल पांडेय मौजूद रहे।
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यहां मुख्य अतिथि सीमेंट फैक्ट्री के यूनिट हेड टीवी राव ने कहा कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए फैक्ट्री में 14 करोड़ की लागत वाले आधुनिक मशीनों को लगाया है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर फैक्ट्री ने दो हजार पौधे रोपे हैं। आने वाले दिनों में अनुपयोगी सामानों का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए होगा। जल संरक्षण के लिए फैक्ट्री परिक्षेत्र में जगह-जगह व्यवस्था की गई है। विद्युत की बचत को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पर्यावरण संतुलन को लेकर आसपास के आठ गांवों में पौधरोपण करने का निर्णय लिया गया है। खान पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण जबलपुर से आई टीम प्रमुख प्रकाश हुल्के ने कहा कि पेड़ है तो वर्षा है और वर्षा है तो जल है और जल है तो कल है। देश के विकास व जीवन जीने के लिए खनन जितना जरूरी है, उतना ही जीवन को सुरक्षित व स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण का संतुलन बना रहना आवश्यक है। यहां कामगारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम व लघु नाटिका प्रस्तुत किया। इस दौरान मनीष तोशनीवाल, मयूर बीडीके पांडेय, सैयद अब्दुल मन्नान, आर. चतुर्वेदी, डॉ. एसएस पंत, अतुल पांडेय मौजूद रहे।
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