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उत्पादन बढ़ते ही थर्मल बैकिंग का ग्रहण
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:35 PM IST
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सोनभद्र (अनपरा)। प्रदेश में विद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन में कुछ सुधार होने से भले ही लोगों ने राहत की सांस ली हो लेकिन उत्पादन बढ़ते ही थर्मल बैकिंग का ग्रहण भी लग गया। राज्य सरकार की पांच परियोजनाओं से जहां विद्युत उत्पादन 3443 मेगावाट हो रहा था वहीं 405 मेगावाट थर्मल बैकिंग भी करनी पड़ी। हालांकि शाम चार बजे थर्मल बैकिंग पर भी काफी हद तक कंट्रोल करने में कामयाबी मिली।
अनपरा तापीय परियोजना में एक पखवारे में कई यूनिटों के ट्रिप होने के बाद विद्युत उत्पादन में अब स्थिति सामान्य होने लगी है। अनपरा ही नहीं प्रदेश सरकार की अन्य चार परियोजनाओं में भी विद्युत उत्पादन में इजाफा हुआ है। गुरुवार को सुबह नौ बजे अनपरा परियोजना से 1761, ओबरा से 490, पनकी से 130, पारिछा से 714 व हरदुआगंज से 348 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। उत्पादन में सुधार होने के बावजूद इन परियोजनाओं से 405 मेगावाट थर्मल बैकिंग भी की जा रही थी। हालांकि थर्मल बैकिंग पर रोक लगाने में इंजीनियरों की टीम को शाम चार बजे कामयाबी मिली। उत्पादन बढ़ाने के साथ ही थर्मल बैकिंग को कंट्रोल करने में भी कामयाबी मिली। इस समय तक थर्मल बैकिंग 405 मेगावाट से घटकर 185 मेगावाट होने परियोजना प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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अनपरा तापीय परियोजना में एक पखवारे में कई यूनिटों के ट्रिप होने के बाद विद्युत उत्पादन में अब स्थिति सामान्य होने लगी है। अनपरा ही नहीं प्रदेश सरकार की अन्य चार परियोजनाओं में भी विद्युत उत्पादन में इजाफा हुआ है। गुरुवार को सुबह नौ बजे अनपरा परियोजना से 1761, ओबरा से 490, पनकी से 130, पारिछा से 714 व हरदुआगंज से 348 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। उत्पादन में सुधार होने के बावजूद इन परियोजनाओं से 405 मेगावाट थर्मल बैकिंग भी की जा रही थी। हालांकि थर्मल बैकिंग पर रोक लगाने में इंजीनियरों की टीम को शाम चार बजे कामयाबी मिली। उत्पादन बढ़ाने के साथ ही थर्मल बैकिंग को कंट्रोल करने में भी कामयाबी मिली। इस समय तक थर्मल बैकिंग 405 मेगावाट से घटकर 185 मेगावाट होने परियोजना प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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