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रजिस्टर तक सीमित है सफाई, ड्यूटी से गायब रहते हैं कर्मी
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सोनभद्र। जिला पंचायती राज विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की मनमानी से सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। जिले के अधिकतर गांवों में सफाई व्यवस्था महज कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। सड़क एवं गलियाें में कूड़ा करकट फैला हुआ है।
पंचायत एवं सामुदायिक भवनों पर तो झाड़ू ही नहीं लगता। कुछ सफाईकर्मी अधिकारियों की खिदमत में लगे रहते हैं। वहीं परिषदीय विद्यालयों में सफाई की जिम्मेदारी रसोइयों के कंधे पर है। जिले के 1441 राजस्व गांवों में साफ-सफाई करने के लिए 1426 सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है। कर्मियों के तैनात करने के पीछे सरकार की मंशा थी कि गांव गंदगी मुक्त होगा तो वहां पर निवास करने वालों को स्वच्छ हवा मिलेगी और वे स्वस्थ रहेंगे। लेकिन अधिकांश सफाईकर्मी कागजों पर ही ड्यूटी कर पगार ले रहे हैं। उनके क्षेत्र में अगर कोई मंत्री या अधिकारी जांच करने के लिए जाता है तो उनके जाने से पहले झाडू लग जाता है। नक्सल-दुरूह क्षेत्रों के गांवों में तैनात अधिकांश सफाई कर्मियों को वहां के रहवासी पहचानते तक नहीं है क्योंकि कर्मी कभी-कभार जाकर प्रधान समेत गिने-चुने कुछ लोगों से मिलकर वापस चले जाते हैं। कई सफाई कर्मियों ने दो से तीन हजार रुपये मानदेय पर बेरोजगार युवकों को कभी-कभार सफाई करने के लिए रखा है। लेकिन जांच करने पर प्रतिदिन कर्मी रजिस्टर में मौजूद रहते हैं। डीपीआरओ आरके भारती ने कहा कि सफाई कर्मियों के कार्यों की जांच होती रहती है। कार्य न करने वाले कर्मियों का वेतन रोकते हुए कार्यवाही की जाएगी।
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पंचायत एवं सामुदायिक भवनों पर तो झाड़ू ही नहीं लगता। कुछ सफाईकर्मी अधिकारियों की खिदमत में लगे रहते हैं। वहीं परिषदीय विद्यालयों में सफाई की जिम्मेदारी रसोइयों के कंधे पर है। जिले के 1441 राजस्व गांवों में साफ-सफाई करने के लिए 1426 सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है। कर्मियों के तैनात करने के पीछे सरकार की मंशा थी कि गांव गंदगी मुक्त होगा तो वहां पर निवास करने वालों को स्वच्छ हवा मिलेगी और वे स्वस्थ रहेंगे। लेकिन अधिकांश सफाईकर्मी कागजों पर ही ड्यूटी कर पगार ले रहे हैं। उनके क्षेत्र में अगर कोई मंत्री या अधिकारी जांच करने के लिए जाता है तो उनके जाने से पहले झाडू लग जाता है। नक्सल-दुरूह क्षेत्रों के गांवों में तैनात अधिकांश सफाई कर्मियों को वहां के रहवासी पहचानते तक नहीं है क्योंकि कर्मी कभी-कभार जाकर प्रधान समेत गिने-चुने कुछ लोगों से मिलकर वापस चले जाते हैं। कई सफाई कर्मियों ने दो से तीन हजार रुपये मानदेय पर बेरोजगार युवकों को कभी-कभार सफाई करने के लिए रखा है। लेकिन जांच करने पर प्रतिदिन कर्मी रजिस्टर में मौजूद रहते हैं। डीपीआरओ आरके भारती ने कहा कि सफाई कर्मियों के कार्यों की जांच होती रहती है। कार्य न करने वाले कर्मियों का वेतन रोकते हुए कार्यवाही की जाएगी।
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