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उत्सर्जित राख से बनेगी ईंट, लगेगी चार मशीनें
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:16 PM IST
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सोनभद्र। जिले के औद्योगिक कंपनियों से उत्सर्जित होने वाली राख (फ्लाई ऐश) से अब जिला प्रशासन ईंट का निर्माण कराएगा। इससे प्रदूषण से निजात के साथ ही महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। ईंट निर्माण के लिए चार मशीनें खरीदी जाएगी। सीएसआर मद से दो मशीनों की खरीद का आर्डर ओबरा तापीय परियोजना प्रशासन ने दे दिया है। दो मशीन जिला खनिज निधि से खरीदी जाएगी। यह मशीनें डाला, सलखन और कुलडोमरी ग्राम पंचायतों में लगेंगी। इसको लेकर स्वीकृति मिल चुकी है।
सोनभद्र औद्योगिक नगरी के रूप में भी विख्यात है। यहां एल्युमीनियम उत्पादन के साथ ही तापीय परियोजनाओं से बिजली भी बनती है। जिले में कई औद्योगिक कंपनियां हैं जिनसे राख उत्सर्जित होती है। यह राख आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषित करती है। इससे तमाम तरह की बीमारियां होने की भी आशंका बनी रहती है। अब प्रशासन ने इन उत्सर्जित राखों का सदुपयोग करने का निर्णय लिया है। प्रशासन राख से ईंट बनवाएगा। उसे सरकारी योजनाओं में प्रयोग में लाया जाएगा। ईंट फैक्ट्री स्थापित करने के लिए म्योरपुर ब्लॉक के कुलडोमरी, राबर्ट्सगंज ब्लॉक के सलखन और चोपन ब्लॉक के कोटा ग्राम पंचायत का चयन हुआ है।
प्रत्येक प्लांट में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी समूह की महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि सीएसआर मद से ओबरा तापीय परियोजना प्रशासन ने दो मशीन खरीदने के लिए आर्डर दे दिया है। दो मशीन जिला खनिज निधि के धन से खरीदी जाएगी। फैक्ट्री स्थापित करने में अन्य खर्च करीब दस लाख रुपये आएंगे जो खनिज निधि मद से दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जुलाई माह से ईंट फैक्ट्री चालू कर दी जाएगी। प्रत्येक मशीन से एक घंटे में 1600 ईंट का निर्माण होगा। दो शिफ्टों में महिलाओं को ईंट निर्माण के लिए लगाया जाएगा। जिलाधिकारी ने ईंट फैक्ट्री स्थापित करने के लिए अनुमति दे दी है।
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बाजार मूल्य से कम होगा ईंटों का निर्माण
सोनभद्र। सीडीओ सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि फ्लाई ऐश (राख) से ईंट का निर्माण कराने में बाजार से दो रुपये कम लागत आएगी। इससे काफी फायदा होगा। इन ईटों का प्रयोग शौचालय, आवास निर्माण में होगा। विद्यालयों में होने वाले कार्यों में भी यही ईंट लगाई जाएगी। इससे कम लागत पर अच्छी किस्म के निर्मित ईंट का प्रयोग सरकारी योजनाओं में होगा, ताकि कार्य की गुणवत्ता बनी रहे। एक मशीन की लागत दस लाख रुपये है।
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सोनभद्र औद्योगिक नगरी के रूप में भी विख्यात है। यहां एल्युमीनियम उत्पादन के साथ ही तापीय परियोजनाओं से बिजली भी बनती है। जिले में कई औद्योगिक कंपनियां हैं जिनसे राख उत्सर्जित होती है। यह राख आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषित करती है। इससे तमाम तरह की बीमारियां होने की भी आशंका बनी रहती है। अब प्रशासन ने इन उत्सर्जित राखों का सदुपयोग करने का निर्णय लिया है। प्रशासन राख से ईंट बनवाएगा। उसे सरकारी योजनाओं में प्रयोग में लाया जाएगा। ईंट फैक्ट्री स्थापित करने के लिए म्योरपुर ब्लॉक के कुलडोमरी, राबर्ट्सगंज ब्लॉक के सलखन और चोपन ब्लॉक के कोटा ग्राम पंचायत का चयन हुआ है।
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प्रत्येक प्लांट में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी समूह की महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि सीएसआर मद से ओबरा तापीय परियोजना प्रशासन ने दो मशीन खरीदने के लिए आर्डर दे दिया है। दो मशीन जिला खनिज निधि के धन से खरीदी जाएगी। फैक्ट्री स्थापित करने में अन्य खर्च करीब दस लाख रुपये आएंगे जो खनिज निधि मद से दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जुलाई माह से ईंट फैक्ट्री चालू कर दी जाएगी। प्रत्येक मशीन से एक घंटे में 1600 ईंट का निर्माण होगा। दो शिफ्टों में महिलाओं को ईंट निर्माण के लिए लगाया जाएगा। जिलाधिकारी ने ईंट फैक्ट्री स्थापित करने के लिए अनुमति दे दी है।
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बाजार मूल्य से कम होगा ईंटों का निर्माण
सोनभद्र। सीडीओ सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि फ्लाई ऐश (राख) से ईंट का निर्माण कराने में बाजार से दो रुपये कम लागत आएगी। इससे काफी फायदा होगा। इन ईटों का प्रयोग शौचालय, आवास निर्माण में होगा। विद्यालयों में होने वाले कार्यों में भी यही ईंट लगाई जाएगी। इससे कम लागत पर अच्छी किस्म के निर्मित ईंट का प्रयोग सरकारी योजनाओं में होगा, ताकि कार्य की गुणवत्ता बनी रहे। एक मशीन की लागत दस लाख रुपये है।