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घरों में भरा पानी, मचान पर गुजार रहे जिंदगानी
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सीतापुर के बहराइच सीमा के बरुवा बेहड़ गांव में बैलगाडी पर शरण लिए ग्रामीण ।
- फोटो : SITAPUR
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रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। गांजर इलाके में सरयू और शारदा नदियों सहित बैराजों के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान मामूली गिरावट भले ही दर्ज की गई हो, लेकिन बाढ़ क्षेत्र के बाशिंदों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बाढ़ग्रस्त करीब 95 गांवों की 70 हजार आबादी के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने व खाने की है। प्रशासन की टीमें खाने व अन्य जरूरी चीजों का वितरण जरूरतमंदों को कर रही हैं। लेकिन यह मदद ऊंची जगहों पर शरण लिए अथवा करीब के गांवों तक सीमित है। उधर, सरयू नदी के पार जिला बहराइच की सीमा में बसा बरुवा बेहड़ गांव बुरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। ग्रामीणों के घरों में पानी भरा होने से वह मचान, बैलगाड़ी, छतों और चारपाई पर शरण लेने को विवश हैं।
पानी घटने के बाद भी सरयू का जलस्तर रविवार को 119.30 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 30 सेमीं ऊपर है। उधर, बैराजों से रविवार को लगभग चार लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। ब्लॉक रेउसा में सरयू नदी के उफनाने से लगभग 55 गांवों की 40 हजार आबादी प्रभावित है। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने और खाने की है। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित 40 गांवों के अधिकतर ग्रामीण पानी घटने के बाद भी दुश्वारियों से जूझ रहे हैं। कई सड़कें कटान की जद में आ गई हैं।
एसडीएम महमूदाबाद गिरीश झा ने बताया पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। उधर, सरयू नदी के पार जिला बहराइच की सीमा में बसा बरुवा बेहड़ गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ग्रामीणों के घरों में पानी भरा होने से वह मचान, बैलगाड़ी, छतों और चारपाई पर शरण लेने को विवश हैं। करीब दो हजार आबादी के सामने पेट भरने का संकट है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक कोई प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची है।
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डीएम बहराइच शंभु कुमार से बात करने पर उन्होंने गेंद एसडीएम महसी के पाले में डालते हुए कहा कि एसडीएम से बात करो। तहसीलदार लहरपुर मदन मोहन वर्मा व नायब तहसीलदार दिलीप कुमार ने रविवार को बाढ़ प्रभावित गांव नकहा पहुंचकर पीड़ितों को तिरपाल व किरोसिन मुहैया करवाया। वहीं, सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने अपने क्षेत्र के रामपुर मथुरा व रेउसा विकास खंडों में बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया।
रात में सोना पड़ता है भूखे
प्रशासन की ओर से लंच पैकेट दिए जा रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त साबित नहीं हो रहे। परिवार में 10 लोग हैं, सबको पैकेट नहीं मिल पाता। जबकि रात में भूखे ही सोना पड़ता है।
रामशरण, बाढ़ पीड़ित
संक्रामक रोग फैलने की आशंका
गांव में हर तरफ पानी भरा होने से संक्रामक रोग पनपने की संभावना प्रबल है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई है। यदि बीमारियां फैली तो हालात बेहद खराब हो सकते हैं।
संतोष यादव, बाढ़ पीड़ित
रहने-खाने की दिक्कत, मदद नाकाफी
नदी का पानी जरूर घटा है, लेकिन जो गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, वहां लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। रहने-खाने तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। मदद नाकाफी है।
कुशमेश भार्गव, बाढ़ पीड़ित
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पानी घटने के बाद भी सरयू का जलस्तर रविवार को 119.30 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 30 सेमीं ऊपर है। उधर, बैराजों से रविवार को लगभग चार लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। ब्लॉक रेउसा में सरयू नदी के उफनाने से लगभग 55 गांवों की 40 हजार आबादी प्रभावित है। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने और खाने की है। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित 40 गांवों के अधिकतर ग्रामीण पानी घटने के बाद भी दुश्वारियों से जूझ रहे हैं। कई सड़कें कटान की जद में आ गई हैं।
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एसडीएम महमूदाबाद गिरीश झा ने बताया पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। उधर, सरयू नदी के पार जिला बहराइच की सीमा में बसा बरुवा बेहड़ गांव बाढ़ की चपेट में हैं। ग्रामीणों के घरों में पानी भरा होने से वह मचान, बैलगाड़ी, छतों और चारपाई पर शरण लेने को विवश हैं। करीब दो हजार आबादी के सामने पेट भरने का संकट है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक कोई प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची है।
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डीएम बहराइच शंभु कुमार से बात करने पर उन्होंने गेंद एसडीएम महसी के पाले में डालते हुए कहा कि एसडीएम से बात करो। तहसीलदार लहरपुर मदन मोहन वर्मा व नायब तहसीलदार दिलीप कुमार ने रविवार को बाढ़ प्रभावित गांव नकहा पहुंचकर पीड़ितों को तिरपाल व किरोसिन मुहैया करवाया। वहीं, सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने अपने क्षेत्र के रामपुर मथुरा व रेउसा विकास खंडों में बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया।
रात में सोना पड़ता है भूखे
प्रशासन की ओर से लंच पैकेट दिए जा रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त साबित नहीं हो रहे। परिवार में 10 लोग हैं, सबको पैकेट नहीं मिल पाता। जबकि रात में भूखे ही सोना पड़ता है।
रामशरण, बाढ़ पीड़ित
संक्रामक रोग फैलने की आशंका
गांव में हर तरफ पानी भरा होने से संक्रामक रोग पनपने की संभावना प्रबल है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई है। यदि बीमारियां फैली तो हालात बेहद खराब हो सकते हैं।
संतोष यादव, बाढ़ पीड़ित
रहने-खाने की दिक्कत, मदद नाकाफी
नदी का पानी जरूर घटा है, लेकिन जो गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, वहां लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। रहने-खाने तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। मदद नाकाफी है।
कुशमेश भार्गव, बाढ़ पीड़ित