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सीतापुर: शासनादेश की आड़ में विरोधियों को लगा रहे ठिकाने

Tue, 14 Feb 2023 12:41 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2023 12:41 AM IST
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Under the guise of mandate, hideouts are being set up for opponents
सीतापुर। भ्रष्टाचार खत्म करने के मकसद से जारी हुए शासनादेश की आड़ में विरोधियों को ठिकाने लगाने की कवायद हो रही है। परसेंडी विकास खंड में गलत तथ्य दिखाकर चार फर्मों को मनरेगा की वेंडर्स लिस्ट से डिलीट कराने के आदेश जारी करा दिए गए।
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अब अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि परसेंडी विकास खंड से डिलीट कराई गई सात फर्मों में से चार फर्में ऐसी थीं जो पूरी तरह वैध थीं, लेकिन गलत तथ्य दिखाकर इन पर कार्रवाई करा दी गई। 21 मार्च 2022 को ग्राम्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव ने एक शासनादेश जारी किया था। इस शासनादेश में स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी पंचायत प्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी या इनके रिश्तेदारों की किसी भी फर्म को सरकारी कार्य न दिए जाएं।
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इनकी फर्मों से न तो सामग्री की आपूर्ति ली जाए और न ही भुगतान किया जाए। लंबे समय तक यह शासनादेश जिले के आलाधिकारियों की फाइलों में बंद रहा। अमर उजाला ने मामला उठाया, तो अफसर हरकत में आए और ऐसी फर्मों को चिंहित कर कार्रवाई का दौर शुरू किया गया। पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और इनके रिश्तेदारों की फर्मों को मनरेगा की वेंडर्स लिस्ट से भी हटाए जाने की कवायद शुरू हो गई।
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अब इसी शासनादेश की आड़ में कुछ लोग अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को ठिकाने लगाने में जुटे हैं। परसेंडी विकास खंड से खंड विकास अधिकारी ने मनरेगा उपायुक्त को पत्र भेजकर सात फर्मों की सूची उपलब्ध कराई। इन फर्मों को पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों की फर्म बताकर वेंडर्स लिस्ट से डिलीट करने को लिखा गया।

मनरेगा उपायुक्त ने बीडीओ की आख्या पर रिपोर्ट डीएम को भेज दी और डीएम ने संबंधित सात फर्मों को वेंडर्स लिस्ट से हटाने के लिए ग्राम्य विकास आयुक्त को पत्र भेज दिया। अमर उजाला ने लिस्ट में शामिल फर्मों की पड़ताल की, तो हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई।

... और यह निकली हकीकत
- एमएस शुक्ला ट्रेडर्स के प्रॉपराइटर धीरेंद्र शुक्ला हैं। खुद या इनका कोई रिश्तेदार न तो पंचायत प्रतिनिधि और न सरकारी कर्मचारी।
- मंगलम ट्रेडर्स फर्म को भी डिलीट करने के आदेश हुए हैं। इसके प्रॉपराइटर देशराज हैं। देशराज और उनके परिजन न तो सरकारी कर्मचारी है और न ही पंचायत प्रतिनिधि।
- ठाकुर ट्रेडर्स के प्रॉपराइटर सतीश वर्मा हैं। सतीश के परिवार में भी न तो कोई पंचायत प्रतिनिधि है और न ही सरकारी कर्मचारी।
- जय बाला जी प्रॉपराइटर डीपी सिंह हैं। डीपी सिंह पूर्व में पंचायत की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। मौजूदा समय में न तो वह और न ही उनका कोई परिजन पंचायत प्रतिनिधि है, लेकिन उनकी फर्म को भी डिलीट कराने का आदेश कर दिया गया।


मनरेगा उपायुक्त की आख्या के आधार पर कार्रवाई की गई है। गलत आख्या दी गई। खंड विकास अधिकारी और मनरेगा उपायुक्त से भी जवाब तलब किया जाएगा। शासनादेश से इतर कोई भी फर्म वेंडर्स लिस्ट से डिलीट नहीं होगी। पूरे मामले की जांच करा लेंगे।
अनुज सिंह, डीएम
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