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खतरों से अनजान, स्कूल बस में जोखिम में जान
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विजय लक्ष्मी नगर स्थित एक प्राइवेट स्कूल के बाहर बस में बैठा स्कूली छात्र सड़क पर निकल रहा चौपहिय
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। विजयलक्ष्मी मोहल्ले में एनसीसी ऑफिस से कुछ दूर शनिवार दोपहर एक बजे स्कूल में छुट्टी हुई। बच्चे सरपट दौड़कर बस में चढ़ गए। बस में मानकविहीन तरीके से जाली लगी हुई थी। एक नटखट बच्चे ने सिर खिड़की से बाहर निकाल लिया। पड़ोस से गुजर रहे एक चार पहिया वाहन की छत को छूने का प्रयास कर रहा था।
स्कूल वाहनों की यह लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद भी इनको रोकने के लिए न तो स्कूल प्रशासन सजग दिखा न ही परिवहन विभाग के अफसर इस पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
डेढ़ बजे बहुगुणा चौराहा के पास एक स्कूल बस गुजर रही थी। एक बच्चा सिर को बाहर निकाले था। पड़ोस से अन्य वाहन फर्राटा भरते हुए निकल रहे थे। इस मार्ग से भारी वाहन भी गुजर रहे थे। इस तरह लापरवाही भरे दृश्य शनिवार को स्कूलों में छुट्टी होने के बाद शहर में दिखाई दिए। आठ सीटर वाहनों में 14 से 15 बच्चे सफर कर रहे थे।
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तीन दिन पहले गाजियाबाद में एक स्कूल वाहन के प्रबंधक की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद शनिवार को अमर उजाला टीम ने शहर में स्कूल बसों की रियलटी परखी। हालात कुछ गाजियाबाद जैसे ही दिखाई दिए। शहर में अधिसंख्य स्कूली बसे मानकों को पूर्ण नहीं कर रही है। किसी में जाली नहीं लगी थी। इससे इन बसों में सफर कर रहे बच्चे आराम से अपना सिर बाहर निकालकर मस्ती कर रहे थे।
इसी तरह स्कूली वैन के भी हालात दिखाई दिए। आर्यनगर के एक वीआईपी स्कूल में करीब डेढ़ बजे एक स्कूली वैन बाहर खड़ी हुई नजर आई। आगे के सीट पर एक बच्चा बैठा हुआ था। वह बाहर देख रहा था। खिड़की के पास जाली लगी होनी चाहिए थी। इसी तरह तमाम स्कूली वाहन शहर की सड़कों पर फर्राटा भरते हुए नजर आए। इन मानकविहीन वाहनों के खिलाफ जिम्मेदार तभी कार्रवाई करता है, जब किसी जनपद में ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। स्कूली वाहनों की यह लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसके लिए न तो स्कूल प्रशासन सख्त दिख रहा है न ही परिवहन विभाग संजीदा है। ऐसे में स्कूल वाहन से सफर करने वाले नौनिहालों की जान हर समय सांसत में बनी रहती है।
आटो, ई-रिक्शा भी कम नहीं जिम्मेदार
स्कूल वाहन पंजीकृत होने के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शहर में तमाम ई-रिक्शा व ऑटो भी बच्चों को स्कूल पहुंचने का जिम्मा उठाए हुए है। यह न तो पंजीकृत है न ही निर्धारित सवारी बैठा रहे है। ई-रिक्शा चालक 10 से 15 बच्चे तक बैठाकर सफर कर रहे है। इनकी यह लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ सकती है।
चार विद्यार्थी एक बाइक पर भर रहे फर्राटा
एक तरफ स्कूली वाहन नियमों की ताक पर रखकर मुनाफा कमा रहे है तो वहीं विद्यार्थी भी यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है। विजयलक्ष्मी नगर में एक विद्यालय में छुट्टी होने के बाद एक बाइक पर चार विद्यार्थी बैठकर गुजरते हुए दिखाई दिए। वे बाइक काफी तेज चला रहे थे। विद्यार्थियों की नियमों की यह अनदेखी जिनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जैसी प्रतीत हो रही थी।
पंजीकृत वाहनों से ही भेंजे
स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान समय-समय पर चलाकर चेक किया जाता है। अभिभावकों से अपील है कि वह अपने बच्चों को पंजीकृत वाहनों से ही भेजे। जिस वाहन से भेज रहे हैं उसके मानक जरूर चेक कर लें। अगर तादात से अधिक बच्चे बैठे हैं तो स्कूल प्रशासन व उनसे भी शिकायत कर सकते हैं।
- माला बाजपेयी, एआरटीओ प्रशासन
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स्कूल वाहनों की यह लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद भी इनको रोकने के लिए न तो स्कूल प्रशासन सजग दिखा न ही परिवहन विभाग के अफसर इस पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
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डेढ़ बजे बहुगुणा चौराहा के पास एक स्कूल बस गुजर रही थी। एक बच्चा सिर को बाहर निकाले था। पड़ोस से अन्य वाहन फर्राटा भरते हुए निकल रहे थे। इस मार्ग से भारी वाहन भी गुजर रहे थे। इस तरह लापरवाही भरे दृश्य शनिवार को स्कूलों में छुट्टी होने के बाद शहर में दिखाई दिए। आठ सीटर वाहनों में 14 से 15 बच्चे सफर कर रहे थे।
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तीन दिन पहले गाजियाबाद में एक स्कूल वाहन के प्रबंधक की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद शनिवार को अमर उजाला टीम ने शहर में स्कूल बसों की रियलटी परखी। हालात कुछ गाजियाबाद जैसे ही दिखाई दिए। शहर में अधिसंख्य स्कूली बसे मानकों को पूर्ण नहीं कर रही है। किसी में जाली नहीं लगी थी। इससे इन बसों में सफर कर रहे बच्चे आराम से अपना सिर बाहर निकालकर मस्ती कर रहे थे।
इसी तरह स्कूली वैन के भी हालात दिखाई दिए। आर्यनगर के एक वीआईपी स्कूल में करीब डेढ़ बजे एक स्कूली वैन बाहर खड़ी हुई नजर आई। आगे के सीट पर एक बच्चा बैठा हुआ था। वह बाहर देख रहा था। खिड़की के पास जाली लगी होनी चाहिए थी। इसी तरह तमाम स्कूली वाहन शहर की सड़कों पर फर्राटा भरते हुए नजर आए। इन मानकविहीन वाहनों के खिलाफ जिम्मेदार तभी कार्रवाई करता है, जब किसी जनपद में ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। स्कूली वाहनों की यह लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसके लिए न तो स्कूल प्रशासन सख्त दिख रहा है न ही परिवहन विभाग संजीदा है। ऐसे में स्कूल वाहन से सफर करने वाले नौनिहालों की जान हर समय सांसत में बनी रहती है।
आटो, ई-रिक्शा भी कम नहीं जिम्मेदार
स्कूल वाहन पंजीकृत होने के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शहर में तमाम ई-रिक्शा व ऑटो भी बच्चों को स्कूल पहुंचने का जिम्मा उठाए हुए है। यह न तो पंजीकृत है न ही निर्धारित सवारी बैठा रहे है। ई-रिक्शा चालक 10 से 15 बच्चे तक बैठाकर सफर कर रहे है। इनकी यह लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ सकती है।
चार विद्यार्थी एक बाइक पर भर रहे फर्राटा
एक तरफ स्कूली वाहन नियमों की ताक पर रखकर मुनाफा कमा रहे है तो वहीं विद्यार्थी भी यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है। विजयलक्ष्मी नगर में एक विद्यालय में छुट्टी होने के बाद एक बाइक पर चार विद्यार्थी बैठकर गुजरते हुए दिखाई दिए। वे बाइक काफी तेज चला रहे थे। विद्यार्थियों की नियमों की यह अनदेखी जिनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जैसी प्रतीत हो रही थी।
पंजीकृत वाहनों से ही भेंजे
स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान समय-समय पर चलाकर चेक किया जाता है। अभिभावकों से अपील है कि वह अपने बच्चों को पंजीकृत वाहनों से ही भेजे। जिस वाहन से भेज रहे हैं उसके मानक जरूर चेक कर लें। अगर तादात से अधिक बच्चे बैठे हैं तो स्कूल प्रशासन व उनसे भी शिकायत कर सकते हैं।
- माला बाजपेयी, एआरटीओ प्रशासन