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डफरिन में अल्ट्रासाउंड ठप, गर्भवती परेशान

Wed, 13 Apr 2022 12:09 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Apr 2022 12:09 AM IST
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Ultrasound stalled in Dufferin, pregnant upset
जिला महिला अस्पताल में बैठी महिलाएं। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिला महिला अस्पताल (डफरिन) में गर्भवतियों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। एक गर्भवती को प्रसव होने तक करीब दो हजार रुपये सिर्फ जांच के नाम पर खर्च करने पड़ रहे हैं। अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा बंद है। ऐसे में गर्भवती बाहर से जांच करवाती हैं। एक बार में उन्हें करीब 650 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। उन्हें सकुशल प्रसव के लिए तीन बार जांच करवानी होती है। इससे गर्भवती को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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रोजाना अस्पताल से 50 से अधिक महिलाएं बिना जांच के लौट रही हैं। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हुई है लेकिन मशीन को चलाने वाले चिकित्सक का पद काफी समय से रिक्त है। जिला अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। यहां पर तैनात चिकित्सक को ही जिला महिला अस्पताल का चार्ज दिया गया था। लेकिन जिला अस्पताल में ही काफी अधिक भार होने की वजह से उन्होंने महिला अस्पताल का भार लेने से मना कर दिया। इसकी वजह से महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा बंद चल रही है। इसकी वजह से सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती को आती है।
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चिकित्सकों का कहना है कि गर्भवती को प्रसव होने तक तीन बार जांच करवाने की जरूरत पड़ती है। एक बार जांच करवाने के लिए प्राइवेट तौर पर करीब 650 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इससे एक प्रसूता पर करीब दो हजार का अतिरिक्त भार आ रहा है। रोजाना 50 से अधिक प्रसूता बिना जांच के लिए लौट जाती हैं। वह अस्पताल के बाहर से जांच करवाती है। इससे प्रसूताओं को काफी अधिक दिक्कतें आ रही है।
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ओपीडी में आती हैं रोजाना चार सौ महिलाएं
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 400 से 450 तक महिलाएं आती हैं। गर्भवती के अलावा तमाम ऐसी महिलाएं हैं जिनको विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती हैं। इन महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड जांच करवाने की सलाह दी जाती हैं। ऐसे में यह महिलाएं भी बाहर से जांच करवाकर अपना इलाज करवाती है।
अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भीड़
जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा बंद होने से महिलाएं बाहर से जांच करवाती है। इससे अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड केंद्र खूब मलाई काट रहे हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल की कुछ महिला चिकित्सक किस केंद्र से जांच करवाना है, यह तक सलाह दे देती हैं। अगर उस केंद्र से जांच नहीं करवाते हैं तो वह रिपोर्ट मानने से इंकार कर देती हैं।

अस्पताल में सोनोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा बंद है। शासन को कई बार चिकित्सक की तैनाती को लेकर पत्र लिखा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द अस्पताल में सुविधा शुरू हो जाएगी।
- डॉ. सुषमा कर्णवाल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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