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चार विधायकों का कट सकता है टिकट
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सीतापुर। विधानसभा चुनाव में भले अभी कुछ समय है, लेकिन भाजपा ने यूपी फतह करने के मिशन को तेज कर दिया है। अंदरखाने पार्टी में प्रत्याशियों के चयन की कवायद तेज हो गई है। सरकार बनने के बाद अब तक कार्यकाल के आधार पर जिले के विधायकों का रिपोर्ट कार्ड खंगालने का काम पार्टी ने शुरू कर दिया है। गोपनीय तरीके से सर्वे भी कराया जा रहा है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि जिले के चार विधायकों का टिकट कट सकता है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस तरह के मिल रहे संकेतों ने विधायकों की बेचैनी बढ़ा दी है।
सीतापुर जिले में नौ विधानसभाएं हैं। 2017 में विधानसभा चुनाव में सात सीटों पर भाजपा, एक-एक सीट पर सपा और बसपा का खाता खुला था, लेकिन सरकार बनने के कुछ समय बाद ही नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक राकेश राठौर ने पार्टी से किनारा कर लिया था। अभी हाल ही में वह पार्टी छोड़कर सपा का दामन थाम चुके हैं।
वहीं, सिधौली से बसपा विधायक डॉ. हरगोविंद भार्गव भी हाथी की सवारी छोड़कर साइकिल पर पिछले दिनों सवार हो चुुके हैं। 2017 में भाजपा के जीते सात विधायकों में नगर विधायक के सपा में जाने के बाद अब छह विधायक भारतीय जनता पार्टी में हैं।
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कुछ महीनों बाद 2022 विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 2017 में सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके इन विधायकों के कार्यकाल के आधार रिपोर्ट कार्ड खंगलवाना शुरू कर दिया है। कार्यकाल के आधार पर रिपोर्ट बनेगी। सर्वे भी कराया जा रहा है। कुछ का हो भी चुका है। कुछ का होना है।
इसको लेकर कई तरह के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। जिले के चार विधायकों के टिकट कटने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में विधायकों की बेचैनी बढ़नी लाजिमी है। हालांकि, अभी इसको लेकर पार्टी का कोई भी जिम्मेदार कुछ भी बोलने से साफ बच रहा है। किसका टिकट कटेगा, किसका बचेगा, इस पर सभी चुप हैं।
मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों का कटेगा टिकट
पार्टी से जुड़े सूत्रों की माने तो शीर्ष नेतृत्व की ओर से विधायकों को संदेश पहुंचाया जा रहा है कि कोई भी अपना टिकट पक्का न समझे। पार्टी के मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों का टिकट काटा जा सकता है। पार्टी जिस सीट पर जिसे फिट समझेगी, उसे टिकट देगी। संगठन की होने वाली बैठकों में भी इसकी सुगबुगाहट देखने को मिल रही है।
विधायकों का फीडबैक ले रही पार्टी
सूत्रों की माने तो पार्टी जिले के सभी विधायकों के काम के साथ ही उनकी निष्ठा की जानकारी भी गोपनीय तरीके से जुटा रही है। पार्टी विरोधी गतिविधियों की जानकारी के लिए स्थानीय नेताओं से फीडबैक ले रही है। पिछले साढ़े चार साल से अधिक के कार्यकाल में विधायकों की क्षेत्र में कितनी गतिविधियां रहीं, कितने सक्रिय रहे, पार्टी की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराने के लिए क्या-क्या किया... आदि बिन्दुओं पर भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जातीय समीकरण पर भी नजर
इस बार 2022 का चुनावी रण रोमांचक होने वाला है। इसके संकेत अभी से मिलने लगे हैं। सूत्रों की माने तो ऐसे में पार्टी की नजर जातीय समीकरण पर रहेगी। विपक्षी दल किस सीट पर किस जाति के प्रत्याशी को उतार रहे हैं, कहां पर कौन जाति कार्ड खेलकर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगा, भाजपा भी उसी हिसाब से जातीय समीकरण को साधते हुए उस सीट पर प्रत्याशी को उतारेगी।
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सीतापुर जिले में नौ विधानसभाएं हैं। 2017 में विधानसभा चुनाव में सात सीटों पर भाजपा, एक-एक सीट पर सपा और बसपा का खाता खुला था, लेकिन सरकार बनने के कुछ समय बाद ही नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक राकेश राठौर ने पार्टी से किनारा कर लिया था। अभी हाल ही में वह पार्टी छोड़कर सपा का दामन थाम चुके हैं।
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वहीं, सिधौली से बसपा विधायक डॉ. हरगोविंद भार्गव भी हाथी की सवारी छोड़कर साइकिल पर पिछले दिनों सवार हो चुुके हैं। 2017 में भाजपा के जीते सात विधायकों में नगर विधायक के सपा में जाने के बाद अब छह विधायक भारतीय जनता पार्टी में हैं।
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कुछ महीनों बाद 2022 विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 2017 में सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके इन विधायकों के कार्यकाल के आधार रिपोर्ट कार्ड खंगलवाना शुरू कर दिया है। कार्यकाल के आधार पर रिपोर्ट बनेगी। सर्वे भी कराया जा रहा है। कुछ का हो भी चुका है। कुछ का होना है।
इसको लेकर कई तरह के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। जिले के चार विधायकों के टिकट कटने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में विधायकों की बेचैनी बढ़नी लाजिमी है। हालांकि, अभी इसको लेकर पार्टी का कोई भी जिम्मेदार कुछ भी बोलने से साफ बच रहा है। किसका टिकट कटेगा, किसका बचेगा, इस पर सभी चुप हैं।
मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों का कटेगा टिकट
पार्टी से जुड़े सूत्रों की माने तो शीर्ष नेतृत्व की ओर से विधायकों को संदेश पहुंचाया जा रहा है कि कोई भी अपना टिकट पक्का न समझे। पार्टी के मानकों पर खरा नहीं उतरने वालों का टिकट काटा जा सकता है। पार्टी जिस सीट पर जिसे फिट समझेगी, उसे टिकट देगी। संगठन की होने वाली बैठकों में भी इसकी सुगबुगाहट देखने को मिल रही है।
विधायकों का फीडबैक ले रही पार्टी
सूत्रों की माने तो पार्टी जिले के सभी विधायकों के काम के साथ ही उनकी निष्ठा की जानकारी भी गोपनीय तरीके से जुटा रही है। पार्टी विरोधी गतिविधियों की जानकारी के लिए स्थानीय नेताओं से फीडबैक ले रही है। पिछले साढ़े चार साल से अधिक के कार्यकाल में विधायकों की क्षेत्र में कितनी गतिविधियां रहीं, कितने सक्रिय रहे, पार्टी की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराने के लिए क्या-क्या किया... आदि बिन्दुओं पर भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जातीय समीकरण पर भी नजर
इस बार 2022 का चुनावी रण रोमांचक होने वाला है। इसके संकेत अभी से मिलने लगे हैं। सूत्रों की माने तो ऐसे में पार्टी की नजर जातीय समीकरण पर रहेगी। विपक्षी दल किस सीट पर किस जाति के प्रत्याशी को उतार रहे हैं, कहां पर कौन जाति कार्ड खेलकर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगा, भाजपा भी उसी हिसाब से जातीय समीकरण को साधते हुए उस सीट पर प्रत्याशी को उतारेगी।