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Sitapur News: सतुवाई अमावस्या पर तीन लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
Mon, 28 Apr 2025 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 28 Apr 2025 12:23 AM IST
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। वैशाख मास की सतुवाई अमावस्या पर नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं की आस्था की भीड़ उमड़ी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विभिन्न मठ-मंदिरों में दर्शन पूजन कर पुण्य कमाया। सत्तू दान करके पुजारियों का आशीर्वाद लिया।
चक्रतीर्थ और गोमती में रविवार भोर से ही स्थानीय व गैर जनपदों से आए श्रद्धालुओं ने स्नान, पूजन, दान कर्म शुरू कर दिया था। अमावस्या पर सत्तू दान का विशेष महत्व है। जिसके चलते श्रद्धालुओं ने स्नान दर्शन के बाद परंपरा के अनुसार सतुवा का दान किया। अमावस्या पर भक्तों ने पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध आदि पितृकर्म भी किए। श्रद्धालुओं ने चक्रकुंड से लेकर गोमती में स्नान किया।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने आदि शक्ति मां ललिता देवी मंदिर, सूत गद्दी, देव-देवेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, देवपुरी आदि मंदिरों में जाकर माथा टेका और पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगी। सतुवाई अमावस्या पर मांग को देखते हुए नैमिष में जौ का सत्तू 100 रुपये प्रति किलो व चने का सत्तू 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिका। श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
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अब दान में नहीं मिलता सत्तू
तीर्थ पुरोहित सुशील दीक्षित ने बताया पहले की तरह अब सतुवाई अमावस्या पर दान में बहुत कम ही सत्तू मिलता है। पहले 10 किलो तक सत्तू मिल जाता था ,मगर अब 2 से 3 किलो ही सत्तू मिल पाता है। मौजूदा समय में सत्तू महंगा होने की वजह से लोग अब कम ही दान करते हैं। अब या सतुवाई अमावस्या सिर्फ नाम के लिए रह गई है।
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चक्रतीर्थ और गोमती में रविवार भोर से ही स्थानीय व गैर जनपदों से आए श्रद्धालुओं ने स्नान, पूजन, दान कर्म शुरू कर दिया था। अमावस्या पर सत्तू दान का विशेष महत्व है। जिसके चलते श्रद्धालुओं ने स्नान दर्शन के बाद परंपरा के अनुसार सतुवा का दान किया। अमावस्या पर भक्तों ने पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध आदि पितृकर्म भी किए। श्रद्धालुओं ने चक्रकुंड से लेकर गोमती में स्नान किया।
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इसके बाद श्रद्धालुओं ने आदि शक्ति मां ललिता देवी मंदिर, सूत गद्दी, देव-देवेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी, देवपुरी आदि मंदिरों में जाकर माथा टेका और पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगी। सतुवाई अमावस्या पर मांग को देखते हुए नैमिष में जौ का सत्तू 100 रुपये प्रति किलो व चने का सत्तू 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिका। श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
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अब दान में नहीं मिलता सत्तू
तीर्थ पुरोहित सुशील दीक्षित ने बताया पहले की तरह अब सतुवाई अमावस्या पर दान में बहुत कम ही सत्तू मिलता है। पहले 10 किलो तक सत्तू मिल जाता था ,मगर अब 2 से 3 किलो ही सत्तू मिल पाता है। मौजूदा समय में सत्तू महंगा होने की वजह से लोग अब कम ही दान करते हैं। अब या सतुवाई अमावस्या सिर्फ नाम के लिए रह गई है।