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Sitapur News: जिला अस्पताल में तीन घंटे गुल रही बिजली
Sun, 08 Sep 2024 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 08 Sep 2024 12:25 AM IST
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अंधेरे में इलाज करते डॉक्टर।
सीतापुर। जिला अस्पताल में शनिवार सुबह ओपीडी सहित अन्य वार्डों की अचानक बिजली गुल हो गई। सुबह 8:30 बजे गायब हुई बिजली सुबह 11 बजे के बाद बहाल हो पाई। इस दौरान मरीज गर्मी से बेहाल होकर ओपीडी के बाहर बैठे दिखाई दिए। बिजली न होने के कारण डॉक्टर भी गायब रहे। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मी मोबाइल की रोशनी में काम करते हुए दिखाई दिए।
जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति ठप होने से कतार में खड़े मरीज बेहाल दिखे। वहीं, तीमारदार पेड़ की छांव में बैठे नजर आए। इस दौरान अस्पताल के जिम्मेदारों ने जनरेटर चालू नहीं कराया। स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों का कहना है कि अक्सर लाइट गुल होने के बाद अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन गायब रहते हैं। मरीज संजय, प्रकाश व प्रीति का कहना था कि ओपीडी में वार्ड में अंधेरा होने के कारण डॉक्टर भी अपनी कुर्सी से उठ कर चले गए। एक घंटे तक लाइन में खड़े-खड़े परेशान हो गए। इसके बाद ओपीडी के बाहर काफी देर तक लाइट और डॉक्टर का इंंतजार किया, लेकिन न लाइट आई और न डॉक्टर।
दवा लेने के लिए करना पड़ा इंतजार
पुरुष काउंटर पर मरीजों को दवा लेने के लिए करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। लाइट जाने के बाद वहां भी कोई दवा देने वाला नजर नहीं आया। मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच जब बहसा-बहसी हुई तब कहीं जाकर मरीजों को दवा देना शुरू किया।
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जिला अस्पताल की बिजली आपूर्ति ठप होने से कतार में खड़े मरीज बेहाल दिखे। वहीं, तीमारदार पेड़ की छांव में बैठे नजर आए। इस दौरान अस्पताल के जिम्मेदारों ने जनरेटर चालू नहीं कराया। स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों का कहना है कि अक्सर लाइट गुल होने के बाद अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन गायब रहते हैं। मरीज संजय, प्रकाश व प्रीति का कहना था कि ओपीडी में वार्ड में अंधेरा होने के कारण डॉक्टर भी अपनी कुर्सी से उठ कर चले गए। एक घंटे तक लाइन में खड़े-खड़े परेशान हो गए। इसके बाद ओपीडी के बाहर काफी देर तक लाइट और डॉक्टर का इंंतजार किया, लेकिन न लाइट आई और न डॉक्टर।
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दवा लेने के लिए करना पड़ा इंतजार
पुरुष काउंटर पर मरीजों को दवा लेने के लिए करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। लाइट जाने के बाद वहां भी कोई दवा देने वाला नजर नहीं आया। मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच जब बहसा-बहसी हुई तब कहीं जाकर मरीजों को दवा देना शुरू किया।
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