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...तो आम आदमी से दूर रहेगी आम की मिठास

Thu, 26 May 2022 12:33 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 12:33 AM IST
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... then the sweetness of mango will stay away from the common man
औरंगाबाद क्षेत्र में लगे आम। - संवाद - फोटो : SITAPUR
औरंगाबाद/खैराबाद। आम का स्वाद चखने के लिए इस बार लोगों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी। इस बार आम की पैदावार पिछले साल की तुलना में कम हुई है। इस सीजन में तीन बार आई आंधी ने 30 फीसदी तक फसल का नुकसान कर दिया है। इससे व्यापारी परेशान हैं। व्यापारियों का कहना है कि अब तो लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
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पिछले साल आम की बंपर पैदावार से बागवानों के चेहरे खिल उठे थे। बाजार में महंगा आम बिकने से खूब मुनाफा कमाया था। इस बार आम का उत्पादन पिछले साल की अपेक्षा से काफी कम नजर आ रहा है। जिसमें बागवानों को मुनाफा तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। आम के उत्पादन में औरंगाबाद, खैराबाद व महमूदाबाद का नाम मशहूर है।
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यहां के आम अपने रसीले मीठे स्वाद और बड़े आकार की वजह से दूरदराज की मंडियों तक प्रमुखता से खरीदे जाते हैं। इस बार आम की पैदावार में आई भारी गिरावट के चलते बागवानी घाटे का सौदा साबित हो रही है। बागवान ही नहीं, व्यापारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
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स्थिति यह है कि पानी, कीटनाशक, भाड़ा आदि का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारी रियाजुल हक ने बताया कि पैदावार कम और मांग अधिक होने से आम के दाम काफी ऊंचे रहेंगे। पिछले साल दशहरी का रेट 1500 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल था। इस बार दशहरी आम की कम पैदावार होने से आम का रेट 2500 से 3500 के बीच रहने की उम्मीद है। पिछले वर्ष एक बीघा में 40 से 50 क्विंटल तक आम का उत्पादन हुआ था लेकिन इस बार महज 10 से 15 क्विंटल प्रति बीघा का उत्पादन मिलना भी मुश्किल हो रहा है। इस बार आम इंसान को आम का स्वाद लेना महंगा साबित होगा।

कीटों ने किया नुकसान
व्यापारियों का कहना है कि उत्पादन में आई गिरावट का कारण कई प्रकार के रोग भी बताए जा रहे हैं। होपर, चैंपा, रुजी, कटर रोग से पेड़ की डालियां भीतर से खोखली हो गईं है। बौर भी झड़ गया है। फफूंद और बंधा रोग से अधिकांश फल विकसित होने से पहले ही टूटकर गिर गए हैं। इस समय होपर और फफूंद रोग आम के पेड़ों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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