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Sitapur News: बबिता मानीं, पूनम अड़ीं, नीलकमल निर्दलीय खड़ीं
Fri, 21 Apr 2023 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 21 Apr 2023 12:15 AM IST
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सीतापुर। निकाय चुनाव में नाम वापसी का काम गुरुवार को पूरा हो गया। भाजपा से बगावत कर पर्चा दाखिल करने वालीं बबिता गुप्ता ने अपना नामांकन वापस ले लिया लेकिन पूनम मिश्रा नहीं मानी।
सपा से नामांकन दाखिल करने वालीं पूर्व विधायक राकेश राठौर की पत्नी नीलकमल राठौर ने भी निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला लिया है। वहीं योगी सरकार में नगर विकास राज्य मंत्री और सदर विधायक राकेश राठौर गुरु की भाभी किरन राठौर ने भी नामांकन वापस लेने से इनकार कर भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सीतापुर में अध्यक्ष पद के लिए 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। चर्चित चेहरों के उतरने से यहां चुनाव रोचक हो गया है।
नगर निकाय चुनाव में पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 17 अप्रैल को पूरी हो गई थी। 18 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच हुई थी। गुरुवार का दिन नाम वापसी के लिए तय था। 15 प्रत्याशियों ने सीतापुर से अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। निर्दलीय उम्मीदवार सरबती राठौर का नामांकन जांच के दौरान खारिज हो गया था।
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भाजपा से बगावत कर पर्चा दाखिल करने वालीं बबिता गुप्ता ने भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा पर भरोसा जताते हुए अपना नाम वापस ले लिया। भाजपा से ही बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने वालीं वरिष्ठ नेता पूनम मिश्रा को मनाने का सिलसिला गुरुवार को भी चला, लेकिन वह नहीं मानीं। अब वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं।
नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु की भाभी किरन राठौर ने भी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया था। उन्हें भी समझाने-बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। उधर, दूसरी ओर पूर्व विधायक राकेश राठौर की पत्नी नीलकमल राठौर भी निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। वह सपा से टिकट की दावेदार थीं और उन्हें सिंबल भी दिया गया था, लेकिन दो लोगों को एक ही सीट से सिंबल देने के बाद हुई जांच में निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें सपा का अधिकृत प्रत्याशी नहीं माना था।
निर्दलीय प्रत्याशी नीलकमल राठौर के पति पूर्व विधायक राकेश राठौर ने सधे शब्दों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राकेश राठौर ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले वह सपा में शामिल हुए थे। जून 2022 में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आश्वस्त किया था कि नगर पालिका अध्यक्ष का टिकट देंगे। सिंबल दिया भी, लेकिन न जाने कौन सा खेल कर दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ही जान सकते हैं कि वह किन परिस्थितियों में असमर्थ हो गए। राकेश राठौर ने दावा किया कि पूरी मजबूती से नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा जाएगा। विधायक रहने के दौरान किए गए कार्यों को लोग याद करते हैं और उन्हीं कार्यों की दम पर वह अपनी पत्नी के लिए वोट मांगेंगे।
सपा के लिए कम भाजपा के लिए ज्यादा मुसीबत नीलकमल
फौरी तौर पर भले ही यह नजर आ रहा हो कि नीलकमल राठौर सपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन इसका असर सपा पर कम और भाजपा पर ज्यादा पड़ने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, राकेश राठौर तेली समाज से आते हैं। बीते दिनों तैलिक महासंघ का सम्मेलन आयोजित कर वह समाज में अपनी पकड़ का प्रदर्शन कर चुके हैं। आम तौर पर तेली समाज को भाजपा का मतदाता माना जाता है। अब नीलकमल निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी और इससे सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही होने की संभावना है।
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सपा से नामांकन दाखिल करने वालीं पूर्व विधायक राकेश राठौर की पत्नी नीलकमल राठौर ने भी निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला लिया है। वहीं योगी सरकार में नगर विकास राज्य मंत्री और सदर विधायक राकेश राठौर गुरु की भाभी किरन राठौर ने भी नामांकन वापस लेने से इनकार कर भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सीतापुर में अध्यक्ष पद के लिए 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। चर्चित चेहरों के उतरने से यहां चुनाव रोचक हो गया है।
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नगर निकाय चुनाव में पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 17 अप्रैल को पूरी हो गई थी। 18 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच हुई थी। गुरुवार का दिन नाम वापसी के लिए तय था। 15 प्रत्याशियों ने सीतापुर से अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। निर्दलीय उम्मीदवार सरबती राठौर का नामांकन जांच के दौरान खारिज हो गया था।
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भाजपा से बगावत कर पर्चा दाखिल करने वालीं बबिता गुप्ता ने भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा पर भरोसा जताते हुए अपना नाम वापस ले लिया। भाजपा से ही बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने वालीं वरिष्ठ नेता पूनम मिश्रा को मनाने का सिलसिला गुरुवार को भी चला, लेकिन वह नहीं मानीं। अब वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं।
नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु की भाभी किरन राठौर ने भी निर्दलीय नामांकन दाखिल किया था। उन्हें भी समझाने-बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। उधर, दूसरी ओर पूर्व विधायक राकेश राठौर की पत्नी नीलकमल राठौर भी निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। वह सपा से टिकट की दावेदार थीं और उन्हें सिंबल भी दिया गया था, लेकिन दो लोगों को एक ही सीट से सिंबल देने के बाद हुई जांच में निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें सपा का अधिकृत प्रत्याशी नहीं माना था।
निर्दलीय प्रत्याशी नीलकमल राठौर के पति पूर्व विधायक राकेश राठौर ने सधे शब्दों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राकेश राठौर ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले वह सपा में शामिल हुए थे। जून 2022 में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आश्वस्त किया था कि नगर पालिका अध्यक्ष का टिकट देंगे। सिंबल दिया भी, लेकिन न जाने कौन सा खेल कर दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ही जान सकते हैं कि वह किन परिस्थितियों में असमर्थ हो गए। राकेश राठौर ने दावा किया कि पूरी मजबूती से नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा जाएगा। विधायक रहने के दौरान किए गए कार्यों को लोग याद करते हैं और उन्हीं कार्यों की दम पर वह अपनी पत्नी के लिए वोट मांगेंगे।
सपा के लिए कम भाजपा के लिए ज्यादा मुसीबत नीलकमल
फौरी तौर पर भले ही यह नजर आ रहा हो कि नीलकमल राठौर सपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन इसका असर सपा पर कम और भाजपा पर ज्यादा पड़ने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, राकेश राठौर तेली समाज से आते हैं। बीते दिनों तैलिक महासंघ का सम्मेलन आयोजित कर वह समाज में अपनी पकड़ का प्रदर्शन कर चुके हैं। आम तौर पर तेली समाज को भाजपा का मतदाता माना जाता है। अब नीलकमल निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी और इससे सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही होने की संभावना है।