{"_id":"694467ada6abc2e55d09aeff","slug":"the-cold-winds-along-with-the-fog-caused-discomfort-sitapur-news-c-102-1-stp1002-146490-2025-12-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: कोहरे के साथ ठंडी हवाओं ने सताया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: कोहरे के साथ ठंडी हवाओं ने सताया
Fri, 19 Dec 2025 02:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 19 Dec 2025 02:14 AM IST
विज्ञापन
सीतापुुर। कोहरे व गलन से जनजीवन प्रभावित रहा। बृहस्पतिवार को भी सर्द हवाओं के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दिन में धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली।
पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दो दिन सूरज भी दुबका रहा। बृहस्पतिवार की सुबह भी कोहरे में लिपट कर आई। ठंड इतनी जबरदस्त थी, कि लोग रजाई से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। हालांकि, सुबह नौ बजे आसमान साफ हो गया और 11 बजे के बाद धूप निकल आई।
दो दिनों बाद गुनगुनी धूप ने सर्दी से कुछ राहत पहुंचाई। मौसम खुलने पर जरूरी काम से लोग बाहर निकले। इससे शहर में रौनक दिखाई दी। दो दिन बाद खिली गुनगुनी धूप का आनंद लेने लोग घरों की छतों और लॉन में पहुंच गए।
विज्ञापन
धूप में बैठने पर सर्दी से राहत महसूस हुई पर दिन में करीब तीन किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली सर्द हवा से धूप के बीच भी ठिठुरन बरकरार रही। इससे छांव में जाते ही गलन परेशान करने लगती। सूरज के ढलने के साथ ही गलन का सितम फिर शुरू हो गया।
विज्ञापन
पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दो दिन सूरज भी दुबका रहा। बृहस्पतिवार की सुबह भी कोहरे में लिपट कर आई। ठंड इतनी जबरदस्त थी, कि लोग रजाई से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। हालांकि, सुबह नौ बजे आसमान साफ हो गया और 11 बजे के बाद धूप निकल आई।
विज्ञापन
दो दिनों बाद गुनगुनी धूप ने सर्दी से कुछ राहत पहुंचाई। मौसम खुलने पर जरूरी काम से लोग बाहर निकले। इससे शहर में रौनक दिखाई दी। दो दिन बाद खिली गुनगुनी धूप का आनंद लेने लोग घरों की छतों और लॉन में पहुंच गए।
विज्ञापन
धूप में बैठने पर सर्दी से राहत महसूस हुई पर दिन में करीब तीन किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली सर्द हवा से धूप के बीच भी ठिठुरन बरकरार रही। इससे छांव में जाते ही गलन परेशान करने लगती। सूरज के ढलने के साथ ही गलन का सितम फिर शुरू हो गया।